बिहार व्यापक गाद प्रबंधन नीति, 2026 लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना

चर्चा में क्यों?

  • 3 नवंबर, 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
  • बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 (Bihar Water Source Restoration and Silt Management Policy, 2026) का उद्देश्य नदियों और जलाशयों की जल-वहन क्षमता को बहाल करना, बाढ़ के जोखिम को कम करना तथा जमा हुई गाद के उत्पादक उपयोग को बढ़ावा देना है।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

विवरण

जानकारी

नीति का नाम

बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026

राज्य

बिहार

मंत्रिमंडल की स्वीकृति

15 सितंबर, 2026

राजपत्र अधिसूचना

17 सितंबर, 2026

अधिसूचना संख्या

803

संबंधित विभाग

जल संसाधन विभाग, बिहार

भारत में पहली नीति के रूप में घोषणा

राज्य स्तर पर व्यापक गाद प्रबंधन नीति

संबंधित पहल

नदी संजीवनी (Nadi Sanjeevani)

सहयोगी एजेंसी

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)

प्रमुख उद्देश्य

गाद निकासी, जल निकायों का पुनर्स्थापन, बाढ़ जोखिम प्रबंधन और अवसादों का उत्पादक पुनः उपयोग

प्राथमिकता वाले क्षेत्र

नदियाँ, बैराज, जलाशय, नहरें और अन्य जल निकाय

प्रमुख उपयोग

राजमार्ग निर्माण, तटबंधों में मिट्टी भराई और अन्य अवसंरचना कार्य

बिहार को गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकता क्यों है?

  • बिहार, गंगा नदी बेसिन में स्थित होने तथा नेपाल से निकलने वाली अनेक हिमालयी नदियों से जुड़े होने के कारण बार-बार आने वाली बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
  • ये नदियाँ, विशेष रूप से मानसून के दौरान, बड़ी मात्रा में अवसाद (Sediments) अपने साथ लाती हैं, जो नदी चैनलों, जलाशयों और अन्य जल निकायों में जमा हो जाते हैं।
  • संवेदनशील स्थानों पर अत्यधिक गाद जमाव से जल भंडारण क्षमता घट सकती है, जल निकासी बाधित हो सकती है तथा बाढ़ सुरक्षा अवसंरचना पर दबाव बढ़ सकता है।
  • यह समस्या कृषि भूमि, सिंचाई प्रणालियों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आजीविका को भी प्रभावित करती है।

बिहार की प्रमुख बाढ़ प्रभावित नदियाँ

नदी

उद्गम / प्रमुख भौगोलिक जानकारी

महत्त्व

गंगा

बक्सर के निकट बिहार में प्रवेश करती है

राज्य की प्रमुख जल निकासी प्रणाली

कोसी

नेपाल और तिब्बत का हिमालयी बेसिन

ऐतिहासिक रूप से नदी मार्ग में परिवर्तन और भीषण बाढ़ के लिए प्रसिद्ध

गंडक

नेपाल हिमालय

महत्त्वपूर्ण सीमापार नदी और गंगा की सहायक नदी

बागमती

शिवपुरी पहाड़ियाँ, नेपाल

उत्तरी बिहार की प्रमुख बाढ़ प्रभावित नदी

कमला-बलान

नेपाल हिमालय

मिथिला क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ से संबंधित

महानंदा

दार्जिलिंग पहाड़ियाँ, पश्चिम बंगाल

पूर्वोत्तर बिहार की महत्त्वपूर्ण नदी

सोन

अमरकंटक क्षेत्र, मध्य प्रदेश

गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी

गाद प्रबंधन क्या है?

