प्रारंभिक परीक्षा: विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व स्वास्थ्य सभा, विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता, रोगजनकों तक पहुँच और लाभ-साझाकरण, वन हेल्थ, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, ट्रिप्स। मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II – अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, वैश्विक स्वास्थ्य शासन, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, भारत एवं ग्लोबल साउथ; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III – जैव प्रौद्योगिकी, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं स्वास्थ्य सुरक्षा। प्रमुख शब्द: विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता, महामारी संधि, PABS परिशिष्ट, महामारी संबंधी तैयारियाँ, टीकों तक न्यायसंगत पहुँच, वन हेल्थ दृष्टिकोण, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, भारत का टीका विनिर्माण। |
चर्चा में क्यों?
- 12 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया संबंधी राजनीतिक घोषणा को अपनाया। इससे पहले, 25 सितंबर 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस पर विचार किया गया था।
- घोषणा में सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों, चिकित्सा उत्पादों तक न्यायसंगत पहुँच और महामारी संबंधी तैयारियों में निरंतर निवेश के प्रति राजनीतिक समर्थन दोहराया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता क्या है?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य महामारियों की रोकथाम, उनसे निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बेहतर बनाना है।
- इसका केंद्रीय उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य की आपात स्थितियों में टीकों, दवाओं, नैदानिक साधनों और अन्य आवश्यक संसाधनों तक अधिक न्यायसंगत पहुँच उपलब्ध हो।
रोगजनकों तक पहुँच और लाभ-साझाकरण व्यवस्था
प्रस्तावित PABS व्यवस्था दो जिम्मेदारियों को जोड़ती है:
- रोगजनक सामग्री और आनुवंशिक अनुक्रम संबंधी जानकारी को शीघ्र साझा करना।
- इन संसाधनों का उपयोग करके विकसित टीकों, उपचार संबंधी उत्पादों और नैदानिक साधनों तक न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करना।
महामारी-संबंधी चिकित्सा उत्पादों तक पहुँच
महामारी संबंधी आपात स्थिति के दौरान समझौते में भागीदार विनिर्माताओं द्वारा संबंधित टीकों, उपचार संबंधी उत्पादों और नैदानिक साधनों के तत्कालीन उत्पादन के 20% तक विश्व स्वास्थ्य संगठन की त्वरित पहुँच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस व्यवस्था में शामिल हैं:
- तत्कालीन उत्पादन का न्यूनतम 10% दान के रूप में उपलब्ध कराना।
- 20% के लक्ष्य को पूरा करने के लिए शेष हिस्सा किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराना।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों और आवश्यकताओं के आधार पर आवंटन करना।
वन हेल्थ दृष्टिकोण
समझौता वन हेल्थ अर्थात ‘एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच परस्पर संबंधों को स्वीकार करता है।
इसके अंतर्गत रोकथाम संबंधी प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं:
- स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और पर्यावरण संबंधी प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय।
- महामारी का रूप ले सकने वाले रोगों की निगरानी को मजबूत करना।
- रोगों के उभरने और फैलने में योगदान देने वाले कारकों की पहचान करना।
भारत के लिए यह दृष्टिकोण सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशुधन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय निगरानी के बीच समन्वय की दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है।
सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियाँ और स्वास्थ्यकर्मी
- महामारी से निपटने की तैयारी के लिए चिकित्सा आपूर्ति के साथ-साथ प्रभावी ढंग से कार्य करने वाली स्वास्थ्य प्रणालियाँ भी आवश्यक हैं।
- समझौता स्वास्थ्य प्रणालियों की संकटों का सामना करने की क्षमता तथा स्वास्थ्य एवं देखभाल कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण पर ध्यान देता है।
