चर्चा में क्यों?
हाल ही में, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) ने देशभर के विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए समावेशी शिक्षा पर आधारित 30 मिनट के जागरूकता एवं अभिमुखीकरण मॉड्यूल की स्क्रीनिंग आयोजित की। यह कार्यक्रम PRASHAST पोर्टल के माध्यम से संचालित किया गया।
प्रशस्त (PRASHAST) पोर्टल के बारे में
- PRASHAST का पूरा नाम Pre-Assessment Holistic Screening Tool है। यह विद्यालयों में उपयोग किया जाने वाला एक प्रारंभिक दिव्यांगता स्क्रीनिंग उपकरण है।
- इसके माध्यम से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act) के तहत शामिल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित संभावित स्थितियों वाले बच्चों की पहचान की जाती है।
- यह पोर्टल बच्चों की शुरुआती जांच करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के मूल्यांकन के लिए संबंधित विशेषज्ञों या सक्षम प्राधिकरणों के पास भेजने में मदद करता है।
- इसका उपयोग नियमित शिक्षक, विशेष शिक्षक, परामर्शदाता और विद्यालय प्रमुख कर सकते हैं।
पोर्टल के दो प्रमुख चरण:
प्रशस्त की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को दो भागों में विभाजित किया गया है:
- प्रारंभिक जांच: इस चरण में नियमित शिक्षक, बच्चों की गतिविधियों, व्यवहार और सीखने की प्रक्रिया का अवलोकन करके शुरुआती स्क्रीनिंग करते हैं।
- अवलोकनों का सत्यापन: इस चरण में विशेष शिक्षक या परामर्शदाता प्रारंभिक निष्कर्षों की समीक्षा करते हैं और संभावित दिव्यांगता श्रेणियों की अस्थायी पहचान करते हैं।
बच्चों की पहचान के लिए अपनाई जाती है व्यवस्थित प्रक्रिया:
- प्रशस्त पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने से पहले शिक्षकों को कम से कम 1 से 2 महीने तक बच्चों का विभिन्न परिस्थितियों में निरीक्षण करना चाहिए। इसमें कक्षा में उनकी गतिविधियां, खेल के मैदान में व्यवहार, सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य बच्चों के साथ सामाजिक संवाद शामिल हैं।
- प्रारंभिक स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद संबंधित अवलोकनों का दूसरे स्तर पर सत्यापन किया जाता है। यदि किसी बच्चे को विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है, तो उसे आगे के मूल्यांकन और दिव्यांगता प्रमाणन के लिए सक्षम प्राधिकरण के पास भेजा जा सकता है।
समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने में प्रशस्त (PRASHAST) की भूमिका:
- प्रशस्त पोर्टल शिक्षा मंत्रालय की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सभी बच्चों के लिए समान, सुलभ और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप है।
- इस व्यवस्था के माध्यम से संभावित दिव्यांगता वाले बच्चों की समय रहते पहचान करने और उनकी जरूरतों के अनुसार शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यह विद्यालयों को बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझने और उन्हें शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में सहयोग देती है।