- वित्तीय आसूचना एकक-भारत (Financial Intelligence Unit – India : FIU-IND) ने आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (Virtual Digital Asset – VDA) से जुड़ी सेवाएं प्रदान करने वाली रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य क्रिप्टो परिसंपत्तियों के माध्यम से होने वाले:
- धन शोधन (Money Laundering)
- आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing)
- जनसंहार के हथियारों के प्रसार के वित्तपोषण (Proliferation Financing)को रोकना है।
- उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में VDA सेवा प्रदाताओं को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के अंतर्गत लाया गया था।

FIU-IND क्या है?
- यह भारत सरकार की एक राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
- यह वित्तीय लेन-देन से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और विश्लेषण करती है।
- यह AML/CFT ढांचे के क्रियान्वयन की जिम्मेदार संस्था है।
नए दिशा-निर्देशों के प्रमुख प्रावधान
1. प्रधान अधिकारी (Principal Officer – PO) की नियुक्ति
- प्रत्येक VDA सेवा प्रदाता को एक प्रधान अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य होगा।
- यह अधिकारी:
- नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करेगा,
- संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (STR) दाखिल करेगा,
- FIU-IND के साथ समन्वय करेगा।
2. साइबर सुरक्षा एवं डेटा संरक्षण
- सेवा प्रदाताओं को अब:
- CERT-In द्वारा सूचीबद्ध लेखा परीक्षक से
- साइबर सुरक्षा ऑडिट प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
- इसका उद्देश्य:
- डेटा चोरी, हैकिंग, साइबर अपराध से सुरक्षा,
- निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
3. अनहोस्टेड (Self-Custody) वॉलेट लेन-देन की निगरानी
- अनहोस्टेड वॉलेट वे होते हैं जिनका नियंत्रण सीधे उपयोगकर्ता के पास होता है।
- ऐसे वॉलेट से जुड़े अंतरणों पर:
- ग्राहक की पहचान,
- लेन-देन का उद्देश्य,
- जोखिम मूल्यांकन
जैसी जानकारी एकत्र करनी होगी।
यह प्रावधान अवैध गतिविधियों की ट्रेसिंग में सहायक होगा।
4. AML / CFT / CPF अनुपालन
अब VDA सेवा प्रदाताओं को भी अन्य रिपोर्टिंग संस्थाओं (बैंक, NBFC आदि) की तरह:
- KYC पालन
- संदिग्ध लेन-देन रिपोर्टिंग
- रिकॉर्ड रखरखाव
- जोखिम आधारित निगरानी करना अनिवार्य होगा।
आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (VDA) क्या है?
आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार:
कोई भी डिजिटल रूप से उत्पन्न सूचना, कोड, संख्या या टोकन (भारतीय या विदेशी मुद्रा को छोड़कर) जिसे क्रिप्टोग्राफिक या समान तकनीक से बनाया गया हो और जो:
- डिजिटल मूल्य का प्रतिनिधित्व करता हो,
- इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्तांतरणीय (Transferable),
- संग्रहणीय (Storable) या
- व्यापार योग्य (Tradable) हो -उसे VDA कहा जाता है।
इसमें शामिल हैं:
- क्रिप्टोकरेंसी
- NFTs (Non-Fungible Tokens)
- अन्य डिजिटल टोकन
NFT क्या है?
- NFT एक अद्वितीय डिजिटल टोकन होता है।
- यह डिजिटल आर्ट, म्यूजिक, गेम एसेट या वास्तविक परिसंपत्तियों का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
कर प्रावधान (Taxation on VDA)
- VDA के अंतरण से प्राप्त आय पर:
- 30% कर,
- साथ में अधिभार एवं उपकर लगाया जाता है।
- किसी भी प्रकार की छूट या सेट-ऑफ की अनुमति नहीं है।
महत्व
सकारात्मक प्रभाव
- वित्तीय पारदर्शिता में वृद्धि
- अवैध धन प्रवाह पर नियंत्रण
- निवेशकों का संरक्षण
- भारत की वैश्विक AML प्रतिबद्धताओं को मजबूती
चुनौतियाँ
- छोटे स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन लागत बढ़ना
- तकनीकी निगरानी की जटिलता
- विकेंद्रीकृत क्रिप्टो सिस्टम में ट्रैकिंग की कठिनाई