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एआई के साथ भारत की यात्रा

(प्रारंभिक परीक्षा: सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स)

संदर्भ 

  • भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित एक नए युग की कगार पर खड़ा है। एआई अब केवल शोध प्रयोगशालाओं या बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह हर स्तर पर नागरिकों तक पहुँच रहा है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को बेहतर बनाने से लेकर किसानों को फसल के बारे में पूरी जानकारी के साथ निर्णय लेने में मदद करने तक एआई दैनिक जीवन को सरल, स्मार्ट व कनेक्‍टेड बना रहा है। 
  • यह व्यक्तिगत शिक्षा के माध्यम से कक्षाओं में क्रांति ला रहा है, शहरों को साफ और सुरक्षित बना रहा है तथा तेज व डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना रहा है।
  • इंडियाएआई मिशन और एआई उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहलें इस परिवर्तन के केंद्र में हैं। ये कंप्यूटिंग पॉवर तक पहुँच का विस्तार कर रही हैं, अनुसंधान का समर्थन कर रही हैं और स्टार्टअप्स तथा संस्थानों को ऐसे समाधान तैयार करने में मदद कर रही हैं, जिनसे लोगों को सीधे लाभ पहुँचे। 
  • भारत का दृष्टिकोण एआई को खुला, किफायती और सुलभ बनाने पर केंद्रित है। वस्तुतः यह समावेशी दृष्टिकोण नीति आयोग की रिपोर्ट ‘समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई’ (अक्तूबर 2025) में भी परिलक्षित होता है।
  • रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एआई भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कौशल विकास एवं वित्तीय समावेशन तक पहुँच प्रदान करके सशक्त बना सकता है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि प्रौद्योगिकी गहरी सामाजिक और आर्थिक खाइयों को पाट सकती है।

क्या है कृत्रिम बुद्धिमत्ता 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वह क्षमता है जो मशीनों को ऐसे कार्य करने में सक्षम बनाती है जिनके लिए सामान्यतः मानव बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है। 
  • यह सिस्‍टम्‍स को अनुभव से सीखने, नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने एवं जटिल समस्याओं को स्वतंत्र रूप से हल करने में सक्षम बनाती है। 
  • एआई डेटा सेट, एल्गोरिदम व बड़े भाषा मॉडल का उपयोग करके जानकारी का विश्लेषण करता है, पैटर्न पहचानता है और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करता है। समय के साथ ये सिस्‍टम्‍स अपनी प्रदर्शन क्षमता में सुधार करती हैं जिससे वे मनुष्‍यों के समान तर्क कर सकें, निर्णय ले सकें तथा संवाद कर सकें। 

वर्तमान में भारत में एआई इकोसिस्टम

  • भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, इस वर्ष इसके वार्षिक राजस्व के 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।
  • देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं। भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप्स में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया।
  • नैसकॉम (NASSCOM) एआई एडॉप्‍शन इंडैक्‍स पर भारत ने 4 में से 2.45 अंक प्राप्त किए हैं जिससे पता चलता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधान का उपयोग कर रहे हैं।
  • एआई अपनाने में अग्रणी क्षेत्र औद्योगिक एवं ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएँ व खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ तथा बीमा और स्वास्थ्य सेवा हैं। ये मिलकर एआई के कुल मूल्य का लगभग 60% का योगदान करते हैं।
  • हाल ही में किए गए एक बी.सी.जी. सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर एआई परिपक्वता हासिल कर ली है।

