भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III: अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण एवं सतत विकास
Keywords: भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा संक्रमण, 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता, जैव ईंधन, सौर ऊर्जा, नेट जीरो 2070

चर्चा में क्यों?

  • 3 नवंबर, 2026 को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency-IEA) ने नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन (Bharat Renewable Energy Summit) में भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026 (India Renewable Energy Market Report 2026) जारी की।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की स्थापित नवीकरणीय विद्युत क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई, जो पिछले एक दशक में लगभग चार गुना बढ़ी है।
  • भारत विश्व का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार और सौर फोटोवोल्टिक (Solar Photovoltaic-PV) मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बनकर उभरा है।

प्रमुख तथ्य

विवरण

जानकारी

रिपोर्ट

भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026

जारीकर्ता

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)

जारी करने की तिथि

3 नवंबर, 2026

विमोचन स्थल

भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में भारत का स्थान

दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता बाजार

सौर PV मॉड्यूल विनिर्माण

विश्व में दूसरा स्थान

नवीकरणीय विद्युत क्षमता (2026)

300 गीगावाट से अधिक

अनुमानित नवीकरणीय क्षमता (2030)

लगभग 530 गीगावाट

अनुमानित सौर PV क्षमता (2030)

350 गीगावाट से अधिक

अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता (2030)

लगभग 90 गीगावाट

अनुमानित जलविद्युत क्षमता (2030)

लगभग 75 गीगावाट

आयात लागत में बचत (2011–2025)

100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक

गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित विद्युत क्षमता का लक्ष्य

वर्ष 2025 में 50% का स्तर हासिल

गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता लक्ष्य (2030)

500 गीगावाट

शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य

वर्ष 2070

IEA रिपोर्ट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष

1. नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तीव्र वृद्धि

  • पिछले एक दशक में भारत की नवीकरणीय विद्युत क्षमता लगभग चार गुना बढ़कर वर्ष 2026 में 300 गीगावाट से अधिक हो गई।
  • सौर ऊर्जा भारत में नवीकरणीय विद्युत क्षमता के विस्तार का प्रमुख आधार बनकर उभरी है।
  • IEA के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की नवीकरणीय विद्युत क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुँच जाएगी।
  • पूर्वानुमान अवधि के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में होने वाली कुल वृद्धि में सौर फोटोवोल्टिक (Solar PV) की हिस्सेदारी 80% से अधिक रहने की संभावना है।

2. भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती

  • नवीकरणीय विद्युत के विस्तार से वर्ष 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत के कुल व्यय में 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत हुई।
  • यदि वर्ष 2010 के बाद सौर, पवन और जैव ऊर्जा क्षमता का विस्तार नहीं हुआ होता, तो वर्ष 2025 में भारत का कोयला आयात लगभग 11 करोड़ टन अधिक होता।
  • जैव ईंधन के उपयोग से वर्ष 2025 में कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता लगभग 4 प्रतिशत अंक कम हुई।
  • घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी व्यवधानों से उत्पन्न जोखिमों को कम करता है।

3. नवीकरणीय विद्युत उत्पादन में विस्तार

  • वर्ष 2025 में भारत का नवीकरणीय विद्युत उत्पादन 500 टेरावाट-घंटे (TWh) से अधिक हो गया, जो देश की कुल विद्युत आपूर्ति का लगभग 25% था।
  • वर्ष 2030 तक नवीकरणीय विद्युत उत्पादन लगभग 950 टेरावाट-घंटे तक पहुँचने की संभावना है।
  • वर्ष 2030 तक भारत की कुल विद्युत आपूर्ति में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 35% होने का अनुमान है।
  • वर्ष 2025 में सौर फोटोवोल्टिक ऊर्जा ने जलविद्युत को पीछे छोड़ते हुए भारत में नवीकरणीय विद्युत उत्पादन के सबसे बड़े स्रोत का स्थान प्राप्त किया।

4. भारत के सौर ऊर्जा विनिर्माण उद्योग का विस्तार

  • भारत सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है।
  • सितंबर 2026 में सौर PV मॉड्यूल की वार्षिक विनिर्माण क्षमता लगभग 225 गीगावाट तक पहुँच गई।
  • उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive-PLI) और घरेलू स्रोतों से सामग्री प्राप्त करने संबंधी आवश्यकताओं जैसी सरकारी नीतियों ने विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया है।
  • घरेलू विनिर्माण के विस्तार से वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और आयात निर्भरता कम करने के अवसर उत्पन्न हुए हैं।

