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हरित ऊर्जा नियमों पर कर्नाटक उच्च न्यायालय का निर्णय

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)

संदर्भ 

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के विद्युत (हरित ऊर्जा खुली पहुँच के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन) नियम, 2022 को रद्द कर दिया है। 

न्यायालय का निर्णय और उसका आधार 

हालिया निर्णय

न्यायालय ने बृंदावन हाइड्रोपावर प्राइवेट लिमिटेड और 12 अन्य जलविद्युत उत्पादक कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। इनके पास विद्युत पारेषण एवं वितरण कंपनियों के साथ व्हीलिंग एवं बैंकिंग के लिए मौजूदा समझौते हैं।

विधायी क्षमता का अभाव

कर्नाटक उच्च न्यायालय के अनुसार केंद्र के पास इस नियम (हरित ऊर्जा मुक्त पहुँच/Green Energy Open Access : GEOA] नियम, 2022) को तैयार करने के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत विधायी क्षमता का अभाव है।

राज्यों के पास विशेष अधिकार 

न्यायालय के अनुसार विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 42 (2) एवं 181 के तहत पारेषण, निर्धारण एवं खुली पहुँच से संबंधित सभी पहलुओं को विनियमित करने की शक्ति विशेष रूप से राज्य विद्युत आयोग को प्रदान की गई है। इसलिए यह स्पष्ट है कि खुली पहुंच के सभी पहलू राज्य आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र में हैं। 

केंद्र सरकार को निर्देश 

न्यायालय के अनुसार, केंद्र सरकार इस अधिनियम की धारा 176(2) के तहत अपनी अवशिष्ट शक्ति का प्रयोग करने के परिप्रेक्ष्य में यह दावा नहीं कर सकती है कि वह अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है। 

कर्नाटक सरकार को आदेश 

  • न्यायालय ने कर्नाटक विनियामक आयोग (हरित ऊर्जा खुली पहुँच के लिए नियम व शर्तें) विनियम, 2022 को भी रद्द कर दिया क्योंकि इसे GEOA नियम, 2022 के आधार पर तैयार किया गया था। 
  • न्यायालय ने कर्नाटक विद्युत विनियामक आयोग को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वह चाहे तो हरित ऊर्जा उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं को खुली पहुँच प्रदान करने के लिए नए विनियम बना सकता है या खुली पहुँच पर अपने वर्ष 2004 के विनियम को बरकरार रख सकता है।

केंद्र सरकार का पक्ष 

  • केंद्र सरकार का तर्क है कि पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए GEOA नियम बनाए गए थे। 
    • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संधि, समझौते या सम्मेलन को लागू करने के लिए कानून बनाने में सक्षम बनाता है। 
    • इस पर न्यायालय ने आदेश दिया कि यह संवैधानिक शक्ति केंद्र को वर्ष 2003 में अधिनियमित विद्युत अधिनियम के उल्लंघन में नियम/विनियम बनाने का अधिकार नहीं देती है।
    • न्यायालय के अनुसार इसके लिए केंद्र सरकार को विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधन करते हुए नियम बनाने का अधिकार प्राप्त करना होगा।

GEOA नियम, 2022

  • सरकार ने 06 जून, 2022 को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को अधिक गति देने के लिए विद्युत (हरित ऊर्जा खुली पहुँच के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन) नियम, 2022 अधिसूचित किया था। 
  • इसका उद्देश्य सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और हरित ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना है। इसके लिए ग्रिड कंट्रोलर आफ इंडिया लिमिटेड को नोडल एजेंसी अधिसूचित किया गया है। 

GEOA नियम, 2022 की मुख्य विशेषताएँ

हरित ऊर्जा को बढ़ावा

ये नियम अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों सहित हरित ऊर्जा उत्पादन, खरीद एवं उपभोग को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित किए गए हैं।

सभी उपभोक्ताओं की पहुँच

  • हरित खुली पहुँच (Green Open Access : GOA) की सभी उपभोक्ताओं को अनुमति है। इसके तहत लेनदेन सीमा को एक मेगावाट से घटाकर 100 किलोवाट कर दिया गया है ताकि छोटे उपभोक्ता भी खुली पहुंच सुविधा के तहत नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद कर सकें।
  • उपभोक्ता, वितरण कंपनियों से हरित ऊर्जा आपूर्ति की मांग कर सकते हैं। वितरण कंपनियां हरित ऊर्जा की खरीद कर उसे पात्र उपभोक्ता को आपूर्ति करने के लिए बाध्य होंगी।

नियमों का सरलीकरण

हरित ऊर्जा के लिए खुली पहुंच के नियमों को सरल बनाया गया है। एक राष्ट्रीय पोर्टल के जरिए खुली पहुंच की मंजूरी का अधिकार दिया गया है। वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को स्वैच्छिक आधार पर हरित बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है।

शुल्क संरचना में कमी एवं प्रोत्साहन

  • हरित ऊर्जा पर अतिरिक्त अधिभार को हटाया गया है ताकि उपभोक्ता हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो। वितरण लाइसेंसधारकों के क्षेत्र में सभी बाध्य संस्थाओं के लिए एक समान नवीकरणीय खरीद दायित्व होगा।  
    • इसके लिए हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया को भी शामिल कर लिया गया है।
    • वितरण लाइसेंसधारक के साथ अधिशेष हरित ऊर्जा की बैंकिंग अनिवार्य है।
  • हरित ऊर्जा का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को हरित प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।
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