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सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP): जल सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन और भारत-चीन रणनीतिक चिंताएँ

प्रारंभिक परीक्षा: सियांग नदी; सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट; अरुणाचल प्रदेश; जलविद्युत; जल भंडारण; NHPC; ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र
मुख्य परीक्षा: GS Paper I – भूगोल; GS Paper II – अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS Paper III – अवसंरचना, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा; अंतरराष्ट्रीय नदियाँ
फोकस क्षेत्र: सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट, जल सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन, चीन की मेदोग परियोजना, अरुणाचल प्रदेश और ब्रह्मपुत्र बेसिन

चर्चा में क्यों?

  • अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मीन ने कहा है कि प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि सियांग बेसिन में जल भंडारण, जल प्रवाह के नियमन और जल प्रबंधन को मजबूत करना है।
  • इस परियोजना में लगभग 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) लाइव स्टोरेज प्रस्तावित है। इससे अचानक होने वाले जल प्रवाह या अत्यधिक ऊपरी प्रवाह की स्थिति में निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट क्या है?

  • सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक बड़े पैमाने की बहुउद्देशीय जल एवं जलविद्युत परियोजना है।
  • परियोजना की प्रस्तावित स्थापित क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट, बांध की ऊँचाई लगभग 280–300 मीटर तथा लाइव स्टोरेज लगभग 9.2 BCM है।
  • राज्य सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जल भंडारण, निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह का नियमन और बाढ़ के जोखिम को कम करना भी शामिल है।
  • यह परियोजना नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) से जुड़ी है और वर्तमान में प्रारंभिक मूल्यांकन तथा सर्वेक्षण के चरण में है।

सियांग नदी का भौगोलिक महत्व

  • सियांग अरुणाचल प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • तिब्बत में इस नदी को यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है। यह अरुणाचल प्रदेश के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है और आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का हिस्सा बनती है।
  • इसलिए सियांग नदी से संबंधित विकास का प्रभाव केवल जलविद्युत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध जल सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन, कृषि, पारिस्थितिकी और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों से भी है।

SUMP: केवल जलविद्युत परियोजना नहीं

  • प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता के कारण इस परियोजना को मुख्यतः इसकी विशाल बिजली उत्पादन क्षमता के लिए देखा जाता है।
  • हालाँकि, उपमुख्यमंत्री चाउना मीन के अनुसार, परियोजना का मूल्यांकन केवल इसकी स्थापित बिजली क्षमता के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
  • प्रस्तावित 9.2 BCM लाइव स्टोरेज जल के नियंत्रित भंडारण और उसे आवश्यकतानुसार छोड़ने की क्षमता प्रदान कर सकता है।
  • अचानक ऊपरी क्षेत्रों से जल छोड़ने या अत्यधिक जल प्रवाह की स्थिति में ऐसा भंडारण निचले क्षेत्रों में जल निकासी को नियंत्रित करने और बाढ़ के जोखिम को कम करने में संभावित रूप से सहायता कर सकता है।

चीन की मेदोग परियोजना और भारत की चिंताएँ

  • ब्रह्मपुत्र नदी का ऊपरी क्षेत्र तिब्बत में स्थित है, जहाँ इसे यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है।
  • चीन ने तिब्बत के मेदोग क्षेत्र में एक विशाल जलविद्युत परियोजना प्रस्तावित की है। इससे भारत में यह चिंता बढ़ी है कि ऊपरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे के निर्माण से निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
  • चीनी परियोजना की रिपोर्ट की गई क्षमता लगभग 60,000 मेगावाट है, जो SUMP की प्रस्तावित क्षमता से काफी अधिक है।
  • हालाँकि, चाउना मीन का तर्क है कि दोनों परियोजनाओं की तुलना केवल स्थापित क्षमता के आधार पर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि दोनों की प्रस्तावित भूमिकाएँ और भंडारण संबंधी विशेषताएँ अलग-अलग हैं।

संकेतात्मक तुलना

पैरामीटर

SUMP – भारत

मेदोग परियोजना – चीन

स्थान

अरुणाचल प्रदेश

तिब्बत

रिपोर्टेड/प्रस्तावित क्षमता

लगभग 11,200 MW

लगभग 60,000 MW

मुख्य फोकस

जल भंडारण, जल प्रवाह नियमन और बिजली उत्पादन

जलविद्युत उत्पादन

रिपोर्टेड/प्रस्तावित भंडारण

लगभग 9.2 BCM लाइव स्टोरेज

लगभग 5.5 BCM रिपोर्टेड

नदी तंत्र

सियांग–ब्रह्मपुत्र

यारलुंग त्सांगपो

बाढ़ प्रबंधन में भूमिका

  • ब्रह्मपुत्र बेसिन के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश और असम में।
  • एक बड़ा जलाशय अत्यधिक जल प्रवाह के दौरान पानी को संग्रहित कर सकता है और बाद में इसे नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा सकता है।
  • इसलिए SUMP को बाढ़ के प्रभाव को कम करने और निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह के प्रबंधन के संभावित साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • हालाँकि, बाढ़ के जोखिम को कम करने में परियोजना की वास्तविक प्रभावशीलता विस्तृत जलवैज्ञानिक अध्ययन, जलाशय संचालन, निचले क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय आकलन पर निर्भर करेगी।