5. नवीकरणीय ऊर्जा की प्रतिस्पर्धी लागत

  • प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रियाओं ने भारत में नवीकरणीय विद्युत की कीमतों को कम करने में योगदान दिया है।
  • भारत की बड़े पैमाने की सौर PV परियोजनाओं की विद्युत उत्पादन की समतलीकृत लागत (Levelised Cost of Electricity-LCOE) विश्व में दूसरी सबसे कम है, जिसका अनुमान 30–35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा है।
  • वर्ष 2025 में चालू की गई सौर PV परियोजनाओं की विद्युत दरें, कोयला आधारित विद्युत की औसत लागत से लगभग 40% कम थीं।
  • नवीकरणीय विद्युत की कम लागत ऊर्जा की वहनीयता बढ़ाने और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

6. हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विकास

  • भारत सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण जैसी प्रौद्योगिकियों को संयोजित करने वाली हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की खरीद में वैश्विक अग्रणी देश के रूप में उभरा है।
  • वर्ष 2025 में भारत ने 15 गीगावाट क्षमता की हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की नीलामी की, जिससे कुल नीलाम की गई क्षमता बढ़कर 64 गीगावाट हो गई।
  • हाइब्रिड परियोजनाएँ विद्युत उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने और पारेषण अवसंरचना के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकती हैं।
  • इन परियोजनाओं का विस्तार भारत के विद्युत ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देता है।

7. जैव ईंधन और स्वच्छ परिवहन का विस्तार

  • वर्ष 2020 से 2025 के बीच भारत में तरल जैव ईंधन (Liquid Biofuels) का उत्पादन छह गुना बढ़ा।
  • वर्ष 2025 में तरल जैव ईंधन की खपत लगभग 11 अरब लीटर रही, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर 16 अरब लीटर होने का अनुमान है।
  • भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा तरल जैव ईंधन बाजार बन गया है।
  • वर्ष 2026 में नए वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 11% से अधिक रही, जो परिवहन क्षेत्र में बढ़ते विद्युतीकरण को दर्शाती है।

8. नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य और भविष्य की संभावनाएँ

  • भारत ने वर्ष 2025 में स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की 50% हिस्सेदारी हासिल कर ली, जो वर्ष 2030 के निर्धारित लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले है।
  • IEA के अनुसार, भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
  • इस प्रगति को बनाए रखने के लिए अधिक मजबूत विद्युत ग्रिड, अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण क्षमता और बेहतर विद्युत वितरण अवसंरचना की आवश्यकता होगी।
  • अवसंरचनात्मक और नियामकीय चुनौतियों का समाधान करने से वर्ष 2026–2030 के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार में 20% से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि संभव हो सकती है।

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का परिदृश्य: 2025–2030

संकेतक

2025–2026

2030 का अनुमान

नवीकरणीय विद्युत क्षमता

300 गीगावाट से अधिक (2026)

लगभग 530 गीगावाट

सौर PV क्षमता

—

350 गीगावाट से अधिक

पवन ऊर्जा क्षमता

—

लगभग 90 गीगावाट

जलविद्युत क्षमता

—

लगभग 75 गीगावाट

नवीकरणीय विद्युत उत्पादन

500 TWh से अधिक (2025)

लगभग 950 TWh

कुल विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी

लगभग 25% (2025)

लगभग 35%

तरल जैव ईंधन की खपत

11 अरब लीटर (2025)

16 अरब लीटर

स्रोत: IEA, 2026। डैश (—) दर्शाता है कि रिपोर्ट के सारांश में संबंधित आधार वर्ष का आँकड़ा निर्दिष्ट नहीं किया गया है।

भारत के लिए महत्त्व

1. ऊर्जा सुरक्षा

  • नवीकरणीय ऊर्जा आयातित कोयले, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम आधारित ईंधनों पर निर्भरता को कम करती है।
  • घरेलू स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन भू-राजनीतिक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संबंधी व्यवधानों का सामना करने की भारत की क्षमता को मजबूत कर सकता है।

2. आर्थिक विकास

  • नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार विनिर्माण, विद्युत अवसंरचना और संबंधित सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करता है।
  • प्रतिस्पर्धी नवीकरणीय विद्युत लागत दीर्घकाल में भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर सकती है।

3. जलवायु परिवर्तन का शमन

  • नवीकरणीय विद्युत उत्पादन में वृद्धि कार्बन-सघन ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायक है।
  • यह भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित जलवायु प्रतिबद्धताओं (Nationally Determined Contributions-NDCs) और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य का समर्थन करती है।

