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गोट प्लेग

  • यूनान ‘गोट प्लेग’ (Goat Plague) के घातक प्रकोप से जूझ रहा है, जिसके कारण चरवाहों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
  • इस अत्यधिक संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए चरागाहों में भेड़ और बकरियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

गोट प्लेग के बारे में 

  • क्या है :  गोट प्लेग को पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (Peste des Petits Ruminants : PPR) के रूप में भी जाना जाता है। यह एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से भेड़ और बकरियों को प्रभावित करता है।
    • वर्ष 1942 में पहली बार PPR को पश्चिम अफ्रीका के कोटे डी आइवर में रिपोर्ट किया गया था।
  • कारक : मॉर्बिलीवायरस (Morbillivirus)। यह रिंडरपेस्ट वायरस (rinderpest virus) से संबंधित है।

क्या आप जानते हैं?

रिंडरपेस्ट को ‘मवेशी प्लेग’ के नाम से भी जाना जाता है। यह संक्रामक बीमारी खुर वाले जानवरों (मुख्यत: मवेशी और भैंस) को प्रभावित करती थी। वर्ष 2011 में आधिकारिक तौर पर इस बीमारी के उन्मूलन की घोषणा की गई थी। 

  • संक्रमण : PPR निकट संपर्क से फैलता है और बीमार पशुओं का शरीर से किसी प्रकार का स्राव व उत्सर्जन अन्य पशुओं में संक्रमण का मुख्य स्रोत है।
    • इससे संक्रमित होने वाले भेड़ और बकरियों में से 80 % से 100 % तक की मौत हो जाती है। 
    • हालाँकि, यह मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता है।
  • लक्षण : पशुओं में दिखने वाले गंभीर लक्षणों में बुखार, आंखों से स्राव और नाक पर पपड़ी बनना, खांसी, बदबूदार सांस एवं दस्त शामिल हैं।
  • उपचार : वर्तमान में इस रोग का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है किंतु वेरो सेल कल्चर में तैयार एक जीवित, कमजोर PPR वैक्सीन इससे 1 वर्ष तक की सुरक्षा प्रदान कर सकती है। 
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