संदर्भ
हाल ही में भारत सरकार ने अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में प्रयोग होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों की सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने के लिए भारत का बायोविजिलेंस कार्यक्रम (Biovigilance Programme of India) मंजूर किया है।
बायोविजिलेंस कार्यक्रम के बारे में
- यह एक राष्ट्रीय रोगी-सुरक्षा निगरानी कार्यक्रम है।
- इसका उद्देश्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाली दवाओं तथा जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिकूल घटनाओं (Adverse Events) की व्यवस्थित रिपोर्टिंग, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम करना है।
संचालन संस्था:
- इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (Indian Pharmacopoeia Commission—IPC)
उद्देश्य:
- इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की पहचान, उनका मूल्यांकन और रोकथाम करना है।
- इससे अंग और ऊतक दाता तथा प्राप्तकर्ता, दोनों की सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
प्रमुख विशेषताएं:
- प्रत्यारोपण सुरक्षा की निगरानी: कार्यक्रम अंग और ऊतक प्रत्यारोपण के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की व्यवस्थित निगरानी करेगा। इससे सुरक्षा संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उचित कदम उठाए जा सकेंगे।
- दाता और प्राप्तकर्ता दोनों शामिल: कार्यक्रम में दाताओं और प्राप्तकर्ताओं, दोनों को दिए जाने वाले जैविक उत्पादों को शामिल किया गया है। इससे प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा निगरानी का दायरा बढ़ेगा।
- आईपीसी के नेतृत्व में निगरानी: इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) देशभर में प्रत्यारोपण से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम के काम का समन्वय करेगा।
- एकीकृत निगरानी व्यवस्था: यह कार्यक्रम पहले से चल रहे फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) और मेडिकल डिवाइस विजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI) का पूरक होगा। जहां PvPI दवाओं से जुड़ी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी करता है, वहीं MvPI चिकित्सा उपकरणों से संबंधित घटनाओं पर नजर रखता है। बायोविजिलेंस कार्यक्रम इनके साथ मिलकर रोगी-सुरक्षा की एक व्यापक और परस्पर जुड़ी निगरानी व्यवस्था तैयार करेगा।
- सुरक्षा संबंधी आंकड़ों को मजबूत करना: यह कार्यक्रम देश में प्रतिकूल घटनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र करने, उनका विश्लेषण करने और उनसे वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करने की घरेलू क्षमता को मजबूत करेगा। इससे सुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं और नियामकीय फैसलों में मदद मिलेगी।
महत्व:
- प्रतिकूल घटनाओं की समय रहते पहचान और मूल्यांकन से तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इससे अंग और ऊतक प्रत्यारोपण कराने वाले दाताओं और प्राप्तकर्ताओं के लिए संभावित जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।
- यह पहल फार्माकोविजिलेंस (औषधि सुरक्षा निगरानी) और बायोविजिलेंस (जैविक उत्पादों की सुरक्षा निगरानी) को एक व्यापक ढांचे में जोड़ती है। इसके माध्यम से दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण से जुड़े जैविक उत्पादों की सुरक्षा पर अधिक समन्वित तरीके से नजर रखी जा सकेगी।
- कुल मिलाकर, भारत का बायोविजिलेंस कार्यक्रम अंग और ऊतक प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी जोखिमों की पहचान और प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।