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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 17 सितम्बर, 2022


शून्य अभियान

कृतज्ञ 3.0

ई-बाल निदान पोर्टल


शून्य अभियान

चर्चा में क्यों

हाल ही में, नीति आयोग ने ‘शून्य अभियान’ की पहली वर्षगांठ मानाने के लिये एक समारोह का आयोजन किया। यह भारत का ‘शून्य प्रदूषणई-गतिशीलता अभियान’ है।

प्रमुख बिंदु

  • यहराइड-हेलिंग और डिलीवरी के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV)केउपयोग को बढ़ावा देकरवायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक उपभोक्ता जागरूकता अभियान है।
  • इस अभियानमें130 उद्योग भागीदार हैं, जिनमें राइड-हेलिंग, डिलीवरी और ई.वी. उद्योग शामिल हैं। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।

शून्य अभियानके बारे में

उत्सर्जन में कमी

  • भारत में इस अभियान का शुभारंभ पारंपरिक वाहनों के स्थान पर विद्युत चालित वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिये किया गया है जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण किया जा सके।
  • पारंपरिक वाहनों की तुलना में विद्युत चालित वाहन 60% तक कम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं तथा इनकी परिचालन लागत भी 75% कम होती है।
  • अप्रैल 2022 तकशून्य अभियान के माध्यम से संयुक्त भागीदारों द्वारा पूरी की गई इलेक्ट्रिक डिलीवरी और राइड की अनुमानित संख्या लगभग क्रमशः 20 मिलियन व 15 मिलियन थी। यह 13,000 टन से अधिक के कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन से बचत करता है।

पर्यावरण संरक्षण एवं सार्वजानिक स्वास्थ्य

  • भारत में शहरी माल ढुलाई एवं गतिशीलता में वर्ष 2030 तक 8% वृद्धि का अनुमान है।
  • यह अभियान इस बढती मांग के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण एवं सार्वजानिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि विद्युत वाहन टेलपाइप पर आंतरिक दहन वाहनों की भांति कणिका तत्वों (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं करते हैं।
  • शून्य भारत में मौजूदा राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय ई.वी. नीतियों के साथ-साथ समन्वित प्रयासों को भी पूरक बनाता है।

लाभ

  • भारत में राइड-हेलिंग और डिलीवरी क्षेत्र के विद्युतीकरण से लगभग 54 मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन, 16,800 टन पी.एम. उत्सर्जन तथा 537,000 टन नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के प्रदूषण में कमी आएगी।
  • इससे एक वर्ष में लगभग 7 लाख करोड़ रूपए के व्यय की बचत हो सकती है। इस प्रकार, ‘शून्य’, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और2070 जलवायु लक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिये कॉप-26 (CoP-26) में घोषित भारत के पांच सूत्री एजेंडा (पंचामृत) का समर्थन करसकता है।

कृतज्ञ 3.0

चर्चा में क्यों 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ‘फसल सुधार के लिये त्वरित प्रजनन’ को प्रोत्साहन देने के लिये हैकथॉन 3.0 ‘कृतज्ञ’ का आयोजन कर रही है। 

प्रमुख बिंदु

  • कृतज्ञ का अर्थ है : कृ- कृषि, त-तकनीक और ज्ञ-ज्ञान। आई.सी.ए.आर. अपनी राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत फसल विज्ञान प्रभाग के सहयोग से इसे आयोजित कर रही है।
  • यह कार्यक्रम फसल सुधार के लिये नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अभिनव दृष्टिकोण एवं प्रौद्योगिकी समाधान प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा।

प्रतियोगिता के मानक 

  • इस प्रतियोगिता में देश भर के किसी भी विश्वविद्यालय या तकनीकी संस्थान के छात्र, संकाय और नवप्रवर्तनकर्ता या उद्यमी आवेदन कर सकते हैं और समूह के रूप में कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं ।
  • इसके अंतर्गत पुरस्कार स्वरुप अधिकतम 5 लाख रूपए प्रदान किये जाएंगे।

हैकथान 1.0 एवं 2.0  

  • राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना ने वर्ष 2020-21 में आई.सी.ए.आर. के कृषि इंजीनियरिंग प्रभाग के सहयोग से फार्म मशीनीकरण के प्रोत्साहन के लिये हैकथॉन 1.0 का आयोजन किया था। 
  • वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना ने आई.सी.ए.आर. के पशु विज्ञान प्रभाग के सहयोग से हैकथॉन 2.0 का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य पशु विज्ञान को प्रोत्साहित करना था।

राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना

  • राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विश्व बैंक के सहयोग से राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना की शुरुआत नवंबर 2017 में की थी। 
  • इसका समग्र उद्देश्य छात्रों को अधिक प्रासंगिक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिये कृषि विश्वविद्यालयों एवं राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद का समर्थन करना है। 

ई-बाल निदान पोर्टल

चर्चा में क्यों 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों (SCPCRs) को ई-बाल निदान पोर्टल तक पहुँच प्रदान करने का निर्णय लिया है। एन.सी.पी.सी.आर. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में कार्य करता है।

प्रमुख बिंदु

  • यह निर्णय राष्ट्रीय एवं राज्य बाल आयोगों के समन्वित कामकाज़ और बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CPCR) अधिनियम, 2005 की धारा 13(2) के लिये सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
  • इसके माध्यम से राज्य आयोग, पोर्टल पर दर्ज़ शिकायतों को देख सकते हैं और आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।
  • शिकायतों के समाधान के लिये राज्य आयोग को शिकायत स्थानांतरित करने तथा संयुक्त जांच का भी विकल्प उपलब्ध होगा।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)

स्थापना 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल अधिकारों और देश में अन्य संबंधित मामलों में बचाव के लिये बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना वर्ष 2007 में की गई थी। 

कार्य 

  • किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 और बाल यौन शोषण संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम, 2012 के उचित तथा प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करना
  • सी.पी.सी.आर. अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत निर्धारित किसी कानून द्वारा या उसके तहत प्रदान किये गए सुरक्षा उपायों की जांच और समीक्षा करना 

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