हाल ही में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने वर्ष 2036 तक देश में अपने घरेलू यूरेनियम उत्पादन को दोगुना करने की योजना बनाई है। इसके लिए कंपनी चार ग्रीनफील्ड खनन एवं प्रसंस्करण परियोजनाओं पर काम कर रही है। साथ ही, तांबे की खदानों से निकलने वाले अवशेषों से यूरेनियम निकालने की नई पहल भी इस योजना का हिस्सा है।
प्रमुख बिंदु
चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूसीआईएल को 2029-30 से तांबे की खदानों के अवशेषों से यूरेनियम की पुनर्प्राप्ति शुरू करने की उम्मीद है। इस संबंध में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के साथ समझौता भी किया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस पहल से खनन की लागत घटेगी और यूरेनियम की पुनर्प्राप्ति अधिक किफायती हो सकेगी।
निजी कंपनियों को अनुमति:
निजी कंपनियों को परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यूरेनियम के खनन का नियंत्रण अभी भी सरकार के पास है और यह कार्य यूसीआईएल के माध्यम से किया जाता है।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी यूसीआईएल के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा करने के बजाय उसकी क्षमताओं को मजबूत और पूरक करेगी।
यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के बारे में
यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की स्थापना 4 अक्टूबर 1967 को हुई थी। यह परमाणु ऊर्जा चक्र के अग्रिम पंक्ति में एक विशेष स्थान के साथ परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है।
प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर्स की यूरेनियम की आवश्यकता को पूरा करते हुए, यूसीआईएल देश के परमाणु ऊर्जा उत्पादन में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यूसीआईएल झारखंड राज्य में छह भूमिगत खदानों (बागजाता, जादुगुड़ा, भाटिन, नरवापहार, तुरमदीह और मोहुलडीह) और एक खुली खदान (बंदुहुरांग) का संचालन करती है। इन खानों से उत्पादित अयस्क जादुगुड़ा और तुरमदीह में स्थित दो प्रसंस्करण संयंत्रों में संसाधित किया जाता है।
यूसीआईएल आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ली में एक भूमिगत खान और प्रसंस्करण संयंत्र भी चला रहा है। कंपनी ने झारखंड में अपने कुछ संचालन का विस्तार किया है और देश के विभिन्न हिस्सों में नई खदानों और संयंत्रों की स्थापना के लिए परियोजना पूर्व गतिविधियाँ शुरू कर दी हैं, अर्थात् - कर्नाटक में गोगी और राजस्थान में रोहिल।