जस्टिस विनोद चंद्रन बने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे विनोद चंद्रन को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई।
विनोद चंद्रन के शपथ ग्रहण के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 हो गई है।
चीफ जस्टिस समेत कुल जजों के लिए स्वीकृत पद 34 हैं,और अभी एक पद खाली है।
कॉलेजियम ने क्या दी दलील?
कॉलेजियम में शामिल:
जस्टिस बी. आर. गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस अभय ओका
कॉलेजियम ने क्या उल्लेख किया?
उल्लेख किया था कि जस्टिस चंद्रन हाई कोर्ट के जजों की वरिष्ठता सूची में 13वें स्थान पर हैं।
प्रस्ताव के अनुसार,केरल हाई कोर्ट से आने वाले जजों की वरिष्ठता की सूची में जस्टिस के. विनोद चंद्रन क्रम संख्या एक पर हैं।
उनके नाम की सिफारिश करते समय, कॉलेजियम ने इस तथ्य को ध्यान में रखा है कि केरल हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट की बेंच में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
जस्टिस विनोद चंद्रन
इनको 8 नवंबर 2011 को केरल हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।
जस्टिस चंद्रन को 29 मार्च, 2023 को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था।
12 वर्ष से ज्यादा हाई कोर्ट के जज के रूप में किया काम
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य जजों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से सम्बंधित कई विवादों के बाद अब मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होती है।
उच्चतम न्यायालय में अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के 4 अन्य वरिष्ठतम जजों से परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजता है।
यदि 5 में से 2 न्यायाधीश किसी व्यक्ति की नियुक्ति का विरोध करें तो उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को नहीं भेजी जाएगी।
सभी न्यायाधीशों की सलाह लिखित रूप में होनी चाहिये, मौखिक नहीं।
प्रश्न: हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने किसे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर शपथ दिलाई?