संदर्भ
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2039-40 तक के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ 'कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना' (सीएमपीएस) को मंजूरी दे दी है।
कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना के बारे में
- इस योजना का मकसद नई निर्माण इकाइयों को समर्थन देना और मौजूदा कंटेनर निर्माण इकाइयों का विस्तार करना है।
उद्देश्य:
- इस योजना का उद्देश्य भारत में विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम तैयार करना, आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को और भी अधिक मजबूत बनाना है।
योजना के तहत मिलने वाली सुविधाएँ:
- ब्याज सब्सिडी सहायता (859 करोड़ रुपये): प्रति वर्ष कम से कम 1,00,000 टीईयू क्षमता वाले नए विनिर्माण संयंत्रों और कम से कम 25,000 टीईयू क्षमता वाले मौजूदा संयंत्रों के विस्तार के लिए पात्र सावधि ऋणों पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
- परिचालन व्यय सहायता (8,891 करोड़ रुपये): वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और पात्र विनिर्माता द्वारा बेचे जाने वाले प्रत्येक कंटेनर पर सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि आयातित कंटेनरों की तुलना में लागत के अंतर को कम किया जा सके। इसके तहत घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत करना होगा।
- परीक्षण एवं प्रमाणन (150 करोड़ रुपये): विदेशों में परीक्षण पर निर्भरता कम करने के लिए डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी साझा परीक्षण सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।
- योजना प्रबंधन (100 करोड़ रुपये): योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासन, निगरानी और क्षमता निर्माण संबंधी गतिविधियों पर व्यय किया जाएगा।
- प्रमुख बंदरगाहों पर भूमि: अधिसूचित दर के 25 प्रतिशत पर भूमि पट्टे पर लेने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
महत्त्व:
- पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति योजना संबंधी दिशा-निर्देशों को मंजूरी देने और सहायता राशि स्वीकृत करने का कार्य करेगी।
- इस योजना से इस्पात, पुर्जों और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
- इसके अलावा, यह कॉर्नर कास्टिंग, विशेष प्रकार के इस्पात, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा देगी। वस्तुतः सरकार का अनुमान है कि इस योजना से वित्त वर्ष 2039-40 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये का आर्थिक उत्पादन होगा, जो प्रदान की जाने वाली सहायता राशि के सात गुने से भी अधिक है।
- कंटेनर की वैश्विक फ्लीट के प्रतिस्थापन, भारत कंटेनर शिपिंग लाइन तथा वधावन और गलाथिया बे जैसे नए मेगा बंदरगाहों से इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है।