- इसकी व्यावहारिक प्राथमिकताओं में पर्याप्त कर्मचारी, प्रयोगशाला क्षमता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ, आपातकालीन योजना और आवश्यक सेवाओं तक भरोसेमंद पहुँच शामिल हैं।
अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विनिर्माण
- यह ढाँचा अनुसंधान सहयोग तथा महामारी-संबंधी स्वास्थ्य उत्पादों के उत्पादन को अधिक विविध भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित करने को बढ़ावा देता है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण परस्पर सहमत शर्तों पर किया जाना है। साथ ही, अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अंतर्गत मौजूदा अधिकार और दायित्व भी प्रासंगिक बने रहते हैं।
- विकासशील देशों के लिए पेटेंट तक पहुँच के साथ-साथ विनिर्माण संबंधी विशेषज्ञता, प्रशिक्षित कर्मियों और उत्पादन प्रौद्योगिकी तक पहुँच भी आवश्यक है।
आपूर्ति शृंखलाएँ और वित्तपोषण
- समझौते के कार्यान्वयन में सहायता के लिए वैश्विक आपूर्ति शृंखला एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तथा समन्वयकारी वित्तीय तंत्र का प्रावधान किया गया है।
- इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य आवश्यक उत्पादों तक पहुँच बेहतर बनाना और विशेष रूप से विकासशील देशों में महामारी संबंधी तैयारियों के लिए वित्तपोषण को मजबूत करना है। इनकी प्रभावशीलता संचालन संबंधी व्यवस्थाओं और निरंतर समर्थन पर निर्भर करेगी।
राष्ट्रीय संप्रभुता
- समझौता विश्व स्वास्थ्य संगठन को किसी देश में लॉकडाउन लागू करने, टीकाकरण अनिवार्य करने या राष्ट्रीय कानून थोपने का अधिकार नहीं देता।
- देश अपनी स्वास्थ्य नीतियों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के लिए स्वयं जिम्मेदार बने रहते हैं। इसलिए समझौते के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग, राष्ट्रीय निर्णय-प्रक्रिया के साथ-साथ कार्य करता है।
महामारी समझौता और संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक घोषणा: प्रमुख अंतर
|
आधार
|
विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता
|
PPPR पर संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक घोषणा
|
|
प्रकृति
|
अंतरराष्ट्रीय संधि
|
गैर-बाध्यकारी राजनीतिक प्रतिबद्धता
|
|
संस्थागत मंच
|
विश्व स्वास्थ्य सभा
|
संयुक्त राष्ट्र महासभा
|
|
मुख्य उद्देश्य
|
महामारी संबंधी निरंतर सहयोग के लिए एक ढाँचा स्थापित करना
|
राजनीतिक नेतृत्व और सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना
|
|
कानूनी प्रभाव
|
लागू होने की संबंधित शर्तें पूरी होने पर पक्षकारों के लिए बाध्यकारी
|
स्वयं संधि-संबंधी दायित्व उत्पन्न नहीं करती
|
|
परस्पर संबंध
|
संधि का ढाँचा प्रदान करता है
|
कार्यान्वयन और तैयारियों के लिए राजनीतिक समर्थन मजबूत करती है
|
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की पहचान, अधिसूचना और प्रतिक्रिया के लिए एक पूरक ढाँचा बने हुए हैं।
महत्त्व
- वैश्विक स्वास्थ्य में न्यायसंगत पहुँच को बढ़ावा: रोगजनकों को साझा करने की व्यवस्था को चिकित्सा उत्पादों तक पहुँच से जोड़ने से COVID-19 के दौरान सामने आए लाभों के असमान वितरण को दूर करने में मदद मिल सकती है।
- आपात स्थिति से पहले तैयारी को प्रोत्साहन: निगरानी प्रणालियों, स्वास्थ्यकर्मियों और प्रयोगशालाओं में निरंतर निवेश से प्रकोप फैलने के बाद तदर्थ उपायों पर निर्भरता कम हो सकती है।
- सामूहिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती: संक्रामक रोग राष्ट्रीय सीमाओं से परे फैलते हैं। बेहतर समन्वय और समय पर जानकारी साझा करने से शीघ्र पहचान तथा अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया में सहायता मिल सकती है।
- क्षेत्रीय उत्पादन क्षमता को समर्थन: विनिर्माण का व्यापक आधार सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता घटा सकता है और वैश्विक कमी के दौरान उपलब्धता बेहतर बना सकता है।
- स्वास्थ्य और विकास के बीच संबंध: महामारी संबंधी तैयारियाँ आजीविका, शिक्षा, व्यापार और सार्वजनिक वित्त की भी रक्षा करती हैं। इसलिए ये विकास नीति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चुनौतियाँ
