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मुगा सिल्क (Muga silk)

चर्चा में क्यों ?     

  • हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने इटली की प्रधानमंत्री को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माने जाने वाले मुगा सिल्क स्टोल तथा शिरुई लिली सिल्क स्टोल उपहारस्वरूप भेंट किए। 

मुगा सिल्क के बारे में 

  • मुगा सिल्क को असम का पारंपरिक गोल्डन सिल्क कहा जाता है।
  • यह ब्रह्मपुत्र घाटी में तैयार होने वाला अत्यंत दुर्लभ और उच्च गुणवत्ता वाला रेशमी वस्त्र है। 
  • इसका निर्माण एंथेरिया असापेंसिस (Antheraea assamensis) नामक अर्ध-पालतू बहुप्रजननशील रेशमकीट से प्राप्त धागों से किया जाता है। 
  • ये रेशमकीट मुख्य रूप से सोम और सोलू पौधों की सुगंधित पत्तियों पर पलते हैं तथा इनका पालन तसर रेशम की तरह पेड़ों पर किया जाता है। 
  • मुगा रेशम अपनी प्राकृतिक सुनहरी आभा, लंबे समय तक टिकाऊ रहने की क्षमता और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इसमें कृत्रिम रंगों का प्रयोग नहीं किया जाता।
  • असम की सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक जीवन में मुगा सिल्क का विशेष महत्व है।  
  • इसका उपयोग साड़ी, मेखला, चादर और अन्य पारंपरिक परिधानों के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • वर्ष 2007 में मुगा सिल्क को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया था। 

शिरुई लिली सिल्क के बारे में  

  • शिरुई लिली सिल्क की प्रेरणा मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध से घिरी पहाड़ियों से ली गई है। 
  • यह प्रसिद्ध शिरुई लिली फूल पर आधारित है, जो हल्के गुलाबी-सफेद रंग की घंटीनुमा पंखुड़ियों वाला अत्यंत दुर्लभ पुष्प है और दुनिया में केवल मणिपुर के इसी क्षेत्र में पाया जाता है। 
  • मणिपुर के तांगखुल नागा समुदाय के लिए यह फूल पवित्रता, सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है।
  • लिली फूल का इटली की सांस्कृतिक परंपराओं में भी विशेष स्थान है, जहाँ इसे लंबे समय से शुद्धता, सौंदर्य और कलात्मक परिष्कार का प्रतीक माना जाता रहा है। 
  • पुनर्जागरण कालीन इटली की कला और चित्रकला में भी लिली का व्यापक रूप से उपयोग देखने को मिलता है।
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