भारत एआई-प्रतिस्पर्धी देशों में तीसरे स्थान पर 

  • स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रतिस्पर्धात्मकता में वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग वैश्विक एआई परिदृश्य में भारत के तेज़ विकास को उजागर करती है। 
  • रिपोर्ट 2017 से 2024 तक एआई विकास और नवाचार को मापती है। यह हालिया उपलब्धि भारत की तेजी से बढ़ती एआई प्रतिभा, मजबूत अनुसंधान क्षमताओं, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम, निवेश और आर्थिक प्रभाव, अवसंरचना तथा नीति व शासन को रेखांकित करती है।
  • वस्तुतः जैसे-जैसे भारत एक समावेशी एआई इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है, इसकी बढ़ती वैश्विक मान्यता इस प्रगति को दर्शाती है। स्टैनफोर्ड एआई सूचकांक जैसी रैंकिंग भारत को एआई कौशल, क्षमताओं एवं नीतियों में शीर्ष चार देशों में स्थान देती है। 
  • देश गिटहब पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है जो इसके डेवलपर समुदाय की ताकत को उजागर करता है। 
  • एक मजबूत STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, गणित) कार्यबल, विस्तृत अनुसंधान इकोसिस्टम और बढ़ती डिजिटल अवसंरचना के साथ भारत आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दीर्घकालिक विज़न को साकार करने के लिए एआई का उपयोग करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। 

इंडिया एआई मिशन 2024

  • ‘भारत में एआई बनाना और एआई को भारत के लिए कारग़र बनाना’ के विज़न से प्रेरित होकर कैबिनेट ने मार्च 2024 में इंडियाएआई मिशन को मंजूरी दी, जिसका पांच वर्षों के लिए बजट 10,371.92 करोड़ है। 
  • यह मिशन भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
  • अपने लॉन्च से ही इस मिशन ने देश की कंप्यूटिंग अवसंरचना के विस्तार में मजबूत प्रगति की है। 10,000 जी.पी.यू. के प्रारंभिक लक्ष्य से भारत ने अब 38,000 जी.पी.यू. हासिल कर लिए हैं जो विश्व-स्तरीय एआई संसाधनों तक किफायती पहुँच प्रदान करते हैं। 

ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट

ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) एक शक्तिशाली कंप्यूटर चिप है जो मशीनों को तेज़ी से सोचने, छवियों को संसाधित करने, एआई प्रोग्राम चलाने और जटिल कार्यों को सामान्य प्रोसेसर की तुलना में अधिक कुशलता से संभालने में मदद करती है।

इंडियाएआई मिशन के सात स्तंभ

  1. इंडियाएआई कंप्यूट स्तंभ : यह स्तंभ किफायती लागतों पर उच्च-स्तरीय जी.पी.यू. उपलब्‍ध कराता है। 38,000 से अधिक जी.पी.यू. शामिल किए गए हैं। ये जी.पी.यू. केवल 65 प्रति घंटा की सब्सिडी दर पर उपलब्ध हैं।
  2. इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट पहल: यह स्तंभ विशिष्ट रूप से भारत की चुनौतियों के लिए एआई एप्‍लीकेशन विकसित करता है। इसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, शासन एवं सहायक शिक्षण प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं। 
  3. एआईकोश (डेटासेट प्लेटफ़ॉर्म) : एआईकोश एआई मॉडल्स के प्रशिक्षण के लिए बड़े डेटासेट विकसित करता है। यह सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटा एकीकृत करता है। इस प्लेटफ़ॉर्म में 20 क्षेत्रों में 5,500 से अधिक डेटासेट और 251 एआई मॉडल्स हैं। 
  4. इंडियाएआई फाउंडेशन मॉडल्स
    • यह स्तंभ भारतीय डेटा और भाषाओं का उपयोग करके भारत के अपने बड़े मल्टीमॉडल मॉडल्स विकसित करता है। 
    • यह जनरेटिव एआई में संप्रभु क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करता है। इंडियाएआई को 500 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए। पहले और दूसरे चरण में बारह स्टार्टअप्स को चुना गया: सर्वम् एआई, सॉकेट एआई, ज्ञानी एआई, गण एआई, अवतार एआई, आईआईटी बॉम्बे कंसोर्टियम – भारतजेन, ज़ेंटीक (Zenteiq), जेन लूप, इंटेलिहेल्थ, शोध एआई, फ्रैक्टल एनालिटिक्स, टेक महिंद्रा मेकर्स लैब।
  5. इंडियाएआई फ़्यूचर स्किल्‍स
    • यह स्तंभ एआई-कुशल पेशेवर तैयार करता है। 500 पीएचडी फेलो, 5,000 स्‍नात्‍कोत्‍तर और 8,000 स्‍नातकों को समर्थन प्रदान किया जाता है। जुलाई 2025 तक 200 से अधिक छात्रों को फेलोशिप मिली। 73 संस्थान पीएचडी छात्रों को शामिल कर रहे हैं। टियर 2 और टियर 3 शहरों में डेटा और एआई लैब्स स्थापित की जा रही हैं। 31 लैब NIELIT और उद्योग साझेदारों के साथ लॉन्च की गई हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लैब के लिए 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक को नामित किया है।
  6. इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण : यह स्तंभ एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इंडियाएआई स्टार्टअप्स ग्लोबल प्रोग्राम मार्च 2025 में लॉन्च किया गया। यह 10 भारतीय स्टार्टअप्स को स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस के सहयोग से यूरोपीय बाजार तक विस्‍तृत करने में मदद करता है।
  7. सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई
    • यह स्तंभ मजबूत शासन के साथ जिम्मेदार एआई एडॉप्‍शन सुनिश्चित करता है। रुचि पत्र (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) के माध्यम से 13 परियोजनाओं का चुनाव एवं शुरुआत किया गया है। ये मशीन अनलर्निंग, पूर्वाग्रह शमन, निजता-संरक्षित मशन लर्निंग, व्याख्यात्मकता, ऑडिटिंग एवं शासन परीक्षण पर केंद्रित हैं। 9 मई, 2025 को साझेदार संस्थानों को इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान में शामिल होने के लिए एक अतिरिक्त रुचि पत्र प्रकाशित किया गया। 

