- चरण 1 (2025–2026): मिशन अभिमुखीकरण- मिशन चार्टर का प्रारूपण, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमाएँ और मापनीय परिणाम निर्धारित किए जाएँगे। प्राथमिकताओं के निर्धारण और उद्देश्यों को परिभाषित करने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत तथा नागरिक समाज के हितधारकों को सहभागी बनाया जाएगा।
- चरण 2 (2026–2027): संस्थागत ढाँचे की स्थापना और शासन संरचना का अभिकल्पन- अंतर-क्षेत्रीय शासन संरचनाओं, नेतृत्व भूमिकाओं तथा कार्यान्वयन रूपरेखा की स्थापना। यह चरण विधिक, नियामक एवं डिजिटल अवसंरचना की तत्परता पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही, घरेलू नवाचार तथा सार्वजनिक–निजी साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगा।
- चरण 3 (2027–2029): प्रायोगिक परियोजनाओं तथा चयनित कार्यक्रमों का शुभारंभ- उच्च तत्परता वाले क्षेत्रों में वास्तविक परिस्थितियों में समाधानों के परीक्षण के लिए प्रायोगिक परियोजनाएँ लागू की जाएँगी। एआई की पहुँच (एक्सेसिबिलिटी) और अंतिम छोर तक इसके एडॉप्शन (लास्ट-माइल एडॉप्शन) को प्राथमिकता दी जाएगी जिसे सुदृढ़ निगरानी व मूल्यांकन ढाँचों द्वारा समर्थित किया जाएगा।
- चरण 4 (2029 से आगे): राष्ट्रव्यापी विस्तार और एकीकरण- सफल सिद्ध समाधानों को राज्यों व शहरों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय प्रासंगिकता बनी रहे और विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों की गतिशीलता को बढ़ावा मिले। इस चरण का उद्देश्य मिशन को संस्थागत रूप देना और इसके लाभों को दीर्घकाल तक व व्यापक पैमाने पर स्थायी बनाए रखना होगा।
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