- हाल ही में गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में दो शेर के शावकों की मृत्यु संदिग्ध बेबेसिया संक्रमण के कारण हुई।
- इस घटना ने वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र में वेक्तर-जनित रोगों (vector-borne diseases) को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि वन विभाग ने अभी किसी बड़े प्रकोप (outbreak) की पुष्टि नहीं की है। अन्य शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों और क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़ी बताई गई है।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान एक महत्वपूर्ण संरक्षित आवास है जहाँ इस प्रकार के संक्रमण टिक जनसंख्या के माध्यम से फैल सकते हैं।

बेबेसिया क्या है ?
- बेबेसिया एक सूक्ष्म परजीवी (microscopic protozoan parasite) है जो मनुष्यों और जानवरों की लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को संक्रमित करता है और इससे होने वाली बीमारी को बेबेसियोसिस (Babesiosis) कहा जाता है।
- यह एक महत्वपूर्ण टिक-जनित (tick-borne) ज़ूनोटिक रोग है, जिसका संबंध वन्यजीव और मानव स्वास्थ्य दोनों से है। इससे शरीर में रक्ताल्पता (hemolytic anemia) और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं।
संक्रमण का तरीका
- बेबेसिया परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित टिक के काटने से फैलता है, विशेषकर Ixodes tick (deer tick) के माध्यम से, जो Lyme disease फैलाने के लिए भी जाना जाता है।
- जब संक्रमित टिक किसी मेजबान (human या animal) का रक्त चूसता है, तो परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाता है।
प्रभावित जीव
- बेबेसियोसिस पशुओं और मनुष्यों दोनों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह अधिकतर पशुओं जैसे गाय, कुत्ता, भेड़ और वन्यजीवों में पाया जाता है।
- मनुष्यों में संक्रमण अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है, विशेषकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में।
भौगोलिक वितरण
बेबेसिया संक्रमण मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों में पाया जाता है:-
- उत्तर-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका
- यूरोप के कुछ भाग
- एशिया के कुछ क्षेत्र
मानव संक्रमण उन क्षेत्रों में अधिक देखा जाता है जहाँ टिक की संख्या अधिक होती है।
क्या यह संक्रामक है ?
बेबेसियोसिस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से टिक के काटने से फैलता है। बहुत ही दुर्लभ मामलों में यह:
- संक्रमित गर्भवती महिला से भ्रूण में
- संक्रमित रक्त आधान (blood transfusion) के माध्यम से फैल सकता है
उपचार
बेबेसियोसिस का उपचार आमतौर पर संयोजन चिकित्सा (combination therapy) से किया जाता है क्योंकि यह एक परजीवी जनित रोग है। इसमें शामिल हैं:
- Atovaquone (एंटीपैरासिटिक दवा)
- Azithromycin (एंटीबायोटिक, संयोजन में उपयोगी)
गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती और रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है।