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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़ : 24 नवंबर, 2022


तराई हाथी रिज़र्व

सैटेलाइट फोन

मानगढ़ धाम


तराई हाथी रिज़र्व

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, केंद्र ने उत्तर प्रदेश के दुधवा-पीलीभीत में ‘तराई हाथी रिज़र्व’ (Terai Elephant Reserve: TER) की स्थापना को मंजूरी दी। 

प्रमुख बिंदु 

  • यह भारत का 33वाँ हाथी रिज़र्व होगा जो 3,049 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है। टी.ई.आर. को दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के संयुक्त वन क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। 
  • इसमें संरक्षित क्षेत्र, वन क्षेत्र और जंगली हाथियों के संरक्षण के लिये गलियारे शामिल हैं। 
  • इसमें चार जंगली प्रजातियों- बाघ, एशियाई हाथी, स्वैंप डियर और एक सींग वाले गैंडे का भी संरक्षण किया जाएगा जिसमें किशनपुर और कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य भी शामिल हैं। 
  • उल्लेखनीय है कि किशनपुर और कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य क्रमश: लखीमपुर खीरी एवं बहराइच में है। इन दोनों अभयारण्य को वर्ष 1987 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के दायरे में लाया गया। 

महत्त्व एवं संरक्षण 

  • इसकी स्थापना से मानव-हाथी संघर्ष शमन रणनीतियों को लागू करके भारत-नेपाल सीमाई क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा में सहायता मिलेगी। इससे सीमा-पार प्रवासी हाथियों की आबादी के संरक्षण में मदद मिलेगी। 
  • यह घास के मैदान और गलियारे के रखरखाव के प्रबंधन के मामले में दोनों टाइगर रिज़र्व के लिये भी लाभदायक होगा। 
  • यह विगत तीन महीनों में ‘प्रोजेक्ट एलीफैंट’ के तहत मंजूरी प्राप्त करने वाला तीसरा हाथी रिज़र्व है। अन्य दो रिज़र्व छत्तीसगढ़ में लेमरू और तमिलनाडु में अगस्त्यमलाई हैं। 
  • हाथी को भारत के ‘राष्ट्रीय विरासत पशु’ के रूप में मान्यता दी गई है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इसे संरक्षण प्राप्त है। भारत में 30,000 जंगली और लगभग 3,600 बंदी/पालतू एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी है। 
  • सभी 33 हाथी रिज़र्व लगभग 80,000 वर्ग किमी क्षेत्रफल को कवर करते हैं। तमिलनाडु और असम दोनों राज्यों में सर्वाधिक पाँच-पाँच हाथी रिज़र्व हैं तथा इसके बाद केरल (4) व ओडिशा (3) का स्थान आता है। 

प्रोजेक्ट एलीफैंट

  • केंद्र प्रायोजित ‘प्रोजेक्ट एलीफैंट’ योजना को वर्ष 1992 में प्रारंभ किया गया था। यह देश में हाथी संरक्षण का समर्थन करती है। 
  • इसके तहत प्रमुख हाथी आबादी वाले राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है। 
  • इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं- 
    • मानव-हाथी संघर्ष जैसे मुद्दों को संबोधित करना
    • पालतू/बंदी हाथियों (जैसे चिड़ियाघर, अभयारण्य, सर्कस या शिविर में रखे गए) का कल्याण 
    • हाथी, उनके आवास और गलियारों की रक्षा 
    • हाथियों को उनके दांतों से होने वाले नुकसान को कम करना। 

सैटेलाइट फोन

चर्चा में क्यों 

भारत में सऊदी अरब के एक व्यक्ति को अनधिकृत सैटेलाइट फोन रखने के कारण भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम तथा भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। 

प्रमुख बिंदु 

  • भारत में बिना अनुमति के इसे अपने पास रखना गैर-कानूनी है। नवंबर 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद इसको रखने और उपयोग करने संबंधी प्रतिबंध कड़े कर दिये गए थे।   
  • भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 के अनुसार वायरलेस ट्रांसमीटर के अलावा किसी भी वायरलेस टेलीग्राफी उपकरण को रखना अवैध है। अधिनियम की धारा 3 के अनुसार किसी भी व्यक्ति के पास बिना लाइसेंस के वायरलेस टेलीग्राफी उपकरण नहीं होगा। 
  • धारा 4 केंद्र सरकार को अधिनियम के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के किसी वर्ग को छूट देने संबंधी नियम बनाने की अनुमति देती है। 

सैटेलाइट फोन के बारे में 

  • सैटेलाइट संपर्क नियमित सेल फोन को संपर्क प्रदान करने वाले सेल फोन टावरों के बजाए उपग्रहों पर निर्भर होते हैं। 
  • ये उन दूरदराज वाले क्षेत्रों में भी बिना रुकावट कार्य करते हैं, जहाँ सेलुलर संपर्क का अभाव होता हैं। इस प्रकार सैटेलाइट (या सैट) फ़ोन मजबूत संपर्क के साथ पृथ्वी के अधिकांश भाग को कवर करते हैं।
  • कुछ प्रमुख सैटेलाइट कनेक्टिविटी सेवा प्रदाता हैं- इरिडियम, इनमारसैट, थुराया और ग्लोबलस्टार। ध्यातव्य है कि प्रत्येक सैटेलाइट फोन केवल एक विशिष्ट सेवा प्रदाता के साथ ही काम करता है अर्थात् थुराया फोन इरिडियम नेटवर्क पर काम नहीं करेगा। 

मानगढ़ धाम

चर्चा में क्यों  

हाल ही में, 'मानगढ़ धाम की गौरव गाथा' नामक एक सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया और आदिवासी नेता गोविंद गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। 

प्रमुख बिंदु 

  • मानगढ़ पहाड़ी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है। मानगढ़ पहाड़ी भील समुदाय और राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश की अन्य जनजातियों के लिये विशेष महत्व रखती है।
  • यहाँ 17 नवंबर, 1913 को श्री गोविंद गुरु के नेतृत्व में भील जनजाति के लोगों पर अंग्रेजों ने गोलियाँ चलाईं, जिसमें लगभग 1500 आदिवासी शहीद हुए। 
  • गोविंद गुरु ने जनजातीय समुदाय के अधिकारों के लिये अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के साथ ही अपने समुदाय की बुराइयों के खिलाफ भी अभियान चलाया था। इसलिये उन्हें समाज सुधारक, आध्यात्मिक गुरु, संत और एक लोक नेता की संज्ञा दी जाती है। 
  • मानगढ़ पहाड़ी को ‘आदिवासी जलियाँवाला बाग’ के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण द्वारा इसे ‘राष्ट्रीय महत्त्व का स्मारक’ घोषित करने की सिफारिश की जा चुकी है।

अन्य प्रमुख आदिवासी संग्राम

संघर्ष का नाम

संबंधित प्रमुख बिंदु

संथाल संग्राम

तिलका मांझी के नेतृत्व में 1780 के दशक में

लरका आंदोलन

1830-32 में बुधु भगत के नेतृत्व में 

सिद्धू-कान्हू क्रांति या हूल क्रांति 

1855 में सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में 


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