Prelims: भारत-UAE रक्षा संबंध; संयुक्त सैन्य अभ्यास; पर्वतीय युद्ध Mains: GS Paper II – अंतरराष्ट्रीय संबंध; द्विपक्षीय संबंध; रक्षा सहयोग एवं रणनीतिक साझेदारी Keywords: अभ्यास माउंटेन गार्जियन 2026, भारत-UAE रक्षा सहयोग, चौबटिया, उत्तराखंड, पर्वतीय युद्ध, भारतीय सेना, UAE सेना, सैन्य अंतर-संचालनीयता, संयुक्त सैन्य अभ्यास |
चर्चा में क्यों?
- भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास माउंटेन गार्जियन 2026 का शुभारंभ 5 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के फॉरेन ट्रेनिंग नोड, चौबटिया में हुआ।
- यह अभ्यास 5 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और UAE सेना के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability), आपसी समझ और परिचालन सहयोग को बढ़ाना है, जिसमें विशेष रूप से पर्वतीय युद्ध पर ध्यान दिया गया है।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध
- रणनीतिक साझेदारी: भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और सुरक्षा शामिल हैं।
- आर्थिक संबंध: UAE भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और निवेश साझेदार है। दोनों देशों के बीच बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग है।
- CEPA समझौता: भारत-UAE व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 2022 में लागू हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और बाजार तक पहुँच को बढ़ावा मिला।
- रक्षा सहयोग: दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सैन्य आदान-प्रदान और पेशेवर संवाद होते हैं।
- रणनीतिक महत्व: UAE भारत के लिए खाड़ी और पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इसलिए आर्थिक संबंधों के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग भी भारत के क्षेत्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
अभ्यास माउंटेन गार्जियन 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
- यह अभ्यास 5 से 18 अक्टूबर 2026 तक उत्तराखंड के फॉरेन ट्रेनिंग नोड, चौबटिया में आयोजित किया जा रहा है। इसमें कुल 92 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय सेना और UAE सेना की समान भागीदारी है।
- भारतीय दल में भैरव बटालियन के सैनिक शामिल हैं, जबकि UAE का दल माउंटेन इन्फैंट्री बटालियन के सैन्यकर्मियों से बना है। दोनों सेनाओं की महिला अधिकारी और महिला सैन्यकर्मी भी विशेषज्ञ भूमिकाओं में भाग ले रही हैं।
- इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय वातावरण में परिचालन समन्वय, सामरिक दक्षता और सैन्य सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) के आदान-प्रदान को बेहतर बनाना है।
भारत-UAE के प्रमुख नियमित सैन्य अभ्यास
- Bilateral Naval Exercise (BILAT) – भारतीय नौसेना और UAE Navy के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास। 2024 में इसका तीसरा edition UAE में आयोजित हुआ था।
- Desert Flag – UAE Air Force द्वारा आयोजित multilateral air combat exercise, जिसमें भारतीय वायु सेना नियमित रूप से भाग लेती है। 2025 में IAF ने Desert Flag-10 में भाग लिया।
- Desert Cyclone – भारतीय सेना और UAE Land Forces का bilateral military exercise। इसका पहला edition 2024 में राजस्थान में और दूसरा edition 2025 में UAE में आयोजित हुआ।
- Desert Knight – भारत, UAE और फ्रांस के बीच multilateral air exercise, जिसमें भारतीय वायु सेना भाग लेती है। 2025 में Desert Knight 25.1 में भारत, UAE और फ्रांस ने हिस्सा लिया।
प्रमुख प्रशिक्षण गतिविधियाँ
इस अभ्यास में दोनों सैन्य दलों की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ शामिल की गई हैं।
- संयुक्त योजना एवं सामरिक अभ्यास: परिचालन परिस्थितियों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया विकसित करना।
- फायरिंग अभ्यास: हथियार संचालन, निशानेबाजी और युद्धक तैयारी में सुधार करना।
- सर्विलांस ग्रिड: परिस्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाना तथा परिचालन क्षेत्रों की निगरानी को मजबूत करना।
- ड्रोन संचालन: सामरिक गतिविधियों में मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAS) का एकीकरण करना।
- शारीरिक सहनशक्ति प्रशिक्षण: पर्वतीय युद्ध की कठिन परिस्थितियों के लिए सैनिकों को तैयार करना।
- रॉक क्लाइम्बिंग एवं बाधा प्रशिक्षण: कठिन भू-भाग में सैनिकों की गतिशीलता, फुर्ती और संचालन क्षमता को मजबूत करना।
- एकीकृत क्षेत्रीय अभ्यास: वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप समन्वित सैन्य अभियानों का अभ्यास करना।
प्रशिक्षण में प्रौद्योगिकी आधारित अभियानों तथा पर्वतीय भू-भाग से संबंधित रणनीति, तकनीक एवं प्रक्रियाओं (Tactics, Techniques and Procedures) का आदान-प्रदान भी शामिल है।
पर्वतीय युद्ध प्रशिक्षण का महत्व
- पर्वतीय युद्ध के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, क्योंकि अधिक ऊँचाई, तीव्र ढलान, अप्रत्याशित मौसम और कठिन संचार एवं आवागमन व्यवस्था सैन्य अभियानों को प्रभावित कर सकती है।
- ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण सैनिकों की शारीरिक सहनशक्ति, भू-भाग की समझ, सामरिक गतिशीलता और परिचालन समन्वय को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह निगरानी, त्वरित निर्णय लेने और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के महत्व को भी रेखांकित करता है।
- भारत के लिए पर्वतीय युद्ध का अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की सीमाओं का एक बड़ा हिस्सा पर्वतीय क्षेत्रों से लगा हुआ है और हिमालयी क्षेत्र में विशेष सैन्य तैयारियों की आवश्यकता होती है।
भारत-UAE रक्षा संबंधों के लिए महत्व
- सैन्य अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना: संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की रणनीति, प्रक्रियाओं और परिचालन क्षमताओं को समझने में सहायता मिलती है। इससे संयुक्त गतिविधियों के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
- पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देना: यह अभ्यास दोनों देशों के सैन्यकर्मियों को परिचालन अनुभव, विशेषज्ञ कौशल और सैन्य सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करता है।
- रक्षा सहयोग का विस्तार: नियमित सैन्य सहयोग दोनों देशों के संस्थागत संबंधों को मजबूत करता है और व्यापक भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में योगदान देता है।
- आपसी विश्वास को बढ़ावा देना: सैन्यकर्मियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण दोनों देशों के बीच पेशेवर समझ, विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करते हैं।
भारत की रक्षा तैयारियों के लिए प्रासंगिकता
- माउंटेन गार्जियन 2026 यथार्थपरक प्रशिक्षण, तकनीकी एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारी को मजबूत करने के प्रयासों में योगदान देता है।
- ड्रोन संचालन और निगरानी गतिविधियों को शामिल किया जाना आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। ये क्षमताएँ युद्धक्षेत्र की स्थिति की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने, सामरिक योजना बनाने और कमांडरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं।
- विशेषज्ञ भूमिकाओं में महिला अधिकारियों और महिला सैन्यकर्मियों की भागीदारी पेशेवर सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन गतिविधियों में उनकी भूमिका को भी दर्शाती है।
पर्वतीय युद्ध में प्रमुख चुनौतियाँ
- कठिन भू-भाग और मौसम: खड़ी ढलानें, कम तापमान और तेजी से बदलता मौसम सैनिकों की आवाजाही तथा युद्धक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
- लॉजिस्टिक संबंधी बाधाएँ: पर्वतीय क्षेत्रों में सैनिकों, उपकरणों, गोला-बारूद और अन्य आवश्यक सामग्री की आवाजाही कठिन हो सकती है।
- संचार संबंधी सीमाएँ: पर्वतीय भू-भाग से उत्पन्न बाधाएँ सैन्य इकाइयों के बीच संचार और समन्वय को प्रभावित कर सकती हैं।
- प्रौद्योगिकी का एकीकरण: ड्रोन, निगरानी प्रणालियों और संचार उपकरणों का प्रभावी उपयोग विशेष प्रशिक्षण तथा विश्वसनीय तकनीकी सहायता की मांग करता है।
आगे की राह
- भारत और UAE को आपसी हित के क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान और विशेष सैन्य अभ्यासों का विस्तार जारी रखना चाहिए।
- भविष्य में सहयोग को पर्वतीय युद्ध, ड्रोन आधारित अभियान, निगरानी, सामरिक संचार और एकीकृत क्षेत्रीय प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित किया जा सकता है। यथार्थपरक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास, अंतर-संचालनीयता और परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर अधिक जोर दोनों सेनाओं की क्षमताओं को और मजबूत कर सकता है।
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों का नियमित मूल्यांकन परिचालन कमियों की पहचान करने और भविष्य के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
- माउंटेन गार्जियन 2026 भारत और UAE के बीच सैन्य-से-सैन्य सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पर्वतीय युद्ध, सामरिक समन्वय और प्रौद्योगिकी आधारित अभियानों पर केंद्रित यह अभ्यास पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है और दोनों सेनाओं के बीच परिचालन समझ को मजबूत करता है।
- इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को भी सुदृढ़ करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: माउंटेन गार्जियन 2026 अभ्यास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह भारत और UAE के बीच एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
- इसका आयोजन उत्तराखंड में किया जा रहा है।
- यह पर्वतीय युद्ध पर केंद्रित है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 (b) केवल 1 और 2 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने में संयुक्त सैन्य अभ्यासों के महत्व की चर्चा कीजिए। अपने उत्तर को भारत-UAE के माउंटेन गार्जियन 2026 अभ्यास के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
|
FAQs
Q1. माउंटेन गार्जियन 2026 क्या है?
माउंटेन गार्जियन 2026 भारतीय सेना और UAE सेना के बीच आयोजित एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्वतीय युद्ध, परिचालन सहयोग और सैन्य अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना है।
Q2. माउंटेन गार्जियन 2026 अभ्यास कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
यह अभ्यास उत्तराखंड के फॉरेन ट्रेनिंग नोड, चौबटिया में आयोजित किया जा रहा है।
Q3. यह अभ्यास कब आयोजित किया जा रहा है?
यह अभ्यास 5 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
Q4. इस अभ्यास में कितने सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं?
इस अभ्यास में कुल 92 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय सेना और UAE सेना की समान भागीदारी है।
Q5. इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, आपसी समझ और परिचालन सहयोग को बढ़ाना है, जिसमें विशेष रूप से पर्वतीय युद्ध पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
|