
कानूनी मान्यता:
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित।
- जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC) द्वारा तैयार किया जाता है।
- BMC इसे स्थानीय लोगों के परामर्श और भागीदारी से बनाती है।
मुख्य उद्देश्य:
- स्थानीय जैव संसाधनों और उनसे संबंधित पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण करना।
- स्थानीय समुदायों के ज्ञान और अधिकारों को मान्यता देना।
PBR में दर्ज की जाने वाली सूचनाएं:
- स्थानीय जैव-संसाधनों की जानकारी
- पौधों, जानवरों, कवक आदि की उपलब्धता।
- उनकी औषधीय, खाद्य, कृषि, धार्मिक या अन्य उपयोगिता।
- पारंपरिक/स्थानीय ज्ञान
- खेती, औषधीय उपचार, वन प्रबंधन आदि से जुड़ी स्थानीय तकनीकें और परंपराएं।
PBR की महत्त्व:
- सांस्कृतिक संरक्षण - स्थानीय परंपराओं और ज्ञान की मान्यता और सुरक्षा।
- संधारणीय प्रबंधन - जैव संसाधनों के स्थायी उपयोग के लिए मार्गदर्शन।
- अधिकारों की पुष्टि - स्थानीय समुदायों के स्वामित्व और लाभ-साझेदारी के दावे को समर्थन।
- नीति निर्धारण में योगदान - क्षेत्रीय योजना, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन आदि में उपयोगी।
PBR और अन्य संस्थाएं:
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) और स्थानीय निकायों के बीच सहयोगात्मक ढांचा।
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