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कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से सम्बंधित विषय)

  • हाल ही में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एम.एस.डी.ई.) द्वारा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड के चिन्हित 116 ज़िलों में 3 लाख प्रवासी श्रमिकों के लिये कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
  • इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा आगे बढ़कर राज्यों के समग्र विकास के लिये केंद्रीय क्षेत्रक योजनाओं के साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं का संचालन किया जाता है।
  • इसका लक्ष्य प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पी.एम.के.वी.वाई.) 2016-2020 के केंद्र प्रायोजित और केंद्र प्रबंधित (सी.एस.सी.एम.) घटक के तहत कोविड महामारी के बाद श्रमिकों और ग्रामीण आबादी को मांग संचालित कौशल और अभिविन्यास प्रदान करना है।
  • जिला मजिस्ट्रेटों के सहयोग से मंत्रालय 125 दिनों के भीतर कौशल प्रशिक्षण के लिये चयनित ज़िलों में कार्यक्रम शुरू करेगा।

प्रवासी श्रमिकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम : एक नज़र में

  • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एन.एस.डी.सी.), पी.एम.के.वी.वाई. 2016-20 या राज्य योजनाओं के तहत कार्यरत मौजूदा प्रशिक्षण प्रदाताओं और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कर रहा है।
  • 1.5 लाख प्रवासी कामगारों को लघु अवधि के प्रशिक्षण (एस.टी.टी.) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है और अन्य 1.5 लाख प्रवासी श्रमिकों को पूर्व अधिगम की मान्यता (Recognition of Prior Learning: RPL) योजना के तहत प्रशिक्षित किये जाने की योजना है।
  • इन ज़िलों में स्थानीय नौकरियों के लिये प्रशिक्षण के लिये प्रवासी कामगारों को जुटाने का कार्य ज़िला प्रशासन द्वारा किया जाता है।

ग्रामीण विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकता

  • ग्रामीण विकास, कौशल भारत मिशन का एक मूल तत्व है क्योंकि कुल कार्यबल का 70% ग्रामीण भारत में निवास करता है। उद्योग की बदलती ज़रूरतों के साथ ग्रामीण कार्यबल तैयार करने के लिये कुशल पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न भागीदारों के बीच तालमेल की आवश्यकता होती है।
  • महामारी के दौरान कार्यबल के विस्थापन के बाद प्रवासी कुशल श्रमिकों के लिये स्थाई आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने हेतु, स्थानीय या क्षेत्रीय माँग के हिसाब से नौकरियों के निर्माण का दबाव लगातार सरकार पर बन रहा था जिसके लिये ऐसे कार्यक्रम की सख्त आवश्यकता थी।
  • कौशल मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2016-2020 के तहत अब तक 92 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि नौकरी की भूमिकाओं के अनुसार 150 से 300 घंटों के बीच होती है।
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