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भारत में एडिटिव विनिर्माण तकनीक

संदर्भ 

  • पिछले एक दशक में भारत केवल प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि उसे विकसित करने वाला देश बनकर उभरा है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सफलता के बाद अब यही क्षमता भौतिक दुनिया में भी दिखाई दे रही है—विशेषकर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (AM) के क्षेत्र में। यह तकनीक डिजिटल डिजाइनों को सीधे वास्तविक वस्तुओं में बदलने की क्षमता रखती है। 
  • एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भारत के उभरते इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्रों में से एक है। वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग मशीन बाजार के 2035 तक 149 अरब डॉलर और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग-इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला के 112 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारत के लिए पॉलिमर, धातु, कंपोजिट, सिरेमिक और सेमीकंडक्टर-ग्रेड सामग्री में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने का बड़ा अवसर है।

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक के बारे में 

  • एएम केवल एक अन्य विनिर्माण उपकरण नहीं है बल्कि यह डिजिटल इंजीनियरिंग का एक रूप है, जिसमें एक डिजिटल फाइल लाई जाती है, जो किसी वस्तु के निर्माण के लिए परत-दर-परत सामग्री के जमाव और कभी-कभी सामग्री की संरचना को पूरी तरह नियंत्रित करती है। इसमें कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजाइन सॉफ्टवेयर और सामग्री विज्ञान का अभिसरण होता है। 
  • प्रत्येक एएम वस्तु की शुरुआत एक डिजिटल फाइल से होती है, इसलिए यह तकनीक कंप्यूटर-एडेड डिजाइन (सीएडी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पैटर्न पहचान जैसे उपकरणों से निकटता से जुड़ी हुई है।

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक की प्रणाली: 

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में वस्तु को काटने के बजाय सामग्री की परतें जोड़कर बनाया जाता है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • वर्चुअल डिजाइन: प्रक्रिया सीएडी फाइल से शुरू होती है, जिसे कंप्यूटर, थ्री-डी स्कैनर या एआई की मदद से तैयार किया जा सकता है।
  • एसटीएल फाइल: थ्री-डी मॉडल को एसटीएल फॉर्मेट में बदला जाता है, जो मशीन को वस्तु की संरचना की जानकारी देता है।
  • स्लाइसिंग: सॉफ्टवेयर मॉडल को सैकड़ों या हजारों पतली परतों में विभाजित करके प्रिंटिंग के निर्देश तैयार करता है।
  • प्रिंटिंग: एएम मशीन इन निर्देशों के अनुसार सामग्री की परतों को एक-एक करके जोड़कर वस्तु बनाती है।
  • अंतिम वस्तु: प्रिंटिंग के बाद आवश्यक पोस्ट-प्रोसेसिंग की जाती है, जिससे वस्तु उपयोग के लिए तैयार हो जाती है। 

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सामग्री: 

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का उपयोग होता है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • थर्मोप्लास्टिक्स: ये एएम में सबसे अधिक उपयोग होने वाली सामग्री हैं। एबीएस, पीसी और पीएलए अलग-अलग अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं। पानी में घुलनशील पीवीए का उपयोग अस्थायी सहायक संरचनाओं के लिए किया जाता है।
  • धातुएं: एएम में सोना, चांदी, स्टेनलेस स्टील और टाइटेनियम जैसी विभिन्न धातुओं और मिश्रधातुओं का उपयोग किया जाता है।
  • सिरेमिक: जिरकोनिया, एल्युमिना और ट्राइकैल्शियम फॉस्फेट जैसे सिरेमिक का उपयोग विभिन्न अनुप्रयोगों में होता है। नई तकनीकों से कांच के उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं।
  • जैव-सामग्री: सिलिकॉन, कैल्शियम फॉस्फेट और जिंक जैसी सामग्रियों का उपयोग हड्डियों की संरचना को सहारा देने में किया जाता है। इसके साथ ही, जैव-स्याही और जीवित कोशिकाओं की मदद से रक्त वाहिकाओं, ऊतकों और मानव अंगों की थ्री-डी प्रिंटिंग पर भी शोध चल रहा है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को नया आकार 

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) अब केवल प्रयोगशालाओं और प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं है। भारत के अंतरिक्ष, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

अंतरिक्ष और एयरोस्पेस: 

  • भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम हल्के और उन्नत हार्डवेयर के निर्माण के लिए एएम अपना रहा है। मई 2024 में आईआईटी मद्रास के स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस ने अग्निबाण-एसओआरटीईडी लॉन्च किया, जिसमें एकल-टुकड़ा एएम मुद्रित सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन था। यह एएम की जटिल इंजन डिजाइन और स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक के विकास में क्षमता को दर्शाता है।