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में एआई

  • 9वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मुख्य स्थान रहा। दूरसंचार विभाग और सी.ओ.ए.आई. द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम 8 से 11 अक्तूबर तक ‘इनोवेट टू ट्रांसफॉर्म’ थीम के तहत आयोजित किया गया।
  • आई.एम.सी. 2025 में छह प्रमुख वैश्विक सम्मेलन शामिल हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन भी शामिल है, जिसने नेटवर्क, सेवाओं एवं अगली पीढ़ी की डिजिटल अवसंरचना में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका को उजागर किया। एआई, 5G, 6G, स्मार्ट मोबिलिटी, साइबरसुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग एवं हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) में 1,600 से अधिक नए उपयोग-मामले 100+ सत्रों और 800+ वक्ताओं के माध्यम से प्रदर्शित किए गए।

अन्य प्रमुख सरकारी पहलें और नीतिगत प्रोत्साहन

  • एआई उत्कृष्टता केंद्र : अनुसंधान-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य सेवा, कृषि एवं टिकाऊ शहरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तीन उत्कृष्टता केंद्र (CoEs) स्थापित किए हैं। शिक्षा के लिए चौथा उत्‍कृष्‍टता केंद्र बजट 2025 में घोषित किया गया। 
  • एआई दक्षता ढांचा : यह ढांचा सरकारी अधिकारियों के लिए संरचित प्रशिक्षण प्रदान करता है जिससे वे आवश्यक एआई कौशल प्राप्त कर सकें और उन्हें नीति-निर्माण एवं शासन में लागू कर सकें। 
  • सर्वम् एआई: स्मार्टर आधार सेवाएँ : बेंगलुरु स्थित कंपनी ‘सर्वम् एआई’ उन्नत एआई अनुसंधान को व्यावहारिक शासन समाधानों में परिवर्तित कर रही है। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के साथ साझेदारी में यह जनरेटिव एआई का उपयोग करके आधार सेवाओं को अधिक स्मार्ट एवं सुरक्षित बना रही है। 
  • भाषिणी: डिजिटल समावेशन के लिए आवाज़ : भाषिणी एक एआई-संचालित प्लेटफ़ॉर्म है जो कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद एवं संभाषण उपकरण प्रदान करके भाषा की बाधाओं को तोड़ता है। 
    • जून 2025 में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन और रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ने सार्वजनिक रेलवे प्लेटफ़ॉर्म्स पर बहुभाषी एआई समाधान तैनात करने के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए।
  • भारत का बहुभाषी एआई मॉडल ‘भारतजेन एआई’ : 2 जून, 2025 को भारतजेन समिट में लॉन्च किया गया ‘भारतजेन एआई’ पहला सरकार द्वारा वित्तपोषित व देशज मल्टीमॉडल बड़ा भाषा मॉडल है। यह 22 भारतीय भाषाओं को समर्थन करता है और टेक्स्ट, संभाषण एवं छवि की समझ को एकीकृत करता है।
  • इंडिया एआई इम्‍पैक्‍ट समिट 2026 : भारत फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी करेगा। इस समिट में भारत की एआई क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा और विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। 

