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महिलाओं के वित्तीय समावेशन में वृद्धि

चर्चा में क्यों

हाल ही में जारी एस.बी.आई. इकोरैप (SBI Ecowrap) की रिपोर्ट के अनुसार, विगत दो दशकों में महिलाओं के वित्तीय समावेशन में लगातार सुधार हो रहा है। जन धन अभियान के कारण बैंक खाता रखनेवालीमहिलाओंकी संख्यामेंवृद्धि हुई है।

प्रमुख बिंदु

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  • रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22के दौरान वृद्धिशील जमाओं(Incremental Deposits) में महिला जमाकर्ताओंकीहिस्सेदारी 35% थी, जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह 15% और वित्त वर्ष 2020 में यह 15% थी।
  • उल्लेखनीय है कि ग्रामीण बैंकों में वृद्धिशील जमाओं में महिलाओं का हिस्सा66% है, जबकि अर्ध-शहरी बैंकों में यह हिस्स्सा 41%,शहरी बैंकों में 32% और महानगरीय बैंकों में 28% है।
  • यही कारण हैं कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में वृद्धिशीलजमाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 119% हैं, जबकि विदेशी बैंकों में यह सिर्फ 1% है।
  • आंकड़ोंकेअनुसार,बैंक खातों वाली महिलाओं की संख्या वर्ष 2015-16 में 53% से बढ़कर वर्ष 2019-21 में 78.6% हो गई है।

योजनाओं का प्रभाव

  • रिपोर्ट में उन महिलाओं की हिस्सेदारी पर भी प्रकाश डाला गया है, जिन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया गया है, जिनका उद्देश्य उन्हें सशक्त बनाना है। वर्तमान में प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 56% (लगभग 2,500 लाख खाते) बैंक खातों महिलाओं के हैं।
  • माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा) के कुल ऋणों की संख्या का 71% महिलाओं को वितरित किया जाता है।अटल पेंशन योजना के लाभार्थियों में भी 44% महिलाएँ हैं।
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