  • भारत के उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी)-2026 का दूसरा संस्करण 27–29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसका विषय “रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को गति, प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना” है।
  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों और उनके नए अनुप्रयोगों को बढ़ावा देगा। 12 विषयगत क्षेत्रों में होने वाले इस कार्यक्रम में पूर्ण सत्र, तकनीकी चर्चाएं और प्रदर्शनियां शामिल होंगी। सम्मेलन का उद्देश्य रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को समर्थन देना है। 

रक्षा: 

  • भारतीय सशस्त्र बल तेज और टिकाऊ निर्माण के लिए एएम का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय सेना ने अहमदाबाद में एएम से निर्मित दो मंजिला आवासीय इकाई तैयार की, जिसे लगभग 12 सप्ताह में बनाया गया। अब इस तकनीक का उपयोग लद्दाख जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा संरचनाओं के लिए भी किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवा: 

  • एएम के माध्यम से भारत स्वदेशी चिकित्सा उपकरण और प्रत्यारोपण विकसित कर रहा है। ओस्टियोफोर्ज जैसे स्टार्ट-अप प्राकृतिक रेशम आधारित प्रत्यारोपण पर काम कर रहे हैं। एएम से मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार व्यक्तिगत प्रत्यारोपण तैयार किए जा सकते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू चिकित्सा विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। 

इलेक्ट्रॉनिक्स: 

  • भारत में एएम केंद्र इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित कर रहे हैं। एएम के माध्यम से बैटरी, एंटीना, वैरिस्टर और कैपेसिटर जैसे घटकों का निर्माण प्रदर्शित किया गया है। भारतीय विज्ञान संस्थान ने एएम प्रिंटिंग से फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट के ब्लॉक्स भी विकसित किए हैं।

निर्माण:  

  • थ्री-डी प्रिंटिंग तेज, कम लागत और टिकाऊ निर्माण का विकल्प बन रही है। कम-कार्बन जियोपॉलीमर सामग्री से कम समय में घर बनाने की क्षमता प्रदर्शित की गई है। इस तकनीक से सामग्री और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा कार्बन उत्सर्जन कम करने की संभावना है। 

सरकारी नीतिगत पहल

  • भारत सरकार एएम को अगली पीढ़ी की रणनीतिक विनिर्माण तकनीक के रूप में बढ़ावा दे रही है। नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एनएसएएम) के माध्यम से देश में एक मजबूत एएम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति: 

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फरवरी 2022 में एनएसएएम जारी की। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक एएम बाजार में मजबूत स्थान दिलाना और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को बढ़ावा देना है।

रणनीति के प्रमुख लक्ष्य हैं:

  • वैश्विक एएम बाजार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना।
  • भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर जोड़ना।
  • 50 भारत-विशिष्ट एएम प्रौद्योगिकियां विकसित करना।
  • 100 एएम स्टार्ट-अप और 500 नए उत्पादों को बढ़ावा देना।
  • 1 लाख कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित करना। 
  • 10 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में एएम क्षमता विकसित करना।

इसके लिए सरकार ने सात विशेषीकृत विकास एवं परिनियोजन केंद्र स्थापित किए हैं, जो अनुसंधान, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुंच में सहायता करते हैं।

एनएसएएम के अंतर्गत प्रगति 

  • एनएसएएम के तहत अब तक 1,54,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है और 56 एएम स्टार्ट-अप को सहायता मिली है। राष्ट्रीय केंद्रों के नेटवर्क ने 65 भारत-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के विकास में मदद की है। इनका उपयोग एयरोस्पेस, चिकित्सा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और फोटोनिक्स जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। 

एनएसएएम 2.0  

  • एनएसएएम 2.0 का उद्देश्य भारत में एएम के विकास और व्यावसायीकरण को और तेज करना है। इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल एकीकरण, वैश्विक स्तर की तकनीकों, सस्ती मशीनों और सामग्रियों तथा एएम-इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। 
  • इसके साथ ही स्टार्ट-अप, रक्षा क्षेत्र, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं तकनीकी साझेदारियों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे भारत की तकनीकी क्षमता मजबूत होने और विभिन्न आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में एएम के व्यापक उपयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

विकसित भारत की ओर

  • एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) अब अनुसंधान प्रयोगशालाओं से निकलकर कारखानों, रक्षा प्रतिष्ठानों और अस्पतालों तक पहुंच रही है। सरकारी नीतियों के समर्थन से यह स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बढ़ावा देने में मदद कर रही है।  
  • एएम के विस्तार से कुशल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और भारत की तकनीकी क्षमता मजबूत हो रही है। यह डिजिटल उत्पादन, स्वचालन तथा लचीले विनिर्माण के माध्यम से उद्योग 5.0 को भी समर्थन देती है। संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्थानीय उत्पादन और टिकाऊ समाधानों के जरिए एएम सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में भी योगदान दे सकती है। 
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