प्रमुख पहलें 

  • एआई पिच फेस्ट (उड़ान- UDAAN): दुनिया भर के एआई स्टार्टअप्स के लिए एक मंच है जिसमें महिला नेताओं और दिव्‍यांग परिवर्तनकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • अनुसंधान संगोष्ठी: नवीनतम एआई अनुसंधान को प्रदर्शित करने और भारत, ग्लोबल साउथ व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रमुख शोधकर्ताओं को उनके कार्य प्रस्तुत करने, विधियाँ तथा साक्ष्य साझा करने एवं सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक सभा है। 
  • एआई एक्सपो: यह एक्सपो जिम्मेदार बुद्धिमत्ता पर केंद्रित होगा और इसमें भारत तथा 30+ देशों के 300+ प्रदर्शक शामिल होंगे।

दैनिक जीवन में एआई 

  • स्वास्थ्य सेवा : यह चिकित्‍सकों को बीमारियों का जल्दी पता लगाने, चिकित्सा स्कैन का विश्लेषण करने और व्यक्तिगत उपचार की सिफारिश करने में मदद करता है। एआई-संचालित टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ते हैं जिससे समय एवं लागत बचती है और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होती है। 
  • कृषि : यह मौसम की भविष्यवाणी करता है, कीट हमलों का पता लगाता है और सिंचाई व बुआई के लिए उपयुक्त समय सुझाता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय एआई का उपयोग किसान ई-मित्र जैसी पहलों के माध्यम से कर रहा है। 
  • शिक्षा एवं कौशल विकास : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा VI से 15 घंटे का एआई कौशल मॉड्यूल और कक्षा IX से XII तक वैकल्पिक एआई विषय प्रदान करता है। 
  • दीक्षा प्लेटफ़ॉर्म : एन.सी.ई.आर.टी. का दीक्षा डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म एआई उपकरणों का उपयोग करता है, जैसे- वीडियो में कीवर्ड सर्च और रीड-अलाउड फीचर्स, जिससे एआई की पहुँच (एक्‍सेस) बढ़ती है, विशेष रूप से दृष्टिबाधित शिक्षार्थियों के लिए। 
  • YUVA AI for ALL : इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) ने अपने साझेदारों के सहयोग से युवाओं के लिए उन्नति व विकास एआई को लागू किया। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को समावेशी ढंग से एआई और सामाजिक कौशल से सशक्त बनाना है। 

शासन और न्याय प्रदायगी

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, ई-कोर्ट्स परियोजना चरण III के तहत न्याय प्रणाली को अधिक कुशल एवं सुलभ बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया जा रहा है। 
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता व इसके उपसर्ग, जैसे- मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्‍नीशन एवं नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का उपयोग अनुवाद, पूर्वानुमान, प्रशासनिक दक्षता, स्वचालित फाइलिंग, इंटेलीजेंट शेड्यूलिंग और चैटबॉट्स के माध्यम से संचार में किया जा रहा है। 
  • उच्च न्यायालयों में एआई अनुवाद समितियाँ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णयों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने की निगरानी कर रही हैं। ई-एचसीआर एवं ई-आईएलआर जैसे डिजिटल कानूनी प्लेटफ़ॉर्म अब नागरिकों को कई क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन निर्णयों तक पहुँच प्रदान करते हैं जिससे न्याय प्रदाय अधिक पारदर्शी व समावेशी बनता है।

मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सेवाएँ

  • भारतीय मौसम विभाग एआई-आधारित मॉडल्स का उपयोग वर्षा, धुंध, बिजली एवं आग का पूर्वानुमान लगाने के लिए करता है।
  • एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करती है जबकि मौसमजीपीटी (एक आगामी एआई चैटबॉट) किसानों तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मौसम तथा जलवायु से संबंधित रिअल-टाइम सलाह प्रदान करेगा। 

प्रस्तावित कार्यान्वयन रोडमैप

  • चरण 1 (2025–2026): मिशन अभिमुखीकरण- मिशन चार्टर का प्रारूपण, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमाएँ और मापनीय परिणाम निर्धारित किए जाएँगे। प्राथमिकताओं के निर्धारण और उद्देश्यों को परिभाषित करने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत तथा नागरिक समाज के हितधारकों को सहभागी बनाया जाएगा।
  • चरण 2 (2026–2027): संस्थागत ढाँचे की स्थापना और शासन संरचना का अभिकल्पन- अंतर-क्षेत्रीय शासन संरचनाओं, नेतृत्व भूमिकाओं तथा कार्यान्वयन रूपरेखा की स्थापना। यह चरण विधिक, नियामक एवं डिजिटल अवसंरचना की तत्परता पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही, घरेलू नवाचार तथा सार्वजनिक–निजी साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगा।
  • चरण 3 (2027–2029): प्रायोगिक परियोजनाओं तथा चयनित कार्यक्रमों का शुभारंभ- उच्च तत्परता वाले क्षेत्रों में वास्तविक परिस्थितियों में समाधानों के परीक्षण के लिए प्रायोगिक परियोजनाएँ लागू की जाएँगी। एआई की पहुँच (एक्सेसिबिलिटी) और अंतिम छोर तक इसके एडॉप्‍शन (लास्ट-माइल एडॉप्शन) को प्राथमिकता दी जाएगी जिसे सुदृढ़ निगरानी व मूल्यांकन ढाँचों द्वारा समर्थित किया जाएगा।
  • चरण 4 (2029 से आगे): राष्ट्रव्यापी विस्तार और एकीकरण- सफल सिद्ध समाधानों को राज्यों व शहरों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय प्रासंगिकता बनी रहे और विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों की गतिशीलता को बढ़ावा मिले। इस चरण का उद्देश्य मिशन को संस्थागत रूप देना और इसके लाभों को दीर्घकाल तक व व्यापक पैमाने पर स्‍थायी बनाए रखना होगा। 

निष्कर्ष

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की यात्रा एक स्पष्ट विज़न एवं निर्णायक कार्यवाही को दर्शाती है। कंप्यूटिंग अवसंरचना के विस्तार से लेकर देशज मॉडल्स को प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप्स का समर्थन करने तक देश एक मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है जो नागरिकों को लाभ पहुँचाता है तथा नवाचार को बढ़ावा देता है। 
  • कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा एवं शासन के क्षेत्रों में की गई पहलों ने वास्तविक प्रभाव के साथ व्यावहारिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया है। 
  • इंडियाएआई मिशन, डिजिटल श्रमसेतु एवं फाउंडेश्‍नल मॉडल विकास जैसी रणनीतिक पहलों से यह सुनिश्चित हो रहा है कि नवाचार हर नागरिक तक पहुँचे। साथ ही, अनुसंधान, कौशल व उद्यमशीलता को भी बढ़ावा मिले। ये प्रयास भारत को विकसित भारत 2047 के अपने विज़न की ओर बढ़ते हुए, एक वैश्विक एआई नेता के रूप में उभरने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। 
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