- हाल ही में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने UMMID Programme को राष्ट्र को समर्पित किया।
- यह कार्यक्रम दुर्लभ आनुवंशिक विकारों एवं वंशानुगत रोगों से प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों के लिए प्रारंभिक पहचान, परामर्श तथा सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।

UMMID Programme के बारे में
- UMMID (Unique Methods of Management of Inherited Disorders) कार्यक्रम भारत में दुर्लभ आनुवंशिक विकारों (Rare Genetic Disorders) एवं वंशानुगत रोगों के प्रबंधन हेतु प्रारंभ किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
- इस पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention) तथा सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है।
- कार्यक्रम का लक्ष्य वंशानुगत एवं दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के निदान, प्रबंधन एवं रोकथाम को सुदृढ़ बनाना है।
कार्यक्रम के उद्देश्य
UMMID Programme निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ प्रारंभ किया गया है :
- वंशानुगत एवं दुर्लभ आनुवंशिक रोगों की शीघ्र पहचान को बढ़ावा देना।
- प्रभावित परिवारों को आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counselling) उपलब्ध कराना।
- रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करना।
- दुर्लभ रोग प्रबंधन हेतु स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना।
- स्वास्थ्यकर्मियों एवं आम जनता में आनुवंशिक विकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
आनुवंशिक विकारों के लिए भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय पहल
UMMID Programme को आनुवंशिक विकारों के समाधान हेतु भारत का पहला व्यापक राष्ट्रीय प्रयास माना जाता है।
यह कार्यक्रम एक समेकित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें शामिल हैं :
- निदान (Diagnosis)
- आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counselling)
- रोकथाम (Prevention)
- प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण (Training and Capacity Building)
- जन-जागरूकता (Public Awareness)
यह बहुआयामी रणनीति दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के लिए एक संरचित राष्ट्रीय तंत्र विकसित करने का प्रयास करती है।
UMMID Programme के प्रमुख स्तंभ
यह कार्यक्रम तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है :
1. NIDAN केंद्र
NIDAN केंद्र निम्न कार्यों हेतु विशेष केंद्र के रूप में कार्य करते हैं :
- आनुवंशिक विकारों का निदान
- आनुवंशिक परीक्षण सुविधाएँ
- रोगियों एवं परिवारों के लिए परामर्श सेवाएँ
इन केंद्रों का उद्देश्य शीघ्र पहचान एवं बेहतर रोग प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
2. आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में आउटरीच कार्यक्रम
कार्यक्रम के अंतर्गत आकांक्षी जिलों में विशेष आउटरीच गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
इनका उद्देश्य है :
- आनुवंशिक रोगों की प्रारंभिक पहचान
- जन-जागरूकता अभियान चलाना
- स्क्रीनिंग एवं रेफरल प्रणाली विकसित करना
- दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना
3. विशेष प्रशिक्षण केंद्र
कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं।
ये केंद्र निम्न सुविधाएँ प्रदान करते हैं :
- आनुवंशिक निदान संबंधी प्रशिक्षण
- स्वास्थ्यकर्मियों का कौशल विकास
- दुर्लभ रोग प्रबंधन में क्षमता निर्माण
- संस्थागत विशेषज्ञता को मजबूत करना
राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD), 2021 से संबंध
UMMID Programme, National Policy for Rare Diseases (NPRD), 2021 के कार्यान्वयन को समर्थन प्रदान करता है।
यह कार्यक्रम वंशानुगत रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए संरचित देखभाल प्रणाली (Structured Care Pathways) विकसित करने में सहायता करता है।
इसके माध्यम से निम्न क्षेत्रों को सुदृढ़ किया जाता है :
- रोगी पहचान प्रणाली
- रेफरल नेटवर्क
- निदान एवं उपचार व्यवस्था
- दीर्घकालिक रोग प्रबंधन
नोडल मंत्रालय
यह कार्यक्रम Department of Biotechnology के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) इस पहल का नोडल विभाग है।
कार्यक्रम का महत्व
UMMID Programme निम्न कारणों से महत्वपूर्ण है :
- भारत में दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन को सुदृढ़ बनाता है।
- सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देता है।
- प्रारंभिक पहचान एवं रोकथाम आधारित स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करता है।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
- आनुवंशिक रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।
- दुर्लभ रोग नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता करता है।
यह कार्यक्रम भारत में दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के बोझ को कम करने और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष
UMMID Programme भारत में दुर्लभ एवं वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन हेतु एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।
निदान, परामर्श, आउटरीच गतिविधियों, प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता के माध्यम से यह कार्यक्रम प्रारंभिक हस्तक्षेप को सुदृढ़ करने तथा प्रभावित परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।
साथ ही, राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति, 2021 के समर्थन के माध्यम से यह भारत में दुर्लभ रोग प्रबंधन तंत्र को अधिक प्रभावी एवं संरचित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।