- PABS व्यवस्था से जुड़े अनसुलझे मुद्दे: वार्ता में वैज्ञानिक उपयोग के लिए त्वरित पहुँच और भरोसेमंद तथा समयबद्ध लाभ-साझाकरण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की अक्टूबर 2026 की अद्यतन जानकारी के अनुसार, परिशिष्ट को अंतिम रूप देना अभी शेष है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में बाधाएँ: लाइसेंस संबंधी शर्तों पर सहमति होने से जटिल चिकित्सा उत्पादों के विनिर्माण के लिए आवश्यक व्यावहारिक विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमता स्वतः उपलब्ध नहीं हो जाती।
- वित्तपोषण की अनिश्चितता: महामारी संबंधी तैयारियों के लिए निरंतर व्यय आवश्यक है। सुनिश्चित वित्तपोषण के बिना राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के परिणाम सीमित रह सकते हैं।
- कार्यान्वयन क्षमता में असमानता: देशों की प्रयोगशाला अवसंरचना, नियामक क्षमता, स्वास्थ्य कार्यबल और वित्तीय संसाधनों में व्यापक अंतर है।
- आपूर्ति में राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता: आपात स्थितियों के दौरान घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण भंडारण और व्यापार-प्रतिबंध संबंधी उपाय बढ़ सकते हैं। इससे न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय वितरण कठिन हो सकता है।
- जवाबदेही और जनविश्वास: कार्यान्वयन भरोसेमंद रिपोर्टिंग, पारदर्शी आवंटन और सहयोग पर निर्भर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की शक्तियों के बारे में भ्रामक दावे जनसमर्थन को और कमजोर कर सकते हैं।
निष्कर्ष
विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता वैश्विक महामारी सहयोग को अधिक न्यायसंगत और भरोसेमंद बनाने का अवसर प्रदान करता है। इसकी सफलता व्यावहारिक PABS व्यवस्था, सतत वित्तपोषण और मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं पर निर्भर करेगी। भारत के लिए प्राथमिकता वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व को घरेलू तैयारियों, तकनीकी क्षमता और चिकित्सा उत्पादों तक किफायती पहुँच के साथ जोड़ना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न
विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौते को विश्व स्वास्थ्य संगठन संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अपनाया गया था?
(a) अनुच्छेद 7 (b) अनुच्छेद 19 (c) अनुच्छेद 21 (d) अनुच्छेद 33
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न
“चिकित्सा प्रतिउपायों तक न्यायसंगत पहुँच, प्रभावी वैश्विक महामारी तैयारियों का केंद्रीय आधार है।” भारत के विशेष संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौते के महत्त्व और इसके कार्यान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
|
FAQs
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता क्या है?
यह मई 2025 में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया में सहयोग को मजबूत करना है। इसमें चिकित्सा उत्पादों तक न्यायसंगत पहुँच पर विशेष जोर दिया गया है।
2. क्या विश्व स्वास्थ्य संगठन महामारी समझौता लागू हो चुका है?
नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 12 अक्टूबर 2026 की अद्यतन जानकारी के अनुसार, PABS परिशिष्ट पर वार्ता जारी थी। समझौते को हस्ताक्षर और अनुसमर्थन के लिए खोलने से पहले इस परिशिष्ट को अपनाना आवश्यक है।
3. PABS का क्या अर्थ है?
PABS का पूर्ण रूप Pathogen Access and Benefit-Sharing अर्थात ‘रोगजनकों तक पहुँच और लाभ-साझाकरण’ है। इसका उद्देश्य रोगजनक सामग्री और आनुवंशिक अनुक्रम संबंधी जानकारी को साझा करने की प्रक्रिया को उनसे विकसित चिकित्सा उत्पादों तक न्यायसंगत पहुँच से जोड़ना है।
4. क्या विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समझौते के अंतर्गत लॉकडाउन लागू कर सकता है?
नहीं। यह समझौता विश्व स्वास्थ्य संगठन को लॉकडाउन लागू करने, टीकाकरण अनिवार्य करने या घरेलू कानून थोपने का अधिकार नहीं देता।
5. यह समझौता भारत के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह भारत के औषधि विनिर्माण, प्रौद्योगिकी तक पहुँच, रोग निगरानी, चिकित्सा आपूर्ति की सुरक्षा और न्यायसंगत वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
|