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क्रय प्रबंधक सूचकांक

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सेवा क्षेत्र में अक्तूबर महीने के क्रय प्रबंधक सूचकांक (Purchasing Managers’ Index- PMI) में फरवरी के बाद पहली बार विस्तार देखा गया है। जहाँ सितम्बर में यह सूचकांक 49.8 पर था वहीं अक्तूबर में यह 54.1 पर पहुँच गया।

क्रय प्रबंधक सूचकांक

  • पी.एम.आई. विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधि का एक प्रमुख संकेतक है।
  • यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है, जिसका उद्देश्य कम्पनी के निर्णय निर्माताओं, विश्लेषकों और निवेशकों को बाज़ार अर्थव्यवस्था से जुड़ी वर्तमान एवं भविष्य की स्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
  • इसकी गणना विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिये अलग-अलग की जाती है और फिर एक समग्र सूचकांक का निर्माण किया जाता है।
  • इस सूचकांक के ज़रिये किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। इसमें शामिल लगभग सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से ही होती है।
  • यह सूचकांक 0 से 100 तक की स्केल पर मापा जाता है, जहाँ 50 से ऊपर का आँकड़ा व्यावसायिक विकास को तथा 50 से नीचे का आँकड़ा व्यावसायिक संकुचन (गिरावट) को प्रदर्शित करता है। मध्य बिंदु (50) से विचलन जितना ज़्यादा होगा विस्तार या संकुचन उतना ही ज़्यादा होगा।
  • विगत माह के आँकड़ों से तुलना करने पर व्यावसायिक विस्तार का अंदाज़ा लगाया जा सकता हैं, यदि यह आँकड़ा पिछले महीने की तुलना में अधिक है तो अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। यदि यह पिछले महीने से कम है तो अर्थव्यवस्था संकुचित हो रही है।
  • यह सूचकांक मुख्यतः 5 प्रमुख कारकों- नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, उत्पादन, आपूर्ति-वितरण एवं रोज़गार के वातावरण पर आधारित होता है।
  • पी.एम.आई. आमतौर पर महीने की शुरुआत में, औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और जी.डी.पी. के विस्तार से जुड़े आधिकारिक आँकड़ों से काफी पहले ही जारी किया जाता है। इसलिये, यह आर्थिक गतिविधि का एक अच्छा व प्रमुख संकेतक माना जाता है।
  • कई देशों के केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों पर निर्णय लेने में मदद करने के लिये इस सूचकांक का उपयोग करते हैं।
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