भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार

संदर्भ  

  • बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए स्वरूपों के बीच श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना महत्वपूर्ण हो गया है। अनौपचारिक, गिग और प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार के विस्तार से आय और रोजगार की निरंतरता प्रभावित होती है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा श्रमिकों और उनके परिवारों को बीमारी, बेरोजगारी, सेवानिवृत्ति और अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2015 में 19 प्रतिशत रहा सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2026 में बढ़कर 68.4 प्रतिशत हो गया है, जिससे एक अरब से अधिक लोग इसके दायरे में आए हैं। इस विस्तार में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत कार्यरत यह वैधानिक संस्था भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाओं के माध्यम से पात्र कर्मचारियों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। 

ईपीएफओ के तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा स्तंभ 

  • ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था तीन प्रमुख योजनाओं पर आधारित है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के तहत कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान तथा ब्याज से सेवानिवृत्ति बचत तैयार होती है। सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 के तहत नई ईपीएफ योजना, 2026 ने पूर्ववर्ती व्यवस्था को प्रतिस्थापित किया है। इसमें आवास, शिक्षा, विवाह और चिकित्सा जैसी जरूरतों के लिए निर्धारित शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा है। 
  • कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस), 2026 पात्र सदस्यों को सेवानिवृत्ति, विकलांगता और अन्य निर्धारित परिस्थितियों में मासिक पेंशन देती है। मृत सदस्य के पात्र पति-पत्नी, बच्चों और आश्रितों को भी पेंशन लाभ मिलता है। वहीं, कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई), 2026 सेवा के दौरान सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अधिकतम 7 लाख रुपये तक का बीमा लाभ प्रदान करती है। इसके लिए कर्मचारी को अलग से बीमा प्रीमियम नहीं देना पड़ता। 

बढ़ती सदस्यता और व्यापक कवरेज 

  • ईपीएफओ ने औपचारिक कार्यबल के विस्तार के साथ अपनी पहुंच भी बढ़ाई है। इसके योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 2014-15 में 3.49 करोड़ थी, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ हो गई। इस दौरान करीब 4.49 करोड़ नए योगदानकर्ता जुड़े। सितंबर 2026 तक 7.68 लाख प्रतिष्ठान ईपीएफओ में योगदान दे रहे थे। 
  • पेंशन लाभार्थियों की संख्या भी 2014-15 के 51.04 लाख से बढ़कर सितंबर 2026 तक लगभग 82 लाख हो गई। इसी तरह, दावों का निपटान 2014-15 में 1.30 करोड़ था, जबकि अक्टूबर 2026 तक पिछले एक वर्ष में 6.42 करोड़ दावों का निपटारा किया गया। ये आंकड़े ईपीएफओ की बढ़ती संस्थागत पहुंच और सेवा क्षमता को दर्शाते हैं। 

वेतन सीमा और पीएफ निकासी में सुधार 

  • अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए वेतन सीमा सितंबर 2014 में 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह की गई थी। सितंबर 2026 में इसे 25,000 रुपये करने की मंजूरी दी गई, जिससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कवरेज मिलने की उम्मीद है। 
  • पीएफ निकासी को आसान बनाने के लिए 13 प्रावधानों को तीन श्रेणियों- अनिवार्य आवश्यकताएं, आवास और विशेष परिस्थितियों में समेकित किया गया है। अक्टूबर 2025 के संशोधित नियमों के तहत शिक्षा के लिए 10 और विवाह के लिए 5 बार निकासी की अनुमति है, जबकि पहले दोनों के लिए कुल तीन निकासी की सीमा थी। पात्र सदस्य निर्धारित शर्तों के तहत पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं और न्यूनतम सेवा अवधि 12 महीने रखी गई है।  
  • इसके अतिरिक्त, पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। ऑनलाइन दावों में चेक-लीफ या प्रमाणित बैंक पासबुक अपलोड करने की अनिवार्यता भी समाप्त की गई है। इससे दावा निपटान तेज और सरल हुआ है। 

अनुपालन और पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण 

  • कारोबार को आसान बनाने और कानूनी विवाद कम करने के लिए ईपीएफओ ने विश्वास योजना और एमनेस्टी योजना, 2026 शुरू की हैं। विश्वास योजना का उद्देश्य ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत पात्र विवादों का एकमुश्त निपटान करना है। इसके तहत 14 जून 2024 से पहले के पात्र डिफॉल्ट पर देरी के अनुसार 0.25, 0.50 या 1 प्रतिशत की मासिक क्षतिपूर्ति दर लागू होती है। नियोक्ताओं को वैधानिक ब्याज चुकाना और आगे अपील न करने की सहमति देनी होती है। 
  • एमनेस्टी योजना उन प्रतिष्ठानों को पीएफ ट्रस्ट नियमित करने का अवसर देती है, जिन्हें आयकर अधिनियम के तहत मान्यता मिली है, लेकिन ईपीएफओ से औपचारिक छूट नहीं मिली। पात्र ट्रस्ट निर्धारित शर्तों के तहत पूर्वव्यापी छूट प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना 28 दिसंबर 2026 तक खुली है।  
  • डिजिटल पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए फरवरी 2020 से पात्र कंपनियों को SPICe+ और AGILE-PRO फॉर्म के माध्यम से ईपीएफओ में स्वतः पंजीकरण की सुविधा दी गई है। नवंबर 2019 से कर्मचारी स्वयं अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) बना सकते हैं। अप्रैल 2025 में आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से यूएएन जनरेशन और एक्टिवेशन की सुविधा शुरू हुई। अक्टूबर 2026 तक 1.74 करोड़ स्व-जनित यूएएन दर्ज किए गए। जनवरी 2017 से 21 अक्टूबर 2026 तक उमंग ऐप पर ईपीएफओ से जुड़े लेनदेन 709 करोड़ से अधिक रहे। यूएएन अलग-अलग नियोक्ताओं के तहत बने पीएफ खातों को जोड़ता है और नौकरी बदलने पर खाते की पोर्टेबिलिटी आसान बनाता है। अगस्त 2025 से सदस्य यूएएन पोर्टल पर आधार विवरण जोड़ने और सुधारने की सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं।

ईपीएफओ सेवाओं का डिजिटल आधुनिकीकरण  

  • पेंशन सेवाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) शुरू की गई है। इसके तहत पेंशनभोगी देश की किसी भी बैंक शाखा से पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। बैंक या निवास स्थान बदलने पर पीपीओ स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं होती। 
  • ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ मिलकर घर पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की है। प्रति प्रमाणपत्र 50 रुपये का खर्च ईपीएफओ उठाता है, जिससे बुजुर्ग और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनभोगियों को विशेष लाभ मिलता है।
  • 1 नवंबर 2025 को शुरू की गई नई ईपीएफओ वेबसाइट कर्मचारियों, नियोक्ताओं और पेंशनभोगियों को पासबुक, दावा फॉर्म, पेंशन और प्रोफाइल अपडेट जैसी सुविधाएं एक मंच पर उपलब्ध कराती है। वहीं, ईपीएफओ 3.0 के तहत कोर बैंकिंग, क्लाउड तकनीक और एपीआई आधारित सेवाओं को एकीकृत किया जा रहा है। इससे कागजी कार्रवाई घटाने और दावों के निपटान का समय 20 दिनों से कम करके तीन दिन से भी कम करने का लक्ष्य है। तत्काल निकासी, बहुभाषी सेवाएं और पेरोल आधारित योगदान जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। यह व्यवस्था 30 करोड़ से अधिक सदस्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। 

ईपीएफओ से आगे सामाजिक सुरक्षा का विस्तार 

  • भारत का सामाजिक सुरक्षा ढांचा ईपीएफओ के अतिरिक्त कई योजनाओं के माध्यम से असंगठित श्रमिकों, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को सहायता प्रदान करता है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगता पेंशन तथा पारिवारिक लाभ दिए जाते हैं। उपलब्ध योजना प्रावधानों के अनुसार, 60-79 वर्ष के बुजुर्गों को 200 रुपये और 80 वर्ष से अधिक आयु वालों को 500 रुपये मासिक पेंशन मिलती है। विधवाओं के लिए यह राशि क्रमशः 300 और 500 रुपये है। दिव्यांगता पेंशन 375 से 625 रुपये तक है। वहीं, परिवार के प्राथमिक कमाने वाले सदस्य की 18-59 वर्ष की आयु में मृत्यु होने पर पात्र परिवार को 20,000 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती है।  
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को एकीकृत किया है। इसमें भविष्य निधि, पेंशन, बीमा, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ शामिल हैं। यह गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में मान्यता देती है। पात्र निश्चित अवधि के कर्मचारियों को एक वर्ष की सेवा के बाद आनुपातिक ग्रेच्युटी तथा पात्र महिलाओं को 26 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का प्रावधान है।
  • अगस्त 2021 में शुरू किया गया ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों का आधार आधारित राष्ट्रीय डेटाबेस है। अगस्त 2026 तक इस पर 31.89 करोड़ पंजीकरण दर्ज किए गए। अक्टूबर 2024 में शुरू हुए ई-श्रम वन-स्टॉप सॉल्यूशन ने 15 सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं को एक मंच पर जोड़ा है। यह श्रमिकों को राष्ट्रीय करियर सेवा, स्किल इंडिया डिजिटल हब और माईस्कीम से भी जोड़ता है।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना असंगठित क्षेत्र के 18-40 वर्ष के उन पात्र श्रमिकों के लिए है, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये तक है। इसमें 60 वर्ष की आयु के बाद 3,000 रुपये मासिक सुनिश्चित पेंशन मिलती है। लाभार्थी आयु के अनुसार 55 से 200 रुपये मासिक योगदान करते हैं और केंद्र सरकार भी बराबर योगदान देती है।

समावेशी सामाजिक सुरक्षा की ओर भारत 

  • भारत में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार केवल योजनाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। ईपीएफओ की बढ़ती सदस्यता, पेंशन कवरेज, सरल निकासी नियम और डिजिटल सेवाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वहीं, ई-श्रम, पीएम-एसवाईएम और सामाजिक सुरक्षा संहिता जैसी पहल असंगठित एवं नए रोजगार क्षेत्रों के श्रमिकों को भी सुरक्षा के दायरे में ला रही हैं। इन प्रयासों से भारत में एक अधिक समावेशी, सुलभ और मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने का आधार तैयार हो रहा है।  
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