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पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस)

संदर्भ 

  • पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) ऐसी तकनीक है जो अंतरिक्ष यान के भीतर पृथ्वी जैसी रहने योग्य परिस्थितियां बनाए रखती है। यह प्रणाली हवा, पानी, तापमान, नमी और अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करती है ताकि अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से लंबे समय तक अंतरिक्ष में रह सकें।
  • वस्तुतः कम अवधि के मिशनों में भोजन, पानी और ऑक्सीजन जैसी आवश्यक वस्तुएं पृथ्वी से ले जाई जाती हैं तथा अपशिष्ट को सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है। वहीं, लंबे अभियानों में अपशिष्ट पदार्थों को पुनर्चक्रित कर उपयोगी संसाधनों  जैसे स्वच्छ जल और सांस लेने योग्य वायु में बदला जाता है।  

वायु पुनर्जीवन प्रणाली के बारे में  

  • पृथ्वी पर पेड़-पौधे और महासागर प्राकृतिक रूप से वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर लेते हैं। लेकिन अंतरिक्ष यान में ऐसा संभव नहीं होता। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सांस से केबिन के भीतर कार्बन डाइऑक्साइड लगातार बढ़ेगी, इसलिए इसे कृत्रिम रूप से हटाना आवश्यक होगा। 
  • यदि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर अधिक हो जाए तो हाइपरकैपनिया जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे सिरदर्द, चक्कर और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। सामान्य रूप से एक स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 1 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है, जबकि अधिक शारीरिक गतिविधि होने पर यह मात्रा बढ़ सकती है।
  • वायु पुनर्जीवन प्रणाली ताजी हवा उपलब्ध कराती है, अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड हटाती है और केबिन में बनने वाली गंध तथा सूक्ष्म प्रदूषकों को फ़िल्टर करती है। छोटे अंतरिक्ष अभियानों में ऑक्सीजन की आपूर्ति उच्च दबाव वाले सिलेंडरों से की जाती है। औसतन एक अंतरिक्ष यात्री को प्रतिदिन लगभग 0.84 किलोग्राम ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। 
  • कार्बन डाइऑक्साइड हटाने के लिए लिथियम हाइड्रॉक्साइड आधारित कनस्तरों का उपयोग किया जाता है। इनमें सक्रिय चारकोल भी होता है, जो दुर्गंध को अवशोषित करता है। सामान्यतः इन कनस्तरों को हर 20 से 24 घंटे में बदला जाता है। 
  • सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में प्राकृतिक वायु प्रवाह नहीं होता, इसलिए छोटे पंखों की मदद से केबिन के भीतर हवा का संचार बनाए रखा जाता है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड या ऑक्सीजन के खतरनाक गुच्छे बनने से रोका जा सकता है।

तापमान, दबाव और आर्द्रता का नियंत्रण 

  • गगनयान के क्रू मॉड्यूल को लगभग 20 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान और 30% से 70% सापेक्ष आर्द्रता बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। इससे चालक दल को आरामदायक वातावरण मिलता है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
  • केबिन में नमी मुख्य रूप से अंतरिक्ष यात्रियों की सांस और पसीने से उत्पन्न होती है। यदि आर्द्रता बहुत कम हो जाए तो त्वचा शुष्क हो सकती है, आंखों में जलन हो सकती है और स्थैतिक विद्युत पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं अत्यधिक नमी से सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं तथा संघनन के कारण उपकरणों में जंग या शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
  • अंतरिक्ष यान के भीतर ऊष्मा मुख्य रूप से मानव शरीर और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से पैदा होती है। इसे नियंत्रित करने के लिए सक्रिय शीतलन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। ऊष्मा विनिमय यंत्रों के माध्यम से अतिरिक्त गर्मी बाहर निकाली जाती है। 
  • दबाव को पृथ्वी के समुद्र तल जैसी स्थिति के करीब, लगभग 101.3 किलोपास्कल पर स्थिर रखा जाता है। इसके लिए सेंसर और सुरक्षा वाल्व ऑक्सीजन तथा वायु के संतुलन को नियंत्रित करते हैं।

अंतरिक्ष में पानी की व्यवस्था कैसे होती है ? 

  • अंतरिक्ष में पानी सामान्य तरीके से नीचे नहीं बहता, बल्कि छोटी-छोटी बूंदों के रूप में तैरता रहता है। ये बूंदें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए खतरा बन सकती हैं और सांस के जरिए शरीर में जाने पर जोखिम पैदा कर सकती हैं।
  • इसी कारण अंतरिक्ष यानों में पानी को विशेष दबावयुक्त थैलियों में रखा जाता है। गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्री इन्हीं विशेष बैगों से पानी पी सकेंगे, जिन्हें दबाकर पानी सीधे मुँह तक पहुँचाया जाएगा। 

अपशिष्ट प्रबंधन कैसे किया जाता है ? 

  • सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में तरल और ठोस अपशिष्ट नीचे नहीं गिरते, इसलिए उन्हें नियंत्रित करने के लिए चूषण-आधारित वायु प्रवाह प्रणालियों (suction-based airflow systems) का इस्तेमाल किया जाता है। ये प्रणालियाँ अपशिष्ट को शरीर से दूर खींचती हैं और उसे केबिन में तैरने से रोकती हैं।  
  • गगनयान में मल संग्रह के लिए विशेष बैग और मूत्र संग्रह के लिए फ़नल आधारित व्यवस्था होगी। अपशिष्ट पदार्थों को रासायनिक रूप से उपचारित कर दुर्गंध और बैक्टीरिया की वृद्धि रोकी जाएगी। बाद में इन्हें सीलबंद कंटेनरों में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि पृथ्वी पर लौटने के बाद उनका निपटान किया जा सके।  

अंतरिक्ष यान में आग लगने पर क्या होता है ? 

  • गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में आग सामान्य लपटों की बजाय गोलाकार रूप में फैल सकती है, जिससे उसे नियंत्रित करना अधिक कठिन हो जाता है। गगनयान में धुआं पहचानने वाले सेंसर चालक दल को तुरंत सतर्क करेंगे। 
  • आग बुझाने के लिए विशेष अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया जाएगा, जो पानी की महीन फुहार छोड़ते हैं। यह फुहार आग को ठंडा करने के साथ-साथ धुएं के विषैले कणों को भी कम करने में मदद करती है। कुछ अंतरिक्ष यानों, जैसे सोयुज, में आपात स्थिति में केबिन का दबाव कम करने का विकल्प भी मौजूद होता है, हालांकि इसका उपयोग अंतिम उपाय के रूप में किया जाता है।
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