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पूर्वी हिमालय में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की खोज

हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) के वैज्ञानिकों ने पूर्वी हिमालय क्षेत्र में लाइकेन मॉथ की दो नई प्रजातियों की पहचान की है। इन नई प्रजातियों को कौलोसेरा होलोवाई और असुरा बुक्सा (Caulocera hollowayi तथा Asura buxa)  नाम दिया गया है। वस्तुतः यह खोज हिमालयी जैव विविधता के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

कौलोसेरा होलोवाई और असुरा बुक्सा के बारे में 

  • ये दोनों प्रजातियाँ लाइकेन मॉथ समूह से संबंधित हैं और इनकी पहचान पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में की गई है। 
  • Caulocera hollowayi प्रजाति की पहचान सिक्किम के गोलितार (Golitar) क्षेत्र के आसपास एकत्र किए गए नमूनों के अध्ययन से हुई।
    • वैज्ञानिकों ने इसके पंखों के विशिष्ट पैटर्न, रंगीन धारियों तथा सूक्ष्म शारीरिक संरचनाओं का विश्लेषण कर इसे उसी वंश की अन्य ज्ञात प्रजातियों से अलग स्थापित किया।
  • Asura buxa नामक प्रजाति का पता पश्चिम बंगाल के पनिजोरा (Panijhora) क्षेत्र से प्राप्त नमूनों के अध्ययन के दौरान चला।
    • इसके पंखों पर पाए जाने वाले विशिष्ट रंग संयोजन तथा कुछ अद्वितीय आंतरिक शारीरिक विशेषताओं के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसे एक नई प्रजाति के रूप में मान्यता दी। 

पारिस्थितिक महत्व 

  • लाइकेन मॉथ पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इनके लार्वा (कैटरपिलर) मुख्य रूप से लाइकेन पर निर्भर रहते हैं।
  • लाइकेन ऐसे जीव हैं जो वायु प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए इन मॉथ प्रजातियों की उपस्थिति या अनुपस्थिति से वैज्ञानिकों को किसी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता और पर्यावरणीय स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
  • विशेष रूप से भारतीय हिमालय जैसे संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों में ये प्रजातियाँ जैव संकेतक (Bio-indicators) के रूप में कार्य कर सकती हैं और पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। 
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