संदर्भ
हाल ही में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में पहला फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) लॉन्च किया। इसके साथ ही उन्होंने पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-5) की नींव रखी और उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन भी किया। वस्तुतः यह उपलब्धि एचएसएल की बड़े और अधिक महत्वपूर्ण जहाजों के निर्माण की क्षमता को सुदृढ़ करने तथा भारत की स्वदेशी समुद्री क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ के बारे में
- सूर्य 223.6 मीटर लंबा और 31.5 मीटर चौड़ा है, जिसका ड्राफ्ट 9.3 मीटर है।
- इसका विस्थापन लगभग 43,500 टन है और इसकी अधिकतम गति 20 समुद्री मील है।
- यह 20,000 टन कम सल्फर वाला हाई-स्पीड डीजल, 2,500 टन विमानन टरबाइन ईंधन, 1,000 टन ताजा पानी और 250 टन फीड वाटर ले जा सकता है, साथ ही गोला-बारूद, अतिरिक्त पुर्जों और रसद के लिए आठ 20 फुट के कंटेनर (प्रत्येक 32.6 घन मीटर) तक ले जा सकता है।
- जहाज पर स्थित कार्यशालाएं जहाज और उसके द्वारा समर्थित जहाजों के लिए प्राथमिक रखरखाव और आपातकालीन मरम्मत कर सकती हैं।
एफएसएस की तकनीकी क्षमताएं:
- इन जहाजों को 60 दिनों तक लगातार मिशन पर रहने और हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ उससे बाहर के दूरस्थ इलाकों में संचालन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
- इनमें मिसाइल, टॉरपीडो और समुद्री माइंस जैसे खतरों से निपटने के लिए आधुनिक आत्मरक्षा प्रणालियां मौजूद हैं।
- जहाज पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए एक डेक भी दिया गया है, जो समुद्र की स्थिति-5 तक मध्यम श्रेणी के हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए प्रमाणित है।
- इनके प्रणोदन तंत्र में कंबाइंड डीजल एंड डीजल (CODAD) प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें सिंगल शाफ्ट और कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर शामिल हैं।
फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) की मुख्य भूमिका:
- फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) का मुख्य काम समुद्र में लंबे समय तक तैनात युद्धपोतों और पनडुब्बियों को जरूरी रसद उपलब्ध कराना है।
- ये जहाज अपने घरेलू बंदरगाह से दूर मौजूद नौसैनिक इकाइयों तक ईंधन, लुब्रिकेंट, भोजन, अन्य आवश्यक सामान और कर्मियों को पहुंचाते हैं।
- इन संसाधनों को समुद्र में ही दूसरे जहाजों तक विभिन्न तरीकों से पहुंचाया जा सकता है, जिसमें जहाज के दोनों किनारों, पिछले हिस्से या हेलीकॉप्टर के जरिए आपूर्ति शामिल है।
- एफएसएस एक साथ कई नौसैनिक जहाजों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा सकता है। इससे कैरियर बैटल ग्रुप या सरफेस एक्शन ग्रुप लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकते हैं और बार-बार बंदरगाह लौटने की आवश्यकता कम हो जाती है। इस तरह ऐसे जहाज नौसेना की लंबी दूरी की तैनाती और समुद्री अभियानों की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) के बारे में
- भारत में जहाज निर्माण की लंबी यात्रा स्वतंत्रता-पूर्व वर्षों में महान उद्योगपति और दूरदर्शी सेठ वालचंद हीराचंद द्वारा वर्ष 1941 में सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड के नाम से पहले ग्रीन-फील्ड शिपयार्ड की स्थापना के साथ शुरू हुई, जिसे आज हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के नाम से जाना जाता है।
- हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी तट पर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रणनीतिक रूप से स्थित है।
- यह देश का प्रमुख जहाज निर्माण संगठन है, जो जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, पनडुब्बी निर्माण और नवीनीकरण, साथ ही जटिल और अत्याधुनिक अपतटीय और तटवर्ती संरचनाओं के डिजाइन और निर्माण की जरूरतों को पूरा करता है।
- प्रत्यक्ष समुद्री पहुंच, उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा, कुशल कार्यबल और वर्षों के अनुभव (202 जहाजों का निर्माण, 6 पनडुब्बियों का नवीनीकरण और 2042 जहाजों की मरम्मत) के साथ, एचएसएल रक्षा और समुद्री क्षेत्रों को विश्वसनीय सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है।