भारत की जल सुरक्षा के लिए महत्व

  • सियांग एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय नदी प्रणाली का हिस्सा है, जिसका ऊपरी क्षेत्र भारत के बाहर स्थित है।
  • इस कारण सीमापार जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चिंता बन जाता है।
  • ऊपरी ब्रह्मपुत्र बेसिन में चीन द्वारा बुनियादी ढाँचे के विकास ने भारत के लिए जल भंडारण, जलवैज्ञानिक निगरानी, बाढ़ पूर्वानुमान और आपदा तैयारी की क्षमता विकसित करने के महत्व को बढ़ा दिया है।
  • इस संदर्भ में SUMP भारत की निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू ऊर्जा अवसंरचना को भी सुदृढ़ कर सकता है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

  • परियोजना का महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है।
    • जल सुरक्षा: बड़ी भंडारण क्षमता भारत की मौसमी तथा अत्यधिक जल प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता को मजबूत कर सकती है।
    • बाढ़ प्रबंधन: नियंत्रित जल निकासी अत्यधिक जल प्रवाह की घटनाओं के दौरान निचले क्षेत्रों में जल के दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।
    • ऊर्जा सुरक्षा: लगभग 11,200 मेगावाट की स्थापित क्षमता भारत के जलविद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
    • पूर्वोत्तर का विकास: परियोजना अरुणाचल प्रदेश में रोजगार, अवसंरचना और आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है।
    • रणनीतिक अवसंरचना: रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में बड़े पैमाने की अवसंरचना भारत की व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों में योगदान दे सकती है।
    • सीमापार नदी प्रबंधन: यह उन नदियों के संबंध में भारत की तैयारी के महत्व को रेखांकित करता है, जिनका उद्गम भारत के क्षेत्र से बाहर होता है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • पर्यावरणीय चिंताएँ: बड़े बांध से नदी की पारिस्थितिकी, तलछट के परिवहन और निचले क्षेत्रों के पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।
  • भूकंपीय जोखिम: अरुणाचल प्रदेश एक अत्यधिक भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इसलिए विस्तृत भूवैज्ञानिक और भूकंपीय आकलन आवश्यक है।
  • स्थानीय समुदायों की चिंताएँ: स्थानीय समुदायों की भागीदारी, सहमति, पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा परियोजना की सामाजिक स्वीकार्यता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • सीमापार जल संबंधी मुद्दे: भारत को ऊपरी ब्रह्मपुत्र बेसिन में होने वाले विकास की लगातार निगरानी करनी होगी तथा जलवैज्ञानिक सहयोग और डेटा-साझाकरण तंत्र को मजबूत करना होगा।
  • आर्थिक और तकनीकी व्यवहार्यता: परियोजना का विशाल आकार निर्माण लागत, भूवैज्ञानिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय प्रभावों और दीर्घकालिक लाभों के विस्तृत मूल्यांकन की आवश्यकता पैदा करता है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित है।
  2. इसमें बड़े पैमाने पर जल भंडारण का घटक प्रस्तावित है।
  3. इसका उद्देश्य केवल जलविद्युत उत्पादन तक सीमित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल 1 और 2

B. केवल 2 और 3

C. केवल 1 और 3

D. 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के प्रभाव जलविद्युत उत्पादन से कहीं आगे तक जाते हैं तथा यह भारत की जल सुरक्षा और रणनीतिक हितों से निकटता से जुड़ा हुआ है।” चर्चा कीजिए।

FAQs

Q1. सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट क्या है?

SUMP अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित बड़े पैमाने की बहुउद्देशीय जल एवं जलविद्युत परियोजना है।

Q2. SUMP की प्रस्तावित क्षमता कितनी है?

इसकी प्रस्तावित स्थापित क्षमता लगभग 11,200 मेगावाट है।

Q3. SUMP के तहत कितना लाइव स्टोरेज प्रस्तावित है?

परियोजना में लगभग 9.2 BCM लाइव स्टोरेज प्रस्तावित है।

Q4. सियांग नदी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों है?

सियांग नदी ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का हिस्सा है और तिब्बत में स्थित यारलुंग त्सांगपो से जुड़ी हुई है। इसलिए यह भारत की जल सुरक्षा और सीमापार नदी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

Q5. क्या SUMP को अंतिम निर्माण स्वीकृति मिल गई है?

नहीं। परियोजना अभी प्रारंभिक मूल्यांकन के चरण में है, जिसमें प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) और सर्वेक्षण संबंधी गतिविधियाँ शामिल हैं। अंतिम निर्माण के लिए आगे के अध्ययन और वैधानिक स्वीकृतियों की आवश्यकता होगी।

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