New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 21st Sept. 2026, 11:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 21st Sept. 2026, 11:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

जमीनी बदलाव के वाहक: ग्रामीण भारत में सामुदायिक कैडरों की भूमिका

संदर्भ 

  • ग्रामीण विकास केवल योजनाओं और संसाधनों तक सीमित नहीं है। किसी भी योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति और अंतिम गांव तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है। इसी उद्देश्य को पूरा करने में देशभर में कार्यरत अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और सामुदायिक कैडरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये स्थानीय कार्यकर्ता ग्रामीण समुदायों और सरकारी संस्थाओं के बीच सेतु का काम करते हुए जागरूकता, क्षमता निर्माण, सेवा वितरण और योजनाओं तक पहुंच को मजबूत करते हैं।  
  • स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता और 10.58 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यमिता, बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।  

गांव-गांव तक पहुंच का सामुदायिक मॉडल 

  • सामुदायिक कैडर मॉडल विकेंद्रीकृत सेवा वितरण की ऐसी व्यवस्था है, जिसमें स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाओं से जोड़ा जाता है। ये कैडर प्रशिक्षक, सेवा प्रदाता, व्यवहार परिवर्तन एजेंट और योजना सुविधाकर्ता के रूप में कई भूमिकाएं निभाते हैं। 
  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं। इन संस्थाओं के साथ कृषि सखी, पशु सखी, मत्स्य सखी, वन सखी और उद्यम संवर्धन के लिए सीआरपी जैसे कैडर ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक ज्ञान और सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

खेती से उद्यमिता तक बढ़ते अवसर 

  • कृषि आजीविका से जुड़े सीआरपी किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, पशुधन प्रबंधन, उत्पादकता और बाजार से जुड़ने में सहायता करते हैं। जून 2025 तक 4.62 करोड़ से अधिक महिला किसानों को कृषि आजीविका से जुड़े हस्तक्षेपों के दायरे में लाया गया था, जिन्हें 3 लाख से अधिक प्रशिक्षित आजीविका सीआरपी का सहयोग मिला।
  • कृषि सखियां किसानों के साथ मिलकर टिकाऊ कृषि और कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देती हैं। 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 1.91 लाख से अधिक कृषि सखियां संगठित की गई हैं। इसी तरह लगभग 1.70 लाख पशु सखियां पशुधन पालकों को पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता से जुड़ी सेवाओं में सहायता दे रही हैं, जबकि 2,012 से अधिक मत्स्य सखियां मत्स्य-आधारित आजीविका और बाजार पहुंच को मजबूत करने में सहयोग कर रही हैं। 
  • गैर-कृषि क्षेत्र में भी सामुदायिक कैडर उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं। सीआरपी-ईपी और उद्योग सखियां व्यवसाय के अवसरों की पहचान, उद्यम योजना, ऋण और बाजार संपर्क में सहायता करती हैं। जून 2026 तक एसवीईपी के तहत 4.32 लाख उद्यमों को सहायता प्रदान की जा चुकी थी। उद्यमिता के राष्ट्रीय अभियान के तहत 50,000 सीआरपी को उद्यम संवर्धन में प्रशिक्षित करने और 50 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को उद्यम विकास का प्रशिक्षण देने की योजना है।

वित्तीय सेवाएं गांव की चौखट तक 

  • बैंक सखी और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी ग्रामीण वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 1.48 लाख से अधिक बीसी सखियां गांवों में खाता खोलने, जमा-निकासी, धन हस्तांतरण और बैलेंस जांच जैसी डिजिटल एवं डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। 50,548 से अधिक बैंक सखियां स्वयं सहायता समूहों के लिए ऋण संपर्क को सुगम बना रही हैं। 
  • 2013-14 से बैंक सखियों की सहायता से स्वयं सहायता समूहों को ₹13.41 लाख करोड़ का बैंक ऋण प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, 56,727 वित्तीय साक्षरता सीआरपी गांवों में वित्तीय जागरूकता बढ़ा रहे हैं। 2025-26 में 3.81 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया। 

स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता में मजबूत उपस्थिति 

  • स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ता महत्वपूर्ण कड़ी हैं। 31 दिसंबर 2025 तक 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच संपर्क बिंदु के रूप में कार्य कर रही थीं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, पूरक पोषण और स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देती हैं। मार्च 2026 तक 10.58 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका था। 
  • स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छाग्रही व्यवहार परिवर्तन और स्वच्छता गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। एसबीएम (ग्रामीण) के क्षमता निर्माण डैशबोर्ड के अनुसार 10.36 लाख से अधिक पदाधिकारियों और 36,342 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • बस्तर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा संचालित ‘स्वच्छता दीदी’ मॉडल इसका एक उदाहरण है। 114 गांवों और 71 ग्राम पंचायतों में स्थापित ठोस-तरल संसाधन प्रबंधन केंद्रों ने कचरा संग्रह, पृथक्करण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को व्यवस्थित किया। इससे स्वच्छता के साथ स्थानीय आजीविका के अवसर भी विकसित हुए।  

जल और आवास में समुदाय की भागीदारी 

  • जल जीवन मिशन के तहत ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां गांवों में जल आपूर्ति प्रणालियों की योजना, संचालन और रखरखाव में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करती हैं। देशभर में 5.33 लाख से अधिक ऐसी समितियां कार्यरत हैं। ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को प्लंबिंग, विद्युत कार्य और पंप संचालन जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • इसी प्रकार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में आवास मित्र लाभार्थियों को दस्तावेजीकरण, निर्माण की निगरानी और योजना से जुड़े विभिन्न चरणों में सहायता प्रदान करते हैं। पश्चिम त्रिपुरा की सुमति देबबर्मा की कहानी बताती है कि स्थानीय स्तर पर निरंतर मार्गदर्शन से परिवार को पक्का घर पूरा करने में कैसे सहायता मिल सकती है।  

अभिसरण से समग्र ग्रामीण विकास 

  • सामुदायिक कैडरों की भूमिका अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आजीविका, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, जल, आवास और वित्तीय समावेशन को एक-दूसरे से जोड़कर परिवार-केंद्रित सेवा वितरण पर जोर बढ़ रहा है। इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम, मैदानी मार्गदर्शन और ऑन-साइट सहयोग को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। 
  • अंततः, ग्रामीण विकास की योजनाओं को वास्तविक सेवाओं और अवसरों में बदलने में सामुदायिक कैडर महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी स्थानीय उपस्थिति सरकारी संस्थाओं और ग्रामीण परिवारों के बीच भरोसे और संपर्क को मजबूत करती है। आने वाले समय में ऐसे समुदाय-आधारित संस्थानों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं में निरंतर क्षमता निर्माण और निवेश ग्रामीण भारत में समावेशी, सहभागी और टिकाऊ विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR