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कश्मीर घाटी में प्रागैतिहासिक कालीन खोज

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)

चर्चा में क्यों 

फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के नवीनतम शोध के अनुसार अब विलुप्त हो चुके हाथियों के उपभोग के लिए 3 लाख वर्ष पूर्व प्रारंभिक मानव द्वारा पत्थरों के औजार का उपयोग किया गया था।

कश्मीर घाटी में प्रागैतिहासिक कालीन खोज

  • मध्य प्लीस्टोसीन युग के अंत में प्रारंभिक मनुष्यों ने 300,000 से 400,000 वर्ष पूर्व अब विलुप्त हो चुके पैलियोलोक्सोडोन प्रजाति के विशाल हाथियों का उपभोग करने के लिए पत्थर के औजारों का उपयोग किया।
    • यह खोज कश्मीर घाटी के पंपोर के पास वर्ष 2000 में खोजे गए जीवाश्मों पर किए गए नए शोध पर आधारित है।
  • यहाँ से तीन हाथी की हड्डियों के टुकड़े पाए गए थे जो प्राचीनकाल के मानव-हाथी संपर्क का संकेत देते हैं।
  • इस स्थल पर प्राचीन मानव द्वारा प्रयुक्त  87 पत्थर के औजारों के संग्रह के साथ ही  हाथियों के अवशेष पाए गए थे। 

शोध के प्रमुख निष्कर्ष 

  • शोधकर्ताओं के अनुसार, हड्डियों के टुकड़ों की पहचान से पता चलता है कि प्रारंभिक मानव हाथी की हड्डियों से मज्जा निकालता था, जिसमें वसा प्रचुर मात्रा में होती है।
    • प्रारंभिक मानव ने पंपोर स्थल पर मज्जा निष्कर्षण के लिए बेसाल्ट पत्थर के औजारों का उपयोग किया था।

  • नवीनतम शोध यह संकेत देते हैं कि यहाँ पाए गए दुर्लभ जीवाश्म, पैलियोलोक्सोडोन नामक एक विलुप्त हाथी प्रजाति के हैं। 
    • जिसके सदस्य आकार में बहुत विशाल थे जिनका वजन आज के अफ्रीकी हाथियों के वजन से दोगुने से भी ज़्यादा था। 
    • विदित है कि इस प्रजाति के प्रथम जीवाश्म साक्ष्य 1955 ई. में तुर्कमेनिस्तान में प्राप्त हुए थे।
    • पैलियोलोक्सोडोन हाथी लगभग दस लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका में पैदा हुए थे और फिर यूरेशिया में चले गए।
  • शोध के अनुसार पंपोर भारतीय उपमहाद्वीप में एकमात्र मध्य प्लेइस्टोसिन स्थल है, जहाँ हाथी के अवशेष पाषाणकालीन संग्रह (पत्थर के औजारों) के साथ पाए गए हैं। 
  • शोध के अनुसार,हाथी की हड्डियों के टूटने और छिलने से मानव द्वारा हड्डियों के उपभोग का पता चलता है, लेकिन शिकार या वध का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलता है।
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