4. वैश्विक ऊर्जा नेतृत्व

  • एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा बाजार के रूप में भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में उसके महत्त्व को बढ़ाती है।
  • सौर और पवन ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण का विस्तार वैश्विक स्वच्छ प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।

5. रोजगार और ग्रामीण विकास

  • नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ विनिर्माण, स्थापना, संचालन और रखरखाव के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।
  • रूफटॉप सोलर और कृषि क्षेत्र के सौरीकरण से संबंधित कार्यक्रम ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण विकास को समर्थन देने में सहायक हो सकते हैं।

चुनौतियाँ

  • ग्रिड अवसंरचना: नवीकरणीय ऊर्जा के तीव्र विस्तार के लिए विद्युत पारेषण नेटवर्क और वितरण प्रणालियों में बड़े पैमाने पर निवेश आवश्यक है।
  • ऊर्जा भंडारण: सौर और पवन ऊर्जा के अनियमित उत्पादन के कारण बैटरी, पंप्ड स्टोरेज तथा अन्य लचीले ऊर्जा प्रबंधन समाधानों की आवश्यकता होती है।
  • वित्तीय बाधाएँ: विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कमजोर वित्तीय स्थिति निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
  • भूमि अधिग्रहण: भूमि की उपलब्धता, पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को प्रभावित करती हैं।
  • आपूर्ति शृंखला पर निर्भरता: सौर विनिर्माण से संबंधित कुछ प्रारंभिक उत्पादन घटकों के लिए भारत अभी भी सीमित देशों में केंद्रित वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भर है।
  • विद्युत प्रणाली में एकीकरण: सौर और पवन जैसे परिवर्तनीय नवीकरणीय स्रोतों से विद्युत उत्पादन बढ़ने के कारण बेहतर पूर्वानुमान, विद्युत प्रेषण और ग्रिड प्रबंधन की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • विद्युत ग्रिड का आधुनिकीकरण: विद्युत पारेषण अवसंरचना और हरित ऊर्जा गलियारों (Green Energy Corridors) के विस्तार में तेजी लाई जानी चाहिए।
  • ऊर्जा भंडारण क्षमता का विस्तार: बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Battery Energy Storage Systems-BESS) और पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • घरेलू विनिर्माण को मजबूती: सौर सेल, वेफर और अन्य रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा घटकों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • DISCOMs की वित्तीय स्थिति में सुधार: विश्वसनीय विद्युत वितरण और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय एवं परिचालन सुधार लागू किए जाने चाहिए।
  • विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को समर्थन: रूफटॉप सोलर, कृषि सौरीकरण और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों का विस्तार किया जाना चाहिए।
  • स्वच्छ ईंधन विकास में तेजी: सतत जैव ईंधन, संपीडित बायोगैस (Compressed Biogas-CBG) और हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। IEA की भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत ईंधन आयात पर उल्लेखनीय बचत करते हुए तथा घरेलू विनिर्माण का विस्तार करते हुए एक प्रमुख वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार के रूप में उभरा है। हालाँकि, इस प्रगति को बनाए रखने के लिए विद्युत ग्रिड का आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण क्षमता का विस्तार, वित्तीय सुधार और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक होगा। इन क्षेत्रों को मजबूत करना भारत के वर्ष 2030 के ऊर्जा लक्ष्यों और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को प्राप्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. भारत विश्व का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है।
  2. वर्ष 2026 में भारत की नवीकरणीय विद्युत क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई।
  3. वर्ष 2030 तक भारत की नवीकरणीय विद्युत क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को मजबूत करने में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार की भूमिका का परीक्षण कीजिए। वर्ष 2030 तक भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रमुख चुनौतियों की चर्चा कीजिए।

FAQs

प्रश्न 1. भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026 क्या है?

यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा 3 नवंबर, 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट है, जिसमें भारत की नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित लाभ, विनिर्माण विस्तार और वर्ष 2030 तक की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है।

प्रश्न 2. वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में भारत की क्या स्थिति है?

IEA के अनुसार, भारत विश्व का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार और सौर PV मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता है।

प्रश्न 3. वर्ष 2026 में भारत ने कितनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल की?

वर्ष 2026 में भारत की स्थापित नवीकरणीय विद्युत क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई।

प्रश्न 4. वर्ष 2030 तक भारत की अनुमानित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कितनी होगी?

IEA के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की स्थापित नवीकरणीय विद्युत क्षमता लगभग 530 गीगावाट होने का अनुमान है, जिसमें 350 गीगावाट से अधिक सौर PV क्षमता शामिल होगी।

प्रश्न 5. भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य क्या है?

भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT