New
Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026 Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026

अवांछित दवाओं का सुरक्षित निपटान: One Health दृष्टिकोण

संदर्भ

वर्तमान युग में दवाओं का उत्पादन और उपयोग अत्यधिक बढ़ गया है। इसके बावजूद उनके असुरक्षित निपटान से गंभीर पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न होते हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा प्रकाशित 2026 की रिपोर्ट ‘अप्रयुक्त दवाओं का सुरक्षित निपटान (Safe Disposal of Unused Medicines)’ इस समस्या एवं समाधान के लिए व्यापक मार्गदर्शन प्रस्तुत करती है। 

रिपोर्ट का सार  

  • रिपोर्ट एक बहु-क्षेत्रीय ढांचा प्रस्तुत करती है जो वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण पर आधारित है। इसका उद्देश्य मानव एवं पशु दवाओं के सुरक्षित निपटान के लिए राष्ट्रीय प्रणालियों को सुदृढ़ करना है। 
  • यह स्वास्थ्य देखभाल, कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों में अपशिष्ट रोकथाम, वापसी योजनाओं, कानूनी ढांचे व जागरूकता अभियान के माध्यम से सुरक्षित निपटान को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। 

प्रमुख निष्कर्ष 

  • पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य जोखिम: अनुचित तरीके से दवा निपटान एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR), एंडोक्राइन विकार और पारिस्थितिकी तंत्र में विषाक्तता का मुख्य कारण है।
  • उच्च अपशिष्ट दर: अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 50% घरेलू दवाएँ अंततः अपशिष्ट बन जाती हैं।
  • आर्थिक आयाम: दवाओं के प्रबंधन का वैश्विक बाजार वर्ष 2032 तक US$2.54 बिलियन तक पहुँच सकता है।
  • अप्रभावी उपचार: वर्तमान अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र फार्मास्युटिकल प्रदूषकों को पूरी तरह नहीं हटा पाते हैं। 
  • स्वास्थ्य जोखिम: वर्ष 2019 में बैक्टीरियल AMR के कारण लगभग 1.27 मिलियन मौतें हुईं। 
  • रोकथाम क्षमता: नीदरलैंड में बेहतर रोकथाम से 40% अवांछित दवाओं का उत्पादन रोका जा सकता है। 
  • खतरनाक संरचना: अवांछित दवाएँ वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल अपशिष्ट का लगभग 3% हैं।
  • पुनर्वितरण की संभावना: कुछ परिस्थितियों में लगभग 19% दवाएँ कठोर गुणवत्ता मानकों के अंतर्गत पुनर्वितरित की जा सकती हैं। 

एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधकता (AMR) के बारे में

  • एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधकता (AMR) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो रोगजनकों में आनुवंशिक परिवर्तनों के माध्यम से समय के साथ घटित होती है।
  • इसका उद्भव एवं प्रसार मानवीय गतिविधियों, मुख्यत: मनुष्यों, जानवरों व पौधों में संक्रमण के उपचार, रोकथाम या नियंत्रण के लिए रोगाणुरोधी दवाओं के दुरुपयोग तथा अत्यधिक उपयोग से तेज होता है।
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, कवक एवं परजीवी रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं। 
  • दवा प्रतिरोध के परिणामस्वरूप एंटीबायोटिक्स और अन्य रोगाणुरोधी दवाएँ अप्रभावी हो जाती हैं तथा संक्रमण का उपचार मुश्किल या असंभव हो जाता है जिससे बीमारी फैलने, गंभीर बीमारी, विकलांगता व मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
  • एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, एंटीफंगल व एंटीपैरासिटिक्स जैसी रोगाणुरोधी दवाएँ मनुष्यों, जानवरों एवं पौधों में संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएँ हैं।  

चिकित्सा अपशिष्ट निपटान के तरीके 

  • उच्च तापमान दहन: 800–1200°C तापमान पर दहन और धुआँ गैस शोधन
  • अपशिष्ट निष्क्रियकरण: कैप्सुलेशन या इनर्टाइजेशन के माध्यम से खतरनाक अपशिष्ट को स्थायी रूप से अवरुद्ध करना
  • इंजीनियर्ड लैंडफिल: खतरनाक अवशेषों के दीर्घकालिक नियंत्रण और संलग्नन के लिए सुरक्षित निपटान स्थल
  • को-प्रोसेसिंग: उच्च तापमान औद्योगिक प्रक्रियाओं, जैसे- सीमेंट भट्टियों में दवाओं को प्रभावी रूप से नष्ट करना

निपटान में प्रमुख चुनौतियाँ 

  • सार्वजनिक जागरूकता की कमी: कई लोग दवाओं के गलत निपटान के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों से अनजान हैं। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में 53.1% लोग इस बात से अनभिज्ञ थे।
  • सुविधाओं की कमी: ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में अपशिष्ट उपचार के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया के ग्रामीण क्षेत्रों में उचित दहन सुविधाओं की कमी है। 
  • अपर्याप्त कानूनी ढांचा: कई देशों में वापसी योजनाओं के लिए बाध्यकारी नियम नहीं हैं। उदाहरण के लिए जर्मनी में राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य योजना नहीं है, केवल स्थानीय फार्मेसियों की स्वैच्छिक प्रणाली।
  • आर्थिक एवं संसाधन सीमाएँ: उन्नत उपचार तकनीकें महंगी हैं, इसलिए निम्न आय वाले देशों में लागू करना कठिन है। उदाहरण के लिए अपशिष्ट जल के लिए उन्नत ऑक्सीकरण प्रक्रिया महंगी होने के कारण सभी जगह उपलब्ध नहीं है।
  • आपातकालीन परिस्थितियों में जोखिम: मानवीय संकटों में दवाओं का अतिशेष संग्रह एवं जल्दी समाप्त होने वाली दवाएँ जमा हो जाती हैं।

UNEP की सिफारिशें 

  • रोग रोकथाम को सुदृढ़ करना: WASH, बायोसिक्योरिटी एवं टीकाकरण कार्यक्रमों में सुधार
  • चरणबद्ध वापसी योजनाएँ: घरों एवं फार्मों से अवांछित दवाओं का सुरक्षित संग्रह
  • कानूनी ढांचे लागू करना: विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility: EPR) के माध्यम से उत्पादनकर्ताओं पर अपशिष्ट प्रबंधन की वित्तीय जिम्मेदारी
  • उचित उपयोग को बढ़ावा देना: यूनिट-डोज पैकेजिंग व बेहतर निदान से ओवर-प्रिस्क्रिप्शन और स्टॉकपाइलिंग रोकना
  • पारदर्शिता एवं निगरानी बढ़ाना: डिजिटल टूल्स और निगरानी प्रणालियों के माध्यम से दवा उपयोग तथा निपटान का ट्रैकिंग

निष्कर्ष 

अवांछित दवाओं का सुरक्षित प्रबंधन केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि वन हेल्थ सहयोग के माध्यम से रासायनिक तथा AMR प्रदूषण को स्रोत पर रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मजबूत कानूनी ढांचे, व्यापक जागरूकता अभियान और सुलभ वापसी योजनाओं के संयोजन से देश फार्मास्युटिकल अपशिष्ट के पर्यावरणीय तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X