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2019 UO14 ट्रोजन क्षुद्रग्रह

प्रारंभिक परीक्षा 

(अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)

मुख्य परीक्षा

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष)

संदर्भ 

हाल ही में वैज्ञानिकों ने शनि ग्रह से संबंधित एक ट्रोजन क्षुद्रग्रह की पहचान की है, जिसका नाम ‘2019 UO14’ रखा गया है। बहुत लंबे समय तक शनि हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा विशाल ग्रह था जिस पर कोई ट्रोजन क्षुद्रग्रह नहीं था।

खोज के बारे में 

  • खोज के निष्कर्षों को सितंबर 2024 में arXiv रिपॉजिटरी में अपलोड किए गए प्रीप्रिंट पेपर में साझा किया गया था। ‘2019 UO14’ क्षुद्रग्रह को पहली बार वर्ष 2019 में देखा गया था।
  • ऐसा माना जाता है कि यह लगभग 2,000 वर्षों से शनि की L4 स्थिति में फंसा हुआ है और उम्मीद है कि यह अगले हज़ार वर्षों तक इस स्थिर कक्षा में रहेगा।

क्या हैं ट्रोजन क्षुद्रग्रह

  • ट्रोजन क्षुद्रग्रह ऐसे क्षुद्रग्रहों का एक अनूठा वर्ग है जो सूर्य के चारों ओर किसी ग्रह की कक्षा में एक लैग्रेंज बिंदु के रूप में स्थिर स्थान पर स्थित होते हैं। ये क्षुद्रग्रह प्राय: L4 या L5 लैग्रेंज बिंदुओं के आसपास पाए जाते हैं।
  • सूर्य के चारों ओर ट्रोजन क्षुद्रग्रह की कक्षा उस ग्रह की कक्षा के समान होती है जिससे वे संबंधित होते हैं।

लैग्रेंजियन बिंदु (Lagrange Points)

  • लैग्रेंजियन बिंदु अंतरिक्ष में ऐसा स्थान है जहाँ दो बड़े पिंड प्रणालियों (जैसे- पृथ्वी एवं सूर्य या पृथ्वी एवं चंद्रमा) का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल, तीसरे बहुत छोटे पिंड (जैसे- उपग्रह) द्वारा महसूस किए जाने वाले केंद्रापसारक बल के बराबर होता है। 
    • यह अंतरिक्ष में एक ऐसी स्थिति है जहाँ वस्तुएँ ‘स्थिर’ रह सकती हैं।
  • दोनों पिंड प्रणालियों के गुरुत्वाकर्षण बल के आकर्षण एवं प्रतिकर्षण तथा परस्पर क्रिया से एक संतुलन बिंदु का निर्माण होता है। यहाँ किसी अंतरिक्ष यान को अवलोकन के लिए 'पार्क' किया जा सकता है और आवश्यक ईंधन की खपत को कम किया जा सकता है।
  • इन्हें लाइब्रेशन पॉइंट भी कहते हैं। किसी ग्रह या तारे जैसे प्रमुख पिंडों के आसपास पाँच लैग्रेंजियन बिंदु होते हैं- L1, L2 एवं L3 अस्थिर बिंदु हैं जबकि L4 व L5 स्थिर बिंदु हैं। इन बिंदुओं का नाम इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफी-लुई लैग्रेंज के सम्मान में रखा गया है।
  • खोज : पहला ट्रोजन क्षुद्रग्रह वर्ष 1906 में जर्मन खगोल फोटोग्राफर मैक्स वुल्फ द्वारा पहचाना गया था।
  • नामकरण परंपरा : ‘ट्रोजन’ नाम ऑस्ट्रियाई खगोलशास्त्री जोहान पालिसा के सुझाव से निकला है कि इन क्षुद्रग्रहों का नाम ग्रीक महाकाव्य ‘इलियड’ के पात्रों के नाम पर रखा जाए, विशेष रूप से ट्रोजन युद्ध में शामिल लोगों के नाम पर (जैसे- अकिलीज़, पेट्रोक्लस एवं हेक्टर)।
    • आमतौर पर बृहस्पति ग्रह से जुड़े ट्रोजन क्षुद्रग्रहों के लिए ट्रोजन युद्ध के नायकों के विशिष्ट नाम आरक्षित हैं।

वैज्ञानिक महत्व

  • इनकी स्थिर कक्षाओं के कारण ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का अध्ययन सौर मंडल के इतिहास एवं विकास में बहुमूल्य जानकारी प्रदान कर सकता है जिसमें ग्रह निर्माण एवं प्रवास प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
  • इनकी उपस्थिति एवं गतिशीलता सौर मंडल के भीतर गुरुत्वाकर्षण संबंधी अंतःक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रकट कर सकती है।
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