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भारत-यू.ए.ई.व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : द्विपक्षीय संबंध, भारत से संबंधित औरभारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार)

संदर्भ

  • हाल ही में, भारतीय प्रधानमंत्री और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के मध्य आयोजित हालिया वर्चुअल बैठक मेंभारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किये हैं। भारत के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला यह पहला खाड़ी देश है। 
  • सी.ई.पी.ए. के अतिरिक्त दोनों देशों के बीच कई अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये गए जिनमें यू.ए.ई. के लिये'खाद्य सुरक्षा कॉरिडोर पहल' पर एपीडा एवं डी.पी. वर्ल्‍ड एंड अल दाहरा के बीच समझौता ज्ञापन और गिफ्ट सिटी और अबू धाबी ग्लोबल मार्केट के बीच वित्तीय परियोजनाओं एवं सेवाओं में सहयोग पर समझौता ज्ञापन शामिल हैं।

भारत के लिये समझौते का महत्त्व 

  • 2011 के पश्चात् किसी प्रमुख व्यापारिक भागीदार के साथ भारत द्वारा किया गया यह पहला व्यापार समझौता है। विदित है कि 2011 में भारत ने जापान के साथ इस समझौते को संपन्न किया था।
  • इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्‍तुओं के व्यापार को आगामी पाँच वर्षों में 60 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करना है।
  • इसके तहतयू.ए.ई.अपनी 80 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क को समाप्त करेगा, जो कि मूल्य के आधार पर भारत द्वारा यू.ए.ई. को किये जाने वाले निर्यात का 90 प्रतिशत भाग है।
  • वर्तमान में जिन भारतीय उत्पादों पर यू.ए.ई.द्वारा 5% आयात शुल्क आरोपित किया जाता है, ऐसे लगभग $26 बिलियन डॉलर के भारतीय उत्पादों को इस समझौते से लाभ होने की संभावना है।
  • यह समझौता कपड़ा और वस्त्र जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देगा। एक अनुमान के अनुसार भारत आगामी दो वर्षों में यू.ए.ई. में अतिरिक्त $2 बिलियन के वस्त्र निर्यात कर सकेगा।विदित है कि वर्तमान में भारत के निर्यातक अधिक आयात शुल्क के कारण इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना कर रहे हैं।
  • इस समझौते से रत्न एवं आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, जूते, फर्नीचर, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग वस्तुएं, दवा, चिकित्सा उपकरण, खेल के सामान आदि प्रमुख क्षेत्र लाभान्वित होंगे, जो भारत के विविध क्षेत्रों में 10 लाख अतिरिक्त रोज़गार का सृजन कर सकेंगे।

द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति

  • द्विपक्षीय व्यापार
    • यू.ए.ई. भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार देश है। पिछले वित्त वर्ष में यह संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था। वित्तीय वर्ष 2019-20 में भारत द्वारा लगभग 29 बिलियन डॉलर का निर्यात किया गया।
    • भारत द्वारा यू.ए.ई. को किये गए प्रमुख निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातुएँ एवंपत्थर, रत्न और आभूषण, खनिज, खाद्य पदार्थ (अनाज, चीनी, फल और सब्जियाँ, चाय, मांस और समुद्री भोजन), कपड़ा, इंजीनियरिंग और मशीनरी उत्पाद एवं रसायन शामिल हैं।
    • यू.ए.ई.से भारत को होने वाले आयात में पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातुएँ, पत्थर, रत्न और आभूषण, खनिज, रसायन तथा लकड़ी एवं लकड़ी के उत्पाद शामिल हैं। विदित है कि भारत ने वर्ष 2019-20 में यू.ए.ई.से 10.9 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल आयात किया।
  • निवेश : संयुक्त अरब अमीरात भारत में आठवाँ सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने अप्रैल 2000 से मार्च 2021 के बीच 11 अरब डॉलर का निवेश किया है, वहींयू.ए.ई.में भारतीय कंपनियों द्वारा लगभग 85 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किये जाने का अनुमान है।
  • प्रेषण :
    • यू.ए.ई. में विशाल भारतीय समुदाय निवास करता है, जो यू.ए.ई. की कुल आबादी का 34% है। 
    • विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत को वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान यू.ए.ई. से प्रेषण (Remittance) के माध्यम से 105 अरब रुपए प्राप्त हुए हैं। यह अमेरिका के बाद भारत में प्रेषण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।

    भारत के लिये यू.ए.ई. का महत्त्व 

    • मध्य पूर्व के लिये यू.ए.ई. को भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस समझौते के द्वारा आयात शुल्क (5%) को समाप्त करने सेदोनों देशों के मध्य व्यापार में वृद्धि होगी।
    • यू.ए.ई.उन देशों मेंशामिल है,जिसने भारत के जम्मू और कश्मीर में निवेश करने में अपनी रुचि प्रकट की है।
    • दोनों पक्ष अफगानिस्तान जैसे बड़े क्षेत्रीय मुद्दों और तालिबान के शासन पर भी नियमित संपर्क में हैं।
    • ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारत ने सामरिक पेट्रोलियम भंडार में यू.ए.ई.  को सहयोग के लिये आमंत्रित किया है। विदित है कि यू.ए.ई.  कच्चे तेल के संदर्भ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है और एल.पी.जी. और एल.एन.जी. का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। 

    निष्कर्ष

    स्पष्ट है कि व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता दोनों देशों के मध्य आर्थिक संबंधों को नवीन ऊँचाइयां प्रदान करने में सहायक होगा। साथ ही, यह समझौता दोनों देशों के समग्र सामरिक गठजोड़ को भी मजबूती प्रदान कर सकेगा।

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