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जंक फूड का मस्तिष्क पर प्रभाव

नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में न्यूरोसाइंटिस्ट  ने 1,200 कैलोरी जंक-फूड के सेवन के बाद 'मस्तिष्क की गतिविधि में परिवर्तन' की चेतावनी दी है।

जंक फूड के बारे में 

  • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार, जंक फूड प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ है जिसमें पोषक तत्व न के बराबर होते हैं, और नमक, चीनी और वसा की मात्रा सामान्य खाद्य पदार्थों से अधिक होती है।
  • भारत में  सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा प्रयोगशाला में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में बिकने वाले ज्यादातर पैकेज्ड फूड और फास्ट फूड में खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों की तुलना में नमक और वसा का स्तर बहुत अधिक होता है।

जंक फूड का शरीर पर प्रभाव

  • अतिरिक्त वसा, सामान्य कार्बोहाइड्रेट और प्रसंस्कृत चीनी के सेवन में वृद्धि, जिससे मोटापा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। 
  • परिणामस्वरूप मोटापा धमनियों का रुकना शुरू कर सकता है जिसकी वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है।
  • जंक फूड खाने से मस्तिष्क उसी तरह प्रभावित होता है जैसे नशे की दवाओं का सेवन करने से।

जंक फ़ूड के मस्तिष्क पर प्रभाव पर हालिया शोध के बारे में 

  • शोध का शीर्षक : 'अल्पकालिक, उच्च कैलोरी आहार का पुरुषों में मस्तिष्क इंसुलिन क्रिया पर दीर्घकालिक प्रभाव'

शोध के निष्कर्ष

  • जंक फूड के अत्यधिक सेवन से स्वस्थ युवा पुरुषों के मस्तिष्क के पैटर्न में बदलाव आया, जबकि उनके शरीर का वजन और संरचना अपरिवर्तित रही।
  • पांच दिनों तक चॉकलेट बार, क्रिस्प्स और अन्य जंक फूड खाने से मस्तिष्क की गतिविधियों में स्थायी परिवर्तन हो सकता है। 
  • परिणामस्वरूप मस्तिष्क पैटर्न मोटापे से ग्रस्त लोगों में देखे जाने वाले पैटर्न के समान होते हैं।
    • ये पैटर्न आमतौर पर मोटापे या इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़े होते हैं, जो टाइप 2 मधुमेह का कारण बन सकते हैं।
  • मस्तिष्क की इंसुलिन प्रतिक्रिया लंबे समय तक वजन बढ़ने और अस्वास्थ्यकर शरीर में वसा वितरण से जुड़ी हुई है।
  • जंक फ़ूड का अल्पावधि में अधिक सेवन करने से लीवर में वसा का संचय होता है और मस्तिष्क में इंसुलिन की क्रिया बाधित होती है।
  • यह शोध इंसुलिन के प्रति मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को समझने में सहायता करेगा और मोटापे एवं संबंधित बीमारियों के विकास में सहायक हो सकता है।
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