  • गाद प्रबंधन से तात्पर्य नदियों, जलाशयों, नहरों और अन्य जल निकायों में जमा अवसादों का वैज्ञानिक आकलन, निगरानी, निष्कासन, परिवहन तथा लाभकारी उपयोग करने की प्रक्रिया से है।
  • गाद (Silt) सूक्ष्म कणों वाला अवसाद है, जिसे बहता हुआ जल अपने साथ ले जाता है। जब जल के प्रवाह की गति कम होती है, तो जल में निलंबित कण नीचे बैठने लगते हैं और गाद के रूप में जमा हो जाते हैं।

गाद जमाव, गाद निकासी और ड्रेजिंग में अंतर

शब्द

अर्थ

गाद जमाव (Siltation)

किसी जल निकाय में सूक्ष्म अवसादों का जमा होना

गाद निकासी (Desilting)

जल निकाय की कार्यात्मक क्षमता बहाल करने के लिए जमा अवसादों को हटाना

ड्रेजिंग (Dredging)

यांत्रिक या हाइड्रोलिक विधियों द्वारा जल के भीतर जमा सामग्री की खुदाई और निकासी

अवसाद प्रबंधन (Sediment Management)

अवसादों के परिवहन, जमाव, निष्कासन और पुनः उपयोग की व्यापक योजना एवं प्रबंधन

बिहार गाद प्रबंधन नीति, 2026 के प्रमुख उद्देश्य

  1. जल संसाधनों का पुनर्स्थापन: नदियों, नहरों और जलाशयों की जल-वहन तथा जल धारण क्षमता को पुनः बहाल करना।
  2. बाढ़ जोखिम में कमी: संवेदनशील स्थानों पर अत्यधिक गाद जमाव की समस्या का समाधान करना तथा बाढ़ प्रबंधन प्रयासों को मजबूत बनाना।
  3. अवसंरचना विकास: तकनीकी रूप से उपयुक्त गाद और खुदाई से प्राप्त सामग्री का सड़कों, राजमार्गों तथा अन्य विकास परियोजनाओं में पुनः उपयोग बढ़ाना।
  4. कृषि भूमि का संरक्षण: अवसंरचना निर्माण में मिट्टी भराई के लिए उपजाऊ कृषि भूमि की ऊपरी मिट्टी पर निर्भरता कम करना।
  5. जल सुरक्षा: सिंचाई, घरेलू जलापूर्ति तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले जल संसाधनों की कार्यक्षमता में सुधार करना।
  6. सतत संसाधन प्रबंधन: नदी पुनर्स्थापन को वैज्ञानिक रूप से विनियमित अवसाद निष्कर्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों से जोड़ना।

नदी संजीवनी पहल: नदी पुनर्स्थापन को राजमार्ग निर्माण से जोड़ना

  • नदी संजीवनी पहल (Nadi Sanjeevani Initiative) का उद्देश्य नदियों से गाद निकासी को अवसंरचना विकास से जोड़ना है। इसके अंतर्गत निकाली गई उपयुक्त अवसादी सामग्री का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा।
  • बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच हुए समझौते के अंतर्गत तकनीकी आकलन और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए गाद निकासी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।

नीति का महत्त्व

क्षेत्र

संभावित महत्त्व

बाढ़ प्रबंधन

चिन्हित स्थानों पर जल निकासी की बाधाओं को कम करने और जल-वहन क्षमता में सुधार करने में सहायक

जल सुरक्षा

प्रभावित जल निकायों की जल भंडारण और जल प्रबंधन संबंधी कार्यक्षमता को बहाल करना

कृषि

निर्माण कार्यों के लिए उपजाऊ ऊपरी मिट्टी की खुदाई को कम करने में सहायता

अवसंरचना

मिट्टी भराई के लिए उपयुक्त सामग्री का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराना

अर्थव्यवस्था

संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और लागत-कुशल निर्माण के अवसर उत्पन्न करना

पर्यावरण

पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों के साथ नियोजित अवसाद प्रबंधन को प्रोत्साहन

