केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तेलंगाना सरकार के सहयोग से गैर-संचारी रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
इस कार्यशाला में शामिल हुए-
देशभर से स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी
स्वास्थ्य पेशेवर और नीति निर्माता
कार्यशाला का उद्देश्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, जांच, प्रबंधन, और उपचार के लिए रणनीतियों को मजबूत करना था।
इसमें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सभी की पहुंच और गैर-संचारी रोगों से होने वाली असामयिक मृत्यु दर में कमी लाने पर बल दिया गया।
इसमें गैर-संचारी रोगों के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा, क्षेत्रों के दौरे और ज्ञान-साझाकरण सत्र शामिल थे।
इसमें ‘फिट इंडिया’ और ‘ईट राइट इंडिया’ जैसे अभियानों की भूमिका पर बल दिया गया।
नागालैंड में तंबाकू उन्मूलन व नशा मुक्ति पहल और तेलंगाना के योग तथा स्वास्थ्य प्रणालियों के एकीकरण को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
गैर-संचारी रोग:
ये बीमारियां जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संचारित नहीं होती हैं।
ये आमतौर पर दीर्घकालिक (क्रोनिक) होती हैं।
इनके कारणों में जीवनशैली, पर्यावरणीय कारक और आनुवंशिक प्रवृत्ति शामिल होती हैं।
इनमें कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वसन रोग, ऑटोइम्यून रोग, पार्किंसन रोग, अल्जाइमर रोग, मोतियाबिंद, गुर्दे की पुरानी बीमारी जैसे रोग शामिल हैं।
इन रोगों की रोकथाम के लिए उचित आहार, पूरी नींद, धूम्रपान न करना, और वज़न को नियंत्रित रखना ज़रूरी है।
भारत में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) से जुड़ी स्थिति:
भारत में गैर-संचारी रोगों में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है।
देश में कुल मौतों में एनसीडी की हिस्सेदारी 66% से अधिक है।
ये रोग विशेष रूप से 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को प्रभावित कर रहे हैं।
प्रश्न. गैर-संचारी रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संचारित नहीं होती हैं।
देश में कुल मौतों में इन रोगों की हिस्सेदारी 66% से अधिक है।