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दिल्ली घोषणापत्र

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ 

हाल ही में, पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के अवसर पर जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ के साथ ही एकीकृत चिकित्सा में नए अध्याय की शुरुआत हुई है। 

प्रमुख बिंदु

  • पारंपरिक चिकित्सा को सुरक्षित, प्रभावी एवं साक्ष्य-आधारित रूप में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों, विशेषकर प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) पर जोर देते हुये इस घोषणापत्र ने पारंपरिक व आधुनिक चिकित्सा में उभर कर सामने आये नये साक्ष्यों का संज्ञान लिया है। 
  • वर्ष 2022 में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित पारंपरिक चिकित्सा के पहले शिखर सम्मेलन से निकले ‘गुजरात घोषणापत्र’ को आगे बढ़ाते हुए ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पारंपरिक चिकित्सा की व्यापकता, मजबूत होते विज्ञान सम्मत साक्ष्य आधार, नवाचार व नवीन स्वास्थ्य चुनौतियों के लिये नये समाधान की क्षमता को भी रेखांकित किया है। 

दिल्ली घोषणापत्र के संकल्प 

दिल्ली घोषणापत्र चार क्षेत्रों से जुड़े संकल्पों पर मुख्य रूप से केंद्रित है। ये चार संकल्प हैं-

  1. साक्ष्य-आधारित ज्ञान को मजबूत करना
    • प्रतिभागी देशों ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए कठोर, नैतिक एवं बहु-पक्षीय शोध को बढ़ावा देने का संकल्प लिया, जिसमें परंपरागत ज्ञान के साथ वैज्ञानिक मानकों का संतुलन समाहित हो। 
    • वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा पुस्तकालय, जैसे- संसाधनों से शोध, डेटा एवं नीति-दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे।
  2. सुरक्षा, गुणवत्ता एवं सार्वजनिक विश्वास सुनिश्चित करना
    • सुरक्षा एवं गुणवत्ता के लिए सुसंगत, जोखिम-आधारित विनियमन स्थापित करने पर जोर दिया गया है ताकि पारंपरिक चिकित्सा उत्पादों, प्रक्रियाओं व प्रशिक्षकों के मानक स्पष्ट और भरोसेमंद हों।
  3. स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित और प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा का एकीकरण
    • विशेष रूप से पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करना, विशेषकर प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) स्तर पर जहाँ से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की नींव रखी जाती है। 
    • इसका लक्ष्य है कि पारंपरिक चिकित्सा को सुरक्षित, प्रभावी रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाया जाए, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर अधिक विकल्प व  सुलभ स्वास्थ्य सहायता मिल सके।
  4. नवाचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग 
    • डिजिटल तकनीकों, डाटा विज्ञान एवं नवाचार, जैसे- एआई तथा जीनोमिक्स का प्रयोग पारंपरिक चिकित्सा के शोध व डाटा तक पहुँच को बेहतर बनाने के लिए किया जाए। इससे वैश्विक स्तर पर ज्ञान साझाकरण और स्वास्थ्य प्रणालियों में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।  
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