रिलीफ पहल (The RELIEF Initiative)

संदर्भ 

हाल ही में वाणिज्य विभाग ने रिलीफ (आरईएलआईईएफ) पहल के घटक-II के तहत परिचालन अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च, 2027 तक कर दिया है। 

रिलीफ पहल के बारे में  

  • रिलीफ पहल की शुरुआत 19 मार्च, 2026 को निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत की गई थी। 
  • इसे लाल सागर, फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया के व्यापक समुद्री परिवहन मार्गों में बढ़ते शिपिंग अधिभार, जहाजों के मार्ग में बदलाव और पारगमन संबंधी जोखिमों से निपटने के लिए तैयार किया गया। 
  • नोडल विभाग: वाणिज्य विभाग 
  • कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी लिमिटेड)   
  • कार्यान्वयन का माध्यम: ईसीजीसी का डिजिटल पोर्टल

उद्देश्य: 

  • रिलीफ (निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन एवं लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप) भारतीय निर्यातकों को वित्तीय सहायता और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने वाली एक लक्षित तथा निश्चित अवधि की योजना है। 
  • इसका उद्देश्य बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन व्यवस्था में आ रही बाधाओं के बीच भारतीय निर्यातकों को राहत देना है।  

घटक-II की प्रमुख विशेषताएं: 

  • 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज: इस घटक के तहत ईसीजीसी के माध्यम से खाड़ी और आसपास के पश्चिम एशियाई क्षेत्रों में निर्धारित गंतव्यों के लिए भेजे जाने वाले आगामी निर्यात माल पर 95 प्रतिशत तक का बढ़ा हुआ ऋण जोखिम कवरेज प्रदान किया जाता है। 
  • बीमा पॉलिसियों में लचीलापन: यह सुविधा 16 मार्च, 2026 या उसके बाद ली गई व्यक्तिगत निर्यात पॉलिसियों और संपूर्ण कारोबार को कवर करने वाली पॉलिसियों, दोनों पर लागू होती है। इससे नए और मौजूदा पॉलिसीधारक अपने आगामी निर्यात शिपमेंट से जुड़े जोखिमों से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।   
  • बीमा प्रीमियम में वृद्धि से सुरक्षा: पात्र निर्यातकों द्वारा देय बीमा प्रीमियम को संकट से पहले के आधार स्तर पर सीमित रखा जाता है। सामान्य दरों से अधिक जोखिम लागत का अंतर केंद्र सरकार वहन करती है।
  • विभिन्न प्रकार के माल को कवरेज: इस योजना में पूर्ण कंटेनर लोड (एफसीएल), आंशिक कंटेनर लोड (एलसीएल) और प्रशीतित कंटेनरों में भेजे जाने वाले माल को शामिल किया गया है। हालांकि, थोक ऊर्जा, कच्चे तेल की खेप और दोबारा आयात किए गए माल को इससे बाहर रखा गया है।
  • सरल डिजिटल दावा प्रक्रिया: योजना का संचालन पूरी तरह ईसीजीसी के ग्राहक पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। दावा प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए चरणबद्ध वीडियो मार्गदर्शिकाएं तथा डिजिटल सत्यापन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।  

महत्त्व: 

  • निर्यातकों की लागत में कमी: युद्ध संबंधी जोखिमों के बीमा खर्च को संकट से पहले के स्तर पर सीमित रखने और उस पर सरकारी सहायता देने से भारतीय कृषि उत्पादों तथा इंजीनियरिंग वस्तुओं की लागत बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। इससे पश्चिम एशियाई बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहती है।
  • लघु एवं मध्यम उद्यमों को सहायता: यह योजना ऋण गारंटी उपलब्ध कराती है, जिससे वाणिज्यिक बैंकों को लघु एवं मध्यम उद्यमों के निर्यात के लिए ऋण सुविधाएं देने का भरोसा मिलता है। इससे बैंकों द्वारा जोखिम के नाम पर अधिक ब्याज या अतिरिक्त शुल्क लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है।   
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