प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम

संदर्भ 

हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में प्राथमिक शिक्षक संबंधी शिक्षा (पीटीई) में छह माह के प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। 

प्रमाण-पत्र (ब्रिज) पाठ्यक्रम के बारे में   

  • यह पाठ्यक्रम ऐसे सेवारत प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है, जिनके पास बी.एड. की डिग्री है। 
  • यह पाठ्यक्रम ऐसे शिक्षकों के लिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण हेतु आवश्यक प्रमाणन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
  • यह विशेष व्यावसायिक विकास कार्यक्रम शिक्षकों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे वे प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) के  विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से शिक्षित करने के लिए आवश्यक कौशल और दक्षताएं विकसित कर सकेंगे।

उद्देश्य:

  • ब्रिज पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्राथमिक शिक्षकों को ऐसे कौशल, दृष्टिकोण और आत्म चिंतन की क्षमताओं से सशक्त बनाना है, जो प्राथमिक कक्षाओं में सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आजीवन अधिगम सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। यह शिक्षण को एक गतिशील, संदर्भ-संवेदी और जिज्ञासा-आधारित पेशे के रूप में देखने के विजन को बढ़ावा देता है।

संचालन संस्था:

  • यह ब्रिज पाठ्यक्रम राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से संचालित किया जाएगा। 
  • इसके अंतर्गत शिक्षकों को बाल-केंद्रित, समावेशी तथा बाल विकास के अनुरुप शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया जाएगा। इससे शिक्षा के आधारभूत और प्राथमिक चरणों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। 

विशेषताएं: 

  • यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निर्धारित ढांचे के अनुरूप तैयार किया किया गया है। 
  • इसके माध्यम से प्राथमिक स्तर पर शिक्षण-पद्धति संबंधी दक्षताओं को मजबूत किया जाएगा। 
  • इसमें अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ कम से कम 10 दिनों की ऑनलाइन संपर्क कक्षाएं और कम से कम 20 दिनों का विद्यालय-आधारित अनुभव शामिल होगा।
  • यह ब्रिज पाठ्यक्रम शिक्षकों को छोटे बच्चों की विविध अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाएगा। इसमें छह सैद्धांतिक पाठ्यक्रम और विद्यालय-आधारित प्रायोगिक कार्य शामिल हैं। 
  • यह कार्यक्रम शैक्षिक सिद्धांत को कक्षा में उसके व्यवहारिक प्रयोग से जोड़ने के लिए एक सुदृढ़ ढांचा प्रदान करता है।

कार्यक्रम के घटक: 

  • इस कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों घटक शामिल हैं, जिनका उद्देश्य आधारभूत अधिगम के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करना है। 
  • शिक्षण का माध्यम हिंदी और अंग्रेजी भाषाएं होंगी। हालांकि, शिक्षकों को आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी भी भाषा में सार्वजनिक परीक्षा (सिद्धांत) देने की अनुमति होगी। 
  • यह पाठ्यक्रम मुक्त एवं दूरस्थ अधिगम (ओडीएल) पद्धति के माध्यम से संचालित किया जाएगा। पाठ्यक्रम में संपर्क कार्यक्रम, विद्यालय-आधारित प्रायोगिक कार्य जिसमें – 
    • अभ्यास शिक्षण, 
    • आत्म-चिंतन संबंधी जर्नल,
    • पोर्टफोलियो, 
    • वीडियो ट्यूटोरियल, 
    • ई-लर्निंग सामग्री और 
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। 
  • यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि सेवारत शिक्षक अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया:

  • इस पाठ्यक्रम में प्रवेश एनआईओएस के आधिकारिक ब्रिज पाठ्यक्रम पोर्टल (https://bridge.nios.ac.in) के माध्यम से ऑनलाइन होगा। पात्र शिक्षक पंजीकरण कर सकेंगे, आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे तथा निर्धारित डैशबोर्ड के माध्यम से अपने प्रवेश की स्थिति देख सकेंगे। 
  • पाठ्यक्रम की समस्त अध्ययन सामग्री, जिसमें स्व-अधिगम सामग्री भी शामिल है, डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
  • शिक्षक अपने अधिगम अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ऑडियो/वीडियो, इंटरैक्टिव सामग्री सहित पूरक संसाधनों तक भी ऑनलाइन पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। 

पाठ्यक्रम के शुरुआत की पृष्ठभूमि 

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अप्रैल 2024 को सिविल अपील संख्या 5068/2023 (देवेश शर्मा बनाम भारत संघ एवं अन्य) में अपने फैसले के माध्यम से एनसीटीई को उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए एक ब्रिज पाठ्यक्रम तैयार करने का अधिकार दिया था, जिनके पास डी.ईएल.ईएड की योग्यता नहीं थी। 
  • तदनुसार, यह ब्रिज पाठ्यक्रम सेवारत प्राथमिक विद्यालय के उन शिक्षकों के लिए तैयार किया गया था, जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) पर अध्यापन के लिए बी.एड. डिग्री के साथ की गई थी। 
  • यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए है, जिनकी नियुक्तियां एनसीटीई की राजपत्र अधिसूचना एफ. संख्या एनसीटीई-आरईजी 012/2018 दिनांक 28 जून 2018 के तहत संरक्षित हैं। 
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