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भारत-नॉर्डिक संबंध

संदर्भ

हाल ही में ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ने दोनों पक्षों के बीच संबंधों को एक नया आयाम दिया है। हाल ही में संपन्न भारत-EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) ने इस रणनीतिक जुड़ाव को नए स्वर्ण युग में प्रवेश करा दिया है।     

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकासवादी चरण 

भारत और नॉर्डिक देशों (डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन) के बीच बहुआयामी साझेदारी की औपचारिक शुरुआत 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।

  • पारंपरिक से रणनीतिक की ओर: यह जुड़ाव अब पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर नवाचार, हरित प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास पर केंद्रित एक भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी में बदल गया है। 
  • पूरकता का सिद्धांत: नॉर्डिक देश उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और अधिशेष पूँजी (Surplus Capital) लाते हैं, जबकि भारत उन्हें बड़े पैमाने का बाजार (Scale), कुशल मानव संसाधन (Talent) और विनिर्माण क्षमताएं प्रदान करता है। 

भारत के लिए नॉर्डिक देशों का भू-राजनीतिक एवं आर्थिक महत्व 

नॉर्डिक क्षेत्र के पाँचों देश भारत की घरेलू विकास प्राथमिकताओं और वैश्विक आकांक्षाओं के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में महत्व रखते हैं: 

डेनमार्क (हरित रणनीतिक साझेदारी) 

  • व्यापारिक गतिशीलता: वर्ष 2025 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2.05 बिलियन डॉलर और सेवाओं का व्यापार 4.25 बिलियन डॉलर रहा।
  • निवेश: भारत में लगभग 200 डैनिश कंपनियां शिपिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और स्मार्ट शहरी विकास में सक्रिय हैं। डेनमार्क से संचयी एफडीआई प्रवाह (2024 तक) 1.413 बिलियन डॉलर रहा। 

फिनलैंड (नवाचार और उच्च तकनीक)

  • आर्थिक जुड़ाव: 2024-25 में वस्तुओं का व्यापार 1.017 बिलियन डॉलर और 2025 में सेवाओं का व्यापार 1.9 बिलियन डॉलर रहा। भारत में फिनलैंड का निवेश बढ़कर 4 बिलियन डॉलर हो गया है।
  • प्रौद्योगिकी: फिनलैंड के तकनीकी इकोसिस्टम और 6जी जैसी अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों में भारतीय आईटी पेशेवरों की बड़ी भूमिका है। 

नॉर्वे (समुद्री अर्थव्यवस्था और संप्रभु कोष)

  • पूँजी निवेश: नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (GPFG) ने दिसंबर 2025 तक भारतीय पूँजी बाजार में लगभग 28 बिलियन डॉलर का विशाल निवेश किया है।  
  • द्विपक्षीय व्यापार: वर्ष 2024-25 में माल का द्विपक्षीय व्यापार 1.05 बिलियन डॉलर और सेवाओं का व्यापार लगभग 1 बिलियन डॉलर रहा। 

स्वीडन (औद्योगिक और रक्षा सहयोग)

  • व्यापारिक आकार: नॉर्डिक देशों में स्वीडन भारत का बड़ा साझेदार है, जिसके साथ 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 6.96 बिलियन डॉलर था।
  • कॉर्पोरेट उपस्थिति: भारत में 280 से अधिक स्वीडिश कंपनियाँ और स्वीडन में 75 भारतीय कंपनियाँ कार्यरत हैं। वर्ष 2024 तक स्वीडन से संचयी एफडीआई प्रवाह 2.596 बिलियन डॉलर रहा।   

आइसलैंड (भू-तापीय और ध्रुवीय अनुसंधान)

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 77.06 मिलियन डॉलर रहा। साथ ही आइसलैंड भारत को भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) और उन्नत मत्स्य पालन (Fisheries) में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।  

भारत की आर्कटिक नीति और नॉर्डिक जुड़ाव 

  • नॉर्डिक देशों के साथ गठबंधन भारत की आर्कटिक नीति (भारत और आर्कटिक: सतत विकास के लिए साझेदारी का निर्माण) का एक अनिवार्य स्तंभ है। 
  • आर्कटिक की बर्फ पिघलने का सीधा संबंध भारत के मानसून पैटर्न, वर्षा की तीव्रता और कृषि उत्पादकता से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त, भारत के 1300 से अधिक द्वीपीय क्षेत्रों की स्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि से जुड़ी है। 
  • भारत की आर्कटिक नीति के छह प्रमुख स्तंभ नॉर्डिक देशों के सहयोग से सुदृढ़ होते हैं: 
    • वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
    • जलवायु और पर्यावरण संरक्षण।
    • आर्थिक और मानव विकास।
    • परिवहन और कनेक्टिविटी (उत्तरी समुद्री मार्ग)।
    • वैश्विक शासन (Governance) और अंतर्राष्ट्रीय कानून।
    • आर्कटिक क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमता निर्माण। 

तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम 

ओस्लो शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा परिणाम दोनों पक्षों के संबंधों को हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी में बदलना है। इसके मुख्य 8 परिणाम निम्नलिखित हैं: 

  • हरित प्रौद्योगिकी साझेदारी: इसका मुख्य फोकस स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और टिकाऊ विनिर्माण पर है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पर्यावरण-अनुकूल हरित रोजगार (Green Jobs) पैदा करने में काफी मददगार है।  
  • भारत- ईएफटीए टीईपीए: यह समझौता बाजार तक पहुँच को आसान बनाता है और व्यापार में आने वाली रुकावटों को कम करता है। इसके जरिए भारत और नॉर्डिक देशों के बीच मूल्य श्रृंखलाओं (Value Chains) का बेहतर तालमेल या एकीकरण सुनिश्चित होता है। 
  • जलवायु कार्रवाई (Climate Action): इसके तहत दोनों पक्ष मिलकर कार्बन उत्सर्जन को कम करने (Mitigation) के साझा प्रयास कर रहे हैं, जो लंबे समय तक देश के टिकाऊ और मजबूत आर्थिक विकास को सहारा देते हैं। 
  • ध्रुवीय एवं आर्कटिक सहयोग: आधुनिक तकनीकों जैसे सैटेलाइट मैपिंग और रियल-टाइम (तुरंत मिलने वाले) डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके भारतीय मानसून, मौसम के मिजाज और पर्यावरण के संतुलन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। 
  • एसटीईएम क्षेत्रों में अनुसंधान सहयोग और 6G: इसके माध्यम से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) का दायरा बढ़ाया जा रहा है। 6G जैसी अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों में मिलकर रिसर्च करने से भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) को बहुत रफ्तार मिलेगी।
  • सामुद्रिक अर्थव्यवस्था (Blue Economy): इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना है। साथ ही, समुद्री रास्तों के जुड़ाव (Connectivity) को मजबूत करना और समुद्र के संसाधनों का इस तरह इस्तेमाल करना है जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे।  
  • प्रतिभा की गतिशीलता (Talent Mobility): यह युवाओं के कौशल विकास (Skill Development) और नए बिजनेस व स्टार्ट-अप को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इससे भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं (Researchers) को दुनिया भर में पढ़ाई और सीखने के नए अवसर मिलते हैं। 
  • रक्षा औद्योगिक सहयोग: भारतीय रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई (FDI) की सुविधा का फायदा उठाते हुए, इस साझेदारी से नई तकनीकों को भारत लाने (Technology Transfer) और देश में ही रक्षा उपकरण बनाने ('Make in India') को बढ़ावा मिल रहा है। 

सॉफ्ट पावर कूटनीति और पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट 

आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के अलावा, भारत अपनी सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में गहरा प्रभाव रखता है:

  • प्रवासी भारतीय (Diaspora): स्वीडन में 88,000, फिनलैंड में 33,000, नॉर्वे में 30,000 और डेनमार्क में 21,000 सक्रिय भारतीय प्रवासी सांस्कृतिक दूत के रूप में कार्य कर रहे हैं। 
  • सांस्कृतिक स्वीकार्यता: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (जैसे कोपेनहेगन में सभी के लिए योग), आयुर्वेद, भारतीय सिनेमा और ओस्लो कलर फेस्टिवल/नमस्ते स्टॉकहोम जैसे आयोजन भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं।    
  • ऐतिहासिक संबंध: आरहूस यूनिवर्सिटी (डेनमार्क) के पास गाँधी प्लेन और स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय में 200 साल पुराना इंडोलॉजी (Indology) का अध्ययन दोनों समाजों के बीच गहरे बौद्धिक जुड़ाव को दर्शाता है।    

निष्कर्ष 

  • भारत-नॉर्डिक साझेदारी वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी-संचालित, समावेशी और टिकाऊ सहयोग का एक आधुनिक मॉडल बनकर उभरी है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख और बहुपक्षीय वैश्विक संस्थानों (जैसे यूएनएससी) में तत्काल सुधारों की वकालत दोनों पक्षों के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास को दर्शाती है। 
  • भविष्य में, भारत को नॉर्डिक देशों की हरित समाधान क्षमताओं का उपयोग अपनी मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए करना चाहिए। यह साझेदारी न केवल भारत के आर्थिक और तकनीकी विस्तार को गति देगी, बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी एक उत्प्रेरक (Catalyst) सिद्ध होगी। 
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