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विवरण |
जानकारी |
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नीति का नाम |
बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 |
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राज्य |
बिहार |
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मंत्रिमंडल की स्वीकृति |
15 सितंबर, 2026 |
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राजपत्र अधिसूचना |
17 सितंबर, 2026 |
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अधिसूचना संख्या |
803 |
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संबंधित विभाग |
जल संसाधन विभाग, बिहार |
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भारत में पहली नीति के रूप में घोषणा |
राज्य स्तर पर व्यापक गाद प्रबंधन नीति |
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संबंधित पहल |
नदी संजीवनी (Nadi Sanjeevani) |
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सहयोगी एजेंसी |
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) |
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प्रमुख उद्देश्य |
गाद निकासी, जल निकायों का पुनर्स्थापन, बाढ़ जोखिम प्रबंधन और अवसादों का उत्पादक पुनः उपयोग |
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प्राथमिकता वाले क्षेत्र |
नदियाँ, बैराज, जलाशय, नहरें और अन्य जल निकाय |
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प्रमुख उपयोग |
राजमार्ग निर्माण, तटबंधों में मिट्टी भराई और अन्य अवसंरचना कार्य |
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नदी |
उद्गम / प्रमुख भौगोलिक जानकारी |
महत्त्व |
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गंगा |
बक्सर के निकट बिहार में प्रवेश करती है |
राज्य की प्रमुख जल निकासी प्रणाली |
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कोसी |
नेपाल और तिब्बत का हिमालयी बेसिन |
ऐतिहासिक रूप से नदी मार्ग में परिवर्तन और भीषण बाढ़ के लिए प्रसिद्ध |
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गंडक |
नेपाल हिमालय |
महत्त्वपूर्ण सीमापार नदी और गंगा की सहायक नदी |
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बागमती |
शिवपुरी पहाड़ियाँ, नेपाल |
उत्तरी बिहार की प्रमुख बाढ़ प्रभावित नदी |
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कमला-बलान |
नेपाल हिमालय |
मिथिला क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ से संबंधित |
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महानंदा |
दार्जिलिंग पहाड़ियाँ, पश्चिम बंगाल |
पूर्वोत्तर बिहार की महत्त्वपूर्ण नदी |
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सोन |
अमरकंटक क्षेत्र, मध्य प्रदेश |
गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी |
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शब्द |
अर्थ |
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गाद जमाव (Siltation) |
किसी जल निकाय में सूक्ष्म अवसादों का जमा होना |
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गाद निकासी (Desilting) |
जल निकाय की कार्यात्मक क्षमता बहाल करने के लिए जमा अवसादों को हटाना |
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ड्रेजिंग (Dredging) |
यांत्रिक या हाइड्रोलिक विधियों द्वारा जल के भीतर जमा सामग्री की खुदाई और निकासी |
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अवसाद प्रबंधन (Sediment Management) |
अवसादों के परिवहन, जमाव, निष्कासन और पुनः उपयोग की व्यापक योजना एवं प्रबंधन |
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क्षेत्र |
संभावित महत्त्व |
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बाढ़ प्रबंधन |
चिन्हित स्थानों पर जल निकासी की बाधाओं को कम करने और जल-वहन क्षमता में सुधार करने में सहायक |
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जल सुरक्षा |
प्रभावित जल निकायों की जल भंडारण और जल प्रबंधन संबंधी कार्यक्षमता को बहाल करना |
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कृषि |
निर्माण कार्यों के लिए उपजाऊ ऊपरी मिट्टी की खुदाई को कम करने में सहायता |
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अवसंरचना |
मिट्टी भराई के लिए उपयुक्त सामग्री का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराना |
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अर्थव्यवस्था |
संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और लागत-कुशल निर्माण के अवसर उत्पन्न करना |
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पर्यावरण |
पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों के साथ नियोजित अवसाद प्रबंधन को प्रोत्साहन |
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सुशासन |
राज्य की विभिन्न एजेंसियों और NHAI के बीच समन्वय को बढ़ावा देना |
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न. बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न. भारत में बाढ़ के जोखिम को कम करने तथा सतत अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक अवसाद प्रबंधन के महत्त्व की चर्चा कीजिए। |
1. व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य कौन-सा है?3 नवंबर, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, बिहार व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य है। 2. बिहार गाद प्रबंधन नीति, 2026 का प्रमुख उद्देश्य क्या है?इसका प्रमुख उद्देश्य नदियों और जल निकायों की कार्यात्मक क्षमता को बहाल करना, अवसाद प्रबंधन में सुधार करना तथा निकाली गई सामग्री के उत्पादक पुनः उपयोग को बढ़ावा देना है। 3. नदी संजीवनी पहल क्या है?यह एक ऐसी पहल है, जिसके अंतर्गत नदियों से गाद निकासी और जल निकायों के पुनर्स्थापन को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में उपयुक्त अवसादी सामग्री के पुनः उपयोग से जोड़ा गया है। 4. गाद निकासी पहल के लिए बिहार सरकार ने किस एजेंसी के साथ साझेदारी की है?बिहार सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India–NHAI) के साथ साझेदारी की है। 5. गाद प्रबंधन बाढ़ के जोखिम को कैसे कम कर सकता है?चिन्हित स्थानों पर वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने से स्थानीय जल निकासी और नदियों की जल-वहन क्षमता में सुधार हो सकता है। |