संदर्भ
- स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पर्मेलिन की वर्ष 2026 में नई दिल्ली की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा उत्पादन, सैन्य आदान-प्रदान तथा असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी और युवा पेशेवरों के प्रशिक्षण तथा आदान-प्रदान से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- यह यात्रा भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर हुई।
भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय संबंधों का ऐतिहासिक आधार
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच 14 अगस्त 1948 को राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। दोनों देशों के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संवाद और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर आधारित हैं।
समय के साथ इस साझेदारी का विस्तार व्यापार, वित्तीय पारदर्शिता, शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी तक हुआ है। स्विट्जरलैंड की उन्नत इंजीनियरिंग, विनिर्माण विशेषज्ञता और पूंजी को भारत के बड़े बाजार, कुशल कार्यबल तथा तकनीकी क्षमताओं के साथ जोड़ना इस साझेदारी का प्रमुख आधार है।
भारत-स्विट्जरलैंड व्यापार और निवेश
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच वस्तुओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 23.35 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यापार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- स्विट्जरलैंड से भारत को होने वाले निर्यात में सोना, बहुमूल्य धातुएं, मशीनरी, औषधियां, रसायन, घड़ियां और सटीक इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। वहीं, भारत से स्विट्जरलैंड को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में कार्बनिक रसायन, औषधियां, वस्त्र, परिधान, आभूषण और औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं।
- अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक स्विट्जरलैंड से भारत में लगभग 10.748 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। भारत में 330 से अधिक स्विस कंपनियां कार्यरत रही हैं, जो औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान देती हैं। एबीबी, शिंडलर और नेस्ले जैसी कंपनियों की भारत में महत्वपूर्ण उपस्थिति है।
भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते का महत्व
- भारत और ईएफटीए के सदस्य देशों - स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड तथा लिकटेंस्टाइन के बीच व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते पर 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ।
- इसके तहत ईएफटीए देशों ने 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की दिशा में प्रयास करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह प्रतिबद्धता पूरे ईएफटीए समूह की है, केवल स्विट्जरलैंड की नहीं।
- इस समझौते से भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने की संभावनाएं हैं। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक विनिर्माण, जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
वर्ष 2026 की बैठक के प्रमुख परिणाम
रक्षा उत्पादन और परमाणु ऊर्जा
प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी
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दोनों देशों ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान और रोजगार के क्षेत्र में लोगों की वैध आवाजाही को सुगम बनाना है। इसके अंतर्गत अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेजों की जालसाजी से निपटने के लिए सहयोग को भी महत्व दिया गया है।
युवा पेशेवरों का आदान-प्रदान
वैज्ञानिक अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- बैठक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
- भारत ने फरवरी 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जबकि स्विट्जरलैंड वर्ष 2027 में जिनेवा में एआई शिखर सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहा है। इन पहलों के माध्यम से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख चुनौतियां
- भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक सहयोग की व्यापक संभावनाओं के बावजूद कुछ मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते पर वार्ता, बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मतभेद और औषधि क्षेत्र में पेटेंट संरक्षण के प्रश्न शामिल हैं।
- निवेश संरक्षण से संबंधित नियमों पर सहमति बनने से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। वहीं, औषधि क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकारों और सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता के बीच संतुलन स्थापित करना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
- भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा, परमाणु ऊर्जा, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कुशल पेशेवरों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में विस्तार की दिशा में हैं। प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी तथा युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान से संबंधित समझौते दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।
- वहीं, भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता निवेश, रोजगार और बाजार पहुंच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। निवेश संरक्षण और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दों पर प्रगति के साथ दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।