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भारत के रेमिटेंस में वृद्धि 

(प्रारंभिक परीक्षा : आर्थिक और सामाजिक विकास- सतत् विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि)
 (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ 

हाल ही में, विश्व बैंक द्वारा जारी 'रेमिटेंस ब्रेव ग्लोबल हेडविंड्स' नामक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत को रिकॉर्ड 100 बिलियन डॉलर रेमिटेंस प्राप्त होने की संभावना है। यह पहली बार है जब कोई देश 100 बिलियन डॉलर के आँकड़े तक पहुँचेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में भारत ने 89.4 बिलियन डॉलर रेमिटेंस प्राप्त किया था।

क्या है रेमिटेंस

  • रेमिटेंस एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को प्रेषित की जाने वाली धनराशि है। वर्तमान में यह शब्द विदेश में काम करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा अपने परिवार को भेजे गए धन के लिये प्रयुक्त होता है।
  • भारत के लिये रेमिटेंस का सबसे बड़ा स्रोत ‘खाड़ी सहयोग परिषद्’ (GCC) के देशों (यूएई, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर, कुवैत) और अमेरिका एवं यूनाइटेड किंगडम में कार्य कर रहे भारतीय है।

रेमिटेंस की सामान्य प्रवृत्ति 

  • वर्ष 2022 में विश्व रेमिटेंस के 794 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है जो वर्ष 2021 में 781 बिलियन डॉलर था। 
  • इस वर्ष 794 बिलियन डॉलर में से 626 बिलियन डॉलर रेमिटेंस निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) को प्राप्त होगा। उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), आधिकारिक विकास सहायता (ODA) और पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह (PIF) की तुलना में इन देशों को प्राप्त रेमिटेंस बाहरी वित्त के एक बड़े स्रोत का प्रतिनिधित्व करता हैं। 
  • वर्ष 2022 में शीर्ष पाँच रेमिटेंस प्राप्तकर्ता देशों में भारत (100 बिलियन डॉलर), मेक्सिको (60 बिलियन डॉलर), चीन (50 बिलियन डॉलर), फिलीपींस (38 बिलियन डॉलर) और मिस्र (32 बिलियन डॉलर) के होने की अपेक्षा है। 

रिपोर्ट के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष 

  • विश्व बैंक की रिपोर्ट में प्रवासियों द्वारा की जाने वाली नौकरियों की प्रकृति में परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है जो भारत की रेमिटेंस अर्थव्यवस्था में एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। 
  • भारत के रेमिटेंस में हुई व्यापक वृद्धि के लिये भारतीय प्रवासियों के प्रमुख गंतव्यों में क्रमिक संरचनात्मक बदलाव एक प्रमुख कारण है। हालिया दौर में भारत के रेमिटेंस में उच्च आय वाले देशों जैसे अमेरिका, यू.के. और पूर्वी एशियाई देशों (सिंगापुर, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड) में उच्च-कुशल नौकरियों का योगदान बढ़ा है। जबकि इससे पूर्व खाड़ी देशों के कम कुशल एवं अनौपचारिक रोजगार रेमिटेंस के प्रमुख स्त्रोत होते थे। 
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016-17 और 2020-21 के बीच अमेरिका, यू.के. और सिंगापुर से रेमिटेंस 26% से बढ़कर 36% हो गया है जबकि जी.सी.सी. के पाँच देशों से प्राप्त रेमिटेंस 54% से गिरकर 28% हो गया है।
  • वर्ष 2020-21 में सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए 23% की हिस्सेदारी के साथ अमेरिका रेमिटेंस के लिये भारत के शीर्ष स्रोत देश के रूप में उभरा है।
  • रेमिटेंस में वृद्धि के लिये डॉलर की तुलना में रूपये के मूल्यह्रास की स्थिति को भी उत्तरदायी माना गया है। विदित है कि भारतीय रूपया जनवरी से सितंबर 2022 के बीच 10% तक गिर गया है।

भावी संभावनाएं

  • रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च आय वाले देशों में सकल घरेलू उत्पाद की धीमी वृद्धि के कारण प्रवासियों के वेतन लाभ में कमी के परिणामस्वरूप वर्ष 2023 में रेमिटेंस की वृद्धि में 2% गिरावट की संभावना है। 
  • दक्षिण एशिया के लिये रेमिटेंस की वृद्धि दर वर्ष 2022 में 3.5% से गिरकर वर्ष 2023 में 0.7% होने की अपेक्षा है।
  • अमेरिका में मंदी के साथ उच्च मुद्रास्फीति के कारण रेमिटेंस बहिर्वाह में कमी आएगी जबकि जी.सी.सी. देशों में भी मंदी के बाद रेमिटेंस बहिर्वाह में कमी दर्ज की जाएगी। 
  • यद्यपि अगले वर्ष में भारत में रेमिटेंस 4% बढ़ने का अनुमान है जो अमेरिका, यू.के. और पूर्वी एशिया में अपेक्षाकृत उच्च वेतन अर्जित करने वाले भारतीय प्रवासियों के बड़े हिस्से द्वारा समर्थित होगा।
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