New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

भूतापीय ऊर्जा

चर्चा में क्यों? 

  • हाल ही में आइसलैंड के ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु मंत्री जोहान पॉल जोहानसन ने नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान द हिंदू को बताया कि आइसलैंड भारत के विकसित हो रहे भूतापीय ऊर्जा परिदृश्य में उभरते अवसरों को लेकर आश्वस्त है और आइसलैंड का मानना ​​है कि भूतापीय ऊर्जा के संदर्भ में नियामक चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है।

भूतापीय ऊर्जा के बारे में  

  • भूतापीय ऊर्जा एक स्थिर, कम कार्बन वाला और मौसम-स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत है। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को मजबूत करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए एक विशाल अप्रयुक्त संसाधन आधार रखता है। 

भूतापीय ऊर्जा की उत्पत्ति: 

  • पृथ्वी का आंतरिक भाग भूपर्पटी, मैंटल और कोर से बना है। पृथ्वी के भीतर तापमान 5,000–6,000°C तक पहुंच सकता है।
  • यह ऊष्मा मुख्यतः यूरेनियम, थोरियम और पोटेशियम के रेडियोधर्मी क्षय तथा पृथ्वी के निर्माण से बची अवशिष्ट ऊष्मा से प्राप्त होती है।
  • मैंटल में होने वाली संवहन धाराएं भूकंप, ज्वालामुखी और पर्वत निर्माण जैसी विवर्तनिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। भ्रंश और चट्टानों की दरारों से गर्म पानी व भाप सतह के निकट पहुंचकर भूमिगत जलाशय बनाते हैं।
  • पृथ्वी के भीतर मौजूद इस प्राकृतिक ऊष्मा का ऊर्जा उत्पादन में उपयोग भूतापीय ऊर्जा कहलाता है। 

भूतापीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन: 

  • भूतापीय बिजली संयंत्र गहरे कुओं के माध्यम से भूमिगत गर्म पानी और भाप को सतह पर लाते हैं। भाप टरबाइन को घुमाती है, जो जनरेटर के माध्यम से बिजली पैदा करता है। उपयोग के बाद पानी को फिर जलाशय में भेज दिया जाता है, जिससे संसाधन का निरंतर उपयोग संभव होता है।
  • भूतापीय ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन के साथ-साथ हीटिंग, कृषि, जलीय कृषि तथा भवनों को गर्म और ठंडा करने में भी किया जाता है। 

भारत का भू-तापीय संसाधन आधार  

  • भारत का विविध भूविज्ञान भू-तापीय विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने देश भर में 381 गर्म झरनों की मैपिंग की है और 10 भू-तापीय प्रांतों की पहचान की है। भारत की सैद्धांतिक भूतापीय ऊर्जा क्षमता लगभग 10.6 गीगावॉट इनमें से 42 स्थल बिजली उत्पादन के साथ-साथ प्रत्यक्ष ताप उपयोग के लिए विशेष रूप से संभावनाशील माने गए हैं। 
  • 10 भू-तापीय प्रांतों में हिमालयी भू-तापीय प्रांत, नागा-लुसाई, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सोन नर्मदा तापी (सोनाटा), पश्चिमी तट, कैम्बे ग्रैबेन, अरावली, महानदी, गोदावरी और दक्षिण भारतीय क्रेटनिक क्षेत्र शामिल हैं। 
  • भारत के भू-तापीय दरार बेसिन अनुकूल भूविज्ञान और विवर्तनिकी के कारण मजबूत गुंजाइश रखते हैं। लेकिन उपयुक्त परियोजनाएं कहीं भी उत्पन्न हो सकती हैं भू-तापीय संसाधन मौजूद हैं। वर्धित भू-तापीय प्रणाली (ईजीएस) और उन्नत भू-तापीय प्रणाली (एजीएस) जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां  अन्वेषण के अवसरों को और व्यापक बनाएंगी। 

भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति, 2025 

  • भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति का उद्देश्य भूतापीय ऊर्जा को एक प्रमुख नवीकरणीय स्तंभ के रूप में विकसित करना है। इसके तहत देश में उपलब्ध भूतापीय संसाधनों की व्यवस्थित खोज, मूल्यांकन और तैनाती को बढ़ावा दिया जाएगा। 
  • इस नीति में अनुसंधान, ड्रिलिंग, जलाशय प्रबंधन और प्रत्यक्ष ताप अनुप्रयोगों को प्राथमिकता दी गई है। यह हीटिंग और कूलिंग के लिए ग्राउंड सोर्स हीट पंप का भी समर्थन करता है। 
  • एक स्पष्ट नियामक ढांचा सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। यह नीति भू-तापीय उपयोग के लिए परित्यक्त तेल और गैस कुओं के पुन: उपयोग की सुविधा प्रदान करती है। इसके अलावा, राष्ट्रीय भूतापीय डेटा भंडार, पायलट परियोजनाओं और उत्कृष्टता केंद्रों के विकास का समर्थन किया जाएगा।   
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR