असंगठित एवं गिग श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड: शक्तियाँ, कार्य एवं महत्त्व

चर्चा में क्यों ?

  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर, 2026 को असंगठित श्रमिकों तथा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए दो राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन की अधिसूचना जारी की।
  • इन बोर्डों का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रही गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करना, उनकी निगरानी करना तथा सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाना है।
  • असंगठित श्रमिकों के लिए गठित बोर्ड में 40 सदस्य, जबकि गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए गठित बोर्ड में 22 सदस्य होंगे। दोनों बोर्डों की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे।

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड क्या हैं?

  • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक संस्थागत निकाय हैं। 
  • इनका प्रमुख उद्देश्य असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों तथा प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों के संबंध में केंद्र सरकार को सलाह देना है।
  • इन श्रमिकों को प्रायः स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि, पेंशन तथा दुर्घटना बीमा जैसी औपचारिक रोजगार संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं। 
  • ऐसे में ये बोर्ड सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कमियों को दूर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बोर्डों की संरचना:

  • असंगठित श्रमिकों के लिए बोर्ड: इसमें कुल 40 सदस्य होंगे। इनमें श्रमिकों, नियोक्ताओं, सरकारी विभागों और संसद के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए बोर्ड: इसमें कुल 22 सदस्य होंगे। इनमें सरकार, श्रमिक संगठनों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • अध्यक्ष: केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री।
  • उपाध्यक्ष: श्रम सचिव।

इन बोर्डों में भारतीय मजदूर संघ (BMS), इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) तथा इटरनल (जोमैटो की मूल कंपनी), स्विगी, ज़ेप्टो और अर्बन कंपनी जैसे संगठनों एवं कंपनियों के प्रतिनिधित्व का प्रावधान है।

सामाजिक सुरक्षा बोर्डों की शक्तियाँ एवं कार्य

इन बोर्डों की प्रमुख भूमिका सलाह देने, कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करने तथा सामाजिक सुरक्षा कोष के उपयोग की समीक्षा करने से संबंधित है।

प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश: असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने के संबंध में केंद्र सरकार को सुझाव देना।
  2. योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी: सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना तथा उनकी प्रभावशीलता का आकलन करना।
  3. सामाजिक सुरक्षा कोष की समीक्षा: सामाजिक सुरक्षा कोष से किए गए व्यय तथा उसके उपयोग की समीक्षा करना।
  4. नीतिगत सुझाव: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रशासन से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
  5. राज्य स्तर पर निगरानी: गिग श्रमिकों की कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित अभिलेखों के रखरखाव की राज्य स्तरीय व्यवस्था की समीक्षा करना।
  6. नियमित बैठकें: दोनों बोर्डों की बैठक वर्ष में कम-से-कम तीन बार आयोजित की जानी आवश्यक है।

श्रमिकों को कौन-कौन से सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकते हैं?

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत केंद्र सरकार विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बना सकती है।

इन योजनाओं में निम्नलिखित सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं:

  1. जीवन एवं दिव्यांगता सुरक्षा: मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना।
  2. दुर्घटना बीमा: कार्यस्थल या अन्य दुर्घटनाओं से उत्पन्न आर्थिक जोखिमों से सुरक्षा।
  3. स्वास्थ्य लाभ: स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा संबंधी सुरक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  4. मातृत्व लाभ: मातृत्व की स्थिति में आवश्यक आर्थिक एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना।
  5. वृद्धावस्था सुरक्षा: वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाय करना।
  6. शिशु देखभाल केंद्र: पात्र श्रमिकों के बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

इन उपायों का उद्देश्य उन श्रमिकों की आर्थिक असुरक्षा को कम करना है, जो परंपरागत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के दायरे से बाहर रह जाते हैं।

गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के कल्याण के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष की व्यवस्था की गई है।

एग्रीगेटर कंपनियों का योगदान

डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों एवं एग्रीगेटर्स को सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होगा।

  • कंपनियों का योगदान उनके वार्षिक कारोबार का 1–2 प्रतिशत होगा।
  • यह योगदान संबंधित एग्रीगेटर द्वारा गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भुगतान की गई या देय राशि के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।

इस व्यवस्था के अंतर्गत अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियाँ शामिल हो सकती हैं।

सामाजिक सुरक्षा कोष के अन्य स्रोत

सामाजिक सुरक्षा कोष के लिए निम्नलिखित स्रोतों से भी धन उपलब्ध कराया जा सकता है:

  • केंद्र सरकार का योगदान।
  • राज्य सरकारों का योगदान।
  • कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत योगदान।
  • कानून के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त जुर्माने तथा अन्य अनुमत स्रोतों से प्राप्त धन।

इस कोष का उद्देश्य गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

आधार से जुड़ी सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN)

गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों की पहचान तथा पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर की पंजीकरण व्यवस्था महत्त्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत आधार से जुड़ी सार्वभौमिक खाता संख्या (Universal Account Number—UAN) का उपयोग किया जा सकता है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों का पंजीकरण।
  • पात्र श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना।
  • विभिन्न राज्यों में सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करना।
  • कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान एवं लाभ वितरण में सुधार करना।

पोर्टेबिलिटी का महत्त्व: गिग श्रमिक अक्सर रोजगार की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से उन्हें कार्यस्थल बदलने के बाद भी पात्र लाभ प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के दायरे का विस्तार

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि से संबंधित प्रावधानों का दायरा भी विस्तृत किया गया है।
  • नई व्यवस्था के अनुसार, लागू वैधानिक प्रावधानों के अधीन 20 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर कर्मचारी भविष्य निधि संबंधी प्रावधान लागू होते हैं, चाहे वे किसी भी उद्योग से संबंधित हों।
  • पहले कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के अंतर्गत इसका दायरा अधिनियम में निर्दिष्ट प्रतिष्ठानों तथा निर्धारित श्रेणियों से जुड़ा हुआ था।
  • इस विस्तार का उद्देश्य अधिक प्रतिष्ठानों एवं कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाना है।

 राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का महत्त्व

  1. सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: ये बोर्ड उन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में सहायता कर सकते हैं, जो अब तक औपचारिक कल्याणकारी व्यवस्थाओं से वंचित रहे हैं।
  2. गिग अर्थव्यवस्था को संस्थागत मान्यता: यह व्यवस्था रोजगार के बदलते स्वरूप और प्लेटफॉर्म आधारित काम के बढ़ते महत्त्व को स्वीकार करती है।
  3. आर्थिक सुरक्षा: स्वास्थ्य, दुर्घटना, मातृत्व, दिव्यांगता और वृद्धावस्था से संबंधित लाभ श्रमिकों की आर्थिक असुरक्षा कम कर सकते हैं।
  4. लाभों की पोर्टेबिलिटी: आधार से जुड़ी UAN व्यवस्था विभिन्न राज्यों में पात्र श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त करने में सहायता कर सकती है।
  5. श्रमिक कल्याण को बढ़ावा: सरकार, श्रमिक संगठनों और नियोक्ताओं की भागीदारी से नीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन में सुधार हो सकता है।
  6. समावेशी विकास: सामाजिक सुरक्षा से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति, उत्पादकता और जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
  7. रोजगार का औपचारिकीकरण: पंजीकरण तथा डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कार्यरत श्रमिकों की पहचान एवं कवरेज बढ़ाई जा सकती है।

चुनौतियाँ 

  1. श्रमिकों की पहचान: गिग श्रमिक अक्सर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं और अपना कार्य बदलते रहते हैं। इससे उनकी पहचान एवं पंजीकरण कठिन हो सकता है।
  2. वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता: सामाजिक सुरक्षा कोष के लिए नियमित एवं पर्याप्त धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
  3. क्रियान्वयन संबंधी समस्याएँ: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और प्लेटफॉर्म कंपनियों के बीच समन्वय की कमी से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  4. जागरूकता का अभाव: अनेक श्रमिकों को अपने अधिकारों, पात्रता और उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा लाभों की जानकारी नहीं होती है।
  5. डिजिटल विभाजन: डिजिटल सेवाओं या आवश्यक दस्तावेजों तक सीमित पहुँच रखने वाले श्रमिकों को पंजीकरण में कठिनाई हो सकती है।
  6. अनियमित आय: गिग श्रमिकों की आय में उतार-चढ़ाव तथा एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर काम करने के कारण सामाजिक सुरक्षा योगदान की गणना जटिल हो सकती है।
  7. एग्रीगेटर कंपनियों की जवाबदेही: कंपनियों द्वारा समय पर योगदान देना तथा कोष में जमा राशि का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना एक महत्त्वपूर्ण चुनौती होगी।

आगे की राह

  1. सार्वभौमिक पंजीकरण: सभी पात्र असंगठित एवं गिग श्रमिकों के लिए सरल, सुलभ और प्रभावी पंजीकरण व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
  2. संस्थागत समन्वय: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सामाजिक सुरक्षा बोर्डों और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के बीच समन्वय मजबूत किया जाना चाहिए।
  3. कोष का पारदर्शी प्रबंधन: सामाजिक सुरक्षा कोष के उचित उपयोग के लिए नियमित लेखा-परीक्षण, निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  4. जागरूकता अभियान: स्थानीय निकायों, श्रमिक संगठनों तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए श्रमिकों को उनके अधिकारों एवं लाभों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
  5. पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा: श्रमिकों के राज्य या कार्यस्थल बदलने पर भी पात्र सामाजिक सुरक्षा लाभों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  6. प्रभावी शिकायत निवारण: पंजीकरण, योगदान और लाभों के वितरण से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सुलभ व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
  7. नियमित मूल्यांकन: बदलते रोजगार स्वरूप के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का गठन भारत के असंगठित एवं गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संस्थागत कदम है।
  • प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार के तेजी से विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त वित्तीय संसाधन, पारदर्शी कोष प्रबंधन और पोर्टेबल कल्याणकारी लाभ इस दिशा में महत्त्वपूर्ण होंगे।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: असंगठित एवं गिग श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में 40 सदस्य होते हैं।
  2. गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में 22 सदस्य होते हैं।
  3. दोनों बोर्डों की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करते हैं।
  4. दोनों बोर्डों की बैठक वर्ष में कम-से-कम छह बार आयोजित करना आवश्यक है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 1, 2 और 3

(c) केवल 2, 3 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

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