भारत का पहला पारिस्थितिकी तंत्र रेड लिस्ट मूल्यांकन
संदर्भ
केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (KSBB) ने जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक पुनर्बहाली और जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत का पहला राज्य-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र रेड लिस्ट आकलन (Red List of Ecosystems-RLE) शुरू किया है। यह पहल पारिस्थितिकी तंत्रों के विनाश के जोखिम का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।
प्रमुख बिंदु
राज्य:केरलम
संबंधित संस्था:केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड (KSBB)
अवधि:एक वर्ष
भौगोलिक कवरेज: केरल के सभी 14 जिले
वैज्ञानिक रूपरेखा: प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की Red List of Ecosystems रूपरेखा।
आरएलई के बारे में
आरएलई एक वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रणाली है, जिसके अंतर्गत अलग-अलग प्रजातियों के विलुप्त होने के बजाय संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश (Ecosystem Collapse) के जोखिम का आकलन किया जाता है।
इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण, आवास विखंडन और पर्यावरणीय परिवर्तनों से उत्पन्न खतरों की पहचान करना है।
प्रमुख विशेषताएँ:
व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आकलन: इसके अंतर्गतवनों, आर्द्रभूमियों, नदी बेसिनों, उच्च पर्वतीय घास के मैदानों और तटीय आवासों का मूल्यांकन किया जाएगा।
आईयूसीएन के पाँच मानदंड:पारिस्थितिकी तंत्र के जोखिम का आकलन करने के लिए आवास के वितरण में कमी, भौगोलिक विस्तार में सीमितता, पर्यावरणीय दशाओं का क्षरण, जैविक प्रक्रियाओं में व्यवधान और विनाश की मात्रात्मक संभावना जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
संकटग्रस्त आवासों की पहचान: उष्णकटिबंधीय नदी-तटीय सदाबहार वनों के क्षेत्रफल में पिछली एक शताब्दी के दौरान लगभग 83% की कमी का उल्लेख इस पहल के महत्त्व को दर्शाता है।
प्रमुख परिणाम:इस पहल के अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र जोखिम रजिस्टर, पारिस्थितिकी तंत्र प्रकारिकी एटलस और पारिस्थितिक पुनर्बहाली प्राथमिकता मानचित्र विकसित किए जाएँगे।
विकेंद्रीकृत संरक्षण:जोखिम मानचित्रों को राज्य की नियोजन प्रक्रिया से जोड़कर पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
महत्त्व:
जैव विविधता और पारिस्थितिक संपर्कता का संरक्षण।
क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों की वैज्ञानिक आधार पर पुनर्बहाली।
प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से बाढ़, भूस्खलन और तटीय जोखिमों को कम करने में सहायता।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति पारिस्थितिकी तंत्र की अनुकूलन क्षमता में वृद्धि।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यावरणीय शासन को मजबूत करना।