सुशासन

राज्य की विभिन्न एजेंसियों और NHAI के बीच समन्वय को बढ़ावा देना

प्रमुख चुनौतियाँ एवं चिंताएँ

  • पर्यावरणीय प्रभाव: अनियंत्रित ड्रेजिंग से जलीय आवासों, जैव विविधता और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है।
  • नदी आकृति विज्ञान: अत्यधिक अवसाद निष्कर्षण से नदी की गहराई, तटों की स्थिरता और प्राकृतिक अवसाद परिवहन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • तकनीकी व्यवहार्यता: निकाली गई सभी प्रकार की गाद इंजीनियरिंग और निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होती।
  • परिवहन लागत: गाद को निकालकर लंबी दूरी तक पहुँचाना महँगा हो सकता है।
  • सीमापार मुद्दे: बिहार में बाढ़ और अवसाद प्रबंधन नेपाल की ऊपरी नदी प्रणालियों पर भी निर्भर करता है।
  • कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ: अत्यधिक निष्कर्षण और अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

आगे की राह

  1. नदी बेसिन आधारित प्रबंधन: वैज्ञानिक नदी अध्ययनों के आधार पर नदी बेसिन स्तर की अवसाद प्रबंधन योजनाएँ तैयार की जानी चाहिए।
  2. आधुनिक तकनीकों का उपयोग: संवेदनशील गाद जमाव क्षेत्रों की पहचान के लिए उपग्रह निगरानी, बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण (Bathymetric Surveys) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग किया जाना चाहिए।
  3. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन: बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग गतिविधियों से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) किया जाना चाहिए।
  4. अवसादों का उपयुक्त पुनः उपयोग: इंजीनियरिंग मानकों से समझौता किए बिना निकाली गई सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  5. क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग: बाढ़ पूर्वानुमान और नदी बेसिन प्रबंधन के लिए अंतरराज्यीय तथा भारत-नेपाल सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए।
  6. पारदर्शी निगरानी व्यवस्था: जल निकायों के पुनर्स्थापन से प्राप्त परिणामों की नियमित समीक्षा तथा पारदर्शी निगरानी प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

  • बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 बाढ़ प्रबंधन, जल संसाधन पुनर्स्थापन और अवसंरचना विकास को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
  • जमा हुए अवसादों के उत्पादक पुनः उपयोग को बढ़ावा देकर राज्य एक पर्यावरणीय चुनौती को आर्थिक संसाधन में बदलने का प्रयास कर रहा है। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता वैज्ञानिक योजना, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और समन्वित नदी बेसिन प्रबंधन पर निर्भर करेगी।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न. बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसका उद्देश्य नदियों और जलाशयों की जल-वहन क्षमता को बहाल करना है।
  2. यह अवसंरचना विकास में निकाली गई उपयुक्त गाद के उपयोग को बढ़ावा देती है।
  3. इसका कार्यान्वयन विशेष रूप से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. भारत में बाढ़ के जोखिम को कम करने तथा सतत अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक अवसाद प्रबंधन के महत्त्व की चर्चा कीजिए।

FAQs

1. व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य कौन-सा है?

3 नवंबर, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, बिहार व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य है।

2. बिहार गाद प्रबंधन नीति, 2026 का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

इसका प्रमुख उद्देश्य नदियों और जल निकायों की कार्यात्मक क्षमता को बहाल करना, अवसाद प्रबंधन में सुधार करना तथा निकाली गई सामग्री के उत्पादक पुनः उपयोग को बढ़ावा देना है।

3. नदी संजीवनी पहल क्या है?

यह एक ऐसी पहल है, जिसके अंतर्गत नदियों से गाद निकासी और जल निकायों के पुनर्स्थापन को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में उपयुक्त अवसादी सामग्री के पुनः उपयोग से जोड़ा गया है।

4. गाद निकासी पहल के लिए बिहार सरकार ने किस एजेंसी के साथ साझेदारी की है?

बिहार सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India–NHAI) के साथ साझेदारी की है।

5. गाद प्रबंधन बाढ़ के जोखिम को कैसे कम कर सकता है?

चिन्हित स्थानों पर वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने से स्थानीय जल निकासी और नदियों की जल-वहन क्षमता में सुधार हो सकता है।

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