एंटीबायोटिक्स और चीनी का एक साथ सेवन आंतों के लिए खतरा

संदर्भ  

  • एंटीबायोटिक्स को आधुनिक चिकित्सा की सबसे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं में गिना जाता है। इनकी मदद से कई गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों का इलाज संभव हुआ है। कैंसर के उपचार, सर्जरी और संक्रामक बीमारियों के प्रबंधन में भी इनका अहम योगदान है। हालांकि, इन दवाओं का असर केवल हानिकारक बैक्टीरिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ये आंतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों के संतुलन को भी प्रभावित कर सकती हैं।  
  • नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से संकेत मिला है कि एंटीबायोटिक्स लेते समय खानपान, विशेष रूप से चीनी और मिठाइयों का अधिक सेवन, आंतों के माइक्रोबायोम को होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है। हालांकि, इस अध्ययन के नतीजों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसमें गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शामिल किया गया था।  

आंतों के माइक्रोबायोम पर प्रभाव 

  • इंसान की आंतों में खरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं। बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों का यह समुदाय पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ माइक्रोबायोम के लिए इन सूक्ष्मजीवों की विविधता और उनके बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। 
  • जब इस संतुलन में गड़बड़ी होती है और कुछ सूक्ष्मजीवों की संख्या घटने या बढ़ने लगती है, तो इस स्थिति को डिस्बायोसिस कहा जाता है। एंटीबायोटिक्स इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं, क्योंकि ये संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया के साथ कुछ लाभकारी बैक्टीरिया को भी प्रभावित कर सकती हैं।
  • रक्त या बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में यह समस्या अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे मरीजों को अक्सर एंटीबायोटिक्स के साथ कीमोथेरेपी, रेडिएशन और अन्य गहन उपचारों से गुजरना पड़ता है, जिनका असर आंतों के माइक्रोबायोम पर भी पड़ सकता है। 

माइक्रोबायोम क्या है? 

माइक्रोबायोटा एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग मानव शरीर के विभिन्न स्थानों में सह-अस्तित्व रखने वाले सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, यीस्ट, वायरस, परजीवी और कवक सहित) का वर्णन करने के लिए किया जाता है। माइक्रोबायोम के सूक्ष्मजीवीय जीनों का संग्रह, मानव जीनों की संख्या से लगभग 100 गुना अधिक होता है। 

1,000 से ज्यादा नमूनों का विश्लेषण 

  • शोधकर्ताओं ने आहार और आंतों के माइक्रोबायोम के बीच संबंध समझने के लिए हेमेटोपोएटिक सेल ट्रांसप्लांटेशन कराने वाले मरीजों का अध्ययन किया। इसमें 173 मरीजों द्वारा खाए गए 9,419 भोजन का रिकॉर्ड और 158 मरीजों के 1,000 से अधिक मल के नमूनों का विश्लेषण किया गया।
  • शोधकर्ताओं ने भोजन को अनाज, सब्जियों, फलों, मांस, दूध, तेल और मिठाइयों जैसी श्रेणियों में बांटा। इसके बाद मरीजों के खानपान की तुलना उनके आंतों के माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों से की गई।
  • अध्ययन में सामने आया कि व्यापक प्रभाव वाले एंटीबायोटिक्स (ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स) के प्रयोग के दौरान अधिक मिठाइयां और चीनी खाने का संबंध आंतों में सूक्ष्मजीवों की विविधता में ज्यादा गिरावट से था। 
  • शोधकर्ताओं के अनुमान के अनुसार, व्यापक प्रभाव वाले एंटीबायोटिक्स के संपर्क के बाद हर अतिरिक्त 100 ग्राम मिठाई के सेवन के साथ सूक्ष्मजीवों की औसत विविधता में लगभग 24 प्रतिशत अधिक गिरावट देखी गई। वहीं, प्रमुख पोषक तत्वों पर आधारित एक अन्य विश्लेषण में हर अतिरिक्त 100 ग्राम चीनी के साथ लगभग 20.6 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट का संबंध पाया गया। 
  • ये आंकड़े अध्ययन में सामने आए संबंधों को दर्शाते हैं। इन्हें इस बात का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए कि हर व्यक्ति में चीनी खाने से माइक्रोबायोम इसी अनुपात में प्रभावित होगा। 

एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया की संख्या भी बढ़ी 

  • अध्ययन में एंटेरोकोकस (Enterococcus) नामक बैक्टीरिया, विशेष रूप से Enterococcus faecium, पर भी ध्यान दिया गया। सामान्य परिस्थितियों में आंतों में मौजूद विभिन्न सूक्ष्मजीव भोजन और रहने की जगह जैसे संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। एंटीबायोटिक्स इनमें से कई बैक्टीरिया को खत्म कर सकती हैं या उनकी वृद्धि रोक सकती हैं। इससे प्रतिरोधी बैक्टीरिया को पनपने का अवसर मिल सकता है। 
  • E. faecium एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी रक्त संक्रमण का कारण बन सकता है और ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है।
  • शोधकर्ताओं ने चूहों पर भी प्रयोग किए। जब चूहों को एंटीबायोटिक के साथ सुक्रोज यानी एक प्रकार की चीनी दी गई, तो केवल एंटीबायोटिक पाने वाले चूहों की तुलना में एंटेरोकोकस बैक्टीरिया की संख्या तीसरे दिन 16.3 गुना और छठे दिन 33.4 गुना अधिक थी।
  • इसके विपरीत, केवल सुक्रोज देने पर बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि नहीं हुई। इससे संकेत मिला कि चीनी का प्रभाव एंटीबायोटिक्स से प्रभावित आंतों के वातावरण में अधिक स्पष्ट हो सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि माइक्रोबायोम में इस गड़बड़ी को कम फाइबर सेवन से नहीं समझाया जा सकता।

क्या एंटीबायोटिक्स लेते समय मिठाइयों से पूर्णतः दूरी बनाना सही? 

  • अध्ययन के निष्कर्ष सावधानी बरतने का संकेत देते हैं, लेकिन इसके आधार पर सभी लोगों को एंटीबायोटिक्स लेते समय चीनी पूरी तरह बंद करने की सलाह नहीं दी जा सकती।
  • इस शोध में शामिल मरीज गंभीर रूप से बीमार थे और गहन कैंसर उपचार से गुजर रहे थे। इसलिए, उनके नतीजों को सामान्य संक्रमण के लिए कुछ दिनों तक एंटीबायोटिक्स लेने वाले स्वस्थ वयस्कों पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा।  

अध्ययन की सीमाएं: 

  • अध्ययन की कुछ सीमाएं भी थीं। मरीजों को शुरुआत में संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक्स दिए गए थे, जबकि व्यापक प्रभाव वाली दवाएं बाद में चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार दी गईं। इन दवाओं की जरूरत मरीज की बीमारी की गंभीरता से भी जुड़ी हो सकती थी। इसके अलावा, अस्पताल में दिए गए भोजन के बाहर मरीजों ने क्या खाया, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए, डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स बंद करना या सख्त खानपान संबंधी पाबंदियां लगाना उचित नहीं है।

भविष्य में इलाज के साथ खानपान पर भी हो सकता है जोर

  • फिलहाल एंटीबायोटिक्स लिखते समय मुख्य रूप से दवा, उसकी खुराक और उपचार की अवधि पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन माइक्रोबायोम से जुड़े नए शोध भविष्य में इस दृष्टिकोण को व्यापक बनाने की संभावना दिखाते हैं। 
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, एंटीबायोटिक्स लेते समय साधारण शर्करा से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन अस्थायी रूप से कम करना एक संभावित रणनीति हो सकती है। हालांकि, यह जानने के लिए आगे क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है कि ऐसा करने से मरीजों के स्वास्थ्य में वास्तव में कितना सुधार होता है। 
  • यद्यपि इस अध्ययन का प्रमुख संदेश यह है कि आंतें केवल भोजन पचाने का काम नहीं करतीं, बल्कि उनमें मौजूद सूक्ष्मजीव हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी योगदान देते हैं। एंटीबायोटिक्स संक्रमण का इलाज करते समय इस पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, भविष्य में उपचार के दौरान दवाओं और खानपान के आपसी संबंधों को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है। 
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