भारत में जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (Population Enumeration) की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में यह प्रक्रिया 1 दिसंबर से शुरू होगी, जबकि देश के अन्य हिस्सों में जनवरी 2027 से जनगणना का दूसरा चरण संचालित किया जाएगा। इस चरण में घर-घर जाकर लोगों से कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए लगभग 34 लाख गणनाकारों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें गणनाकार मोबाइल एप के माध्यम से उत्तरदाताओं की जानकारी दर्ज करेंगे। दूसरे चरण में जाति, धर्म, भाषा, आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़े 13 नए प्रश्न शामिल किए गए हैं, जो जनगणना 2011 की प्रश्नावली का हिस्सा नहीं थे।
जनगणना 2027 के दूसरे चरण में क्या होगा खास?
जनसंख्या गणना के दौरान प्रत्येक उत्तरदाता से जानकारी जुटाने में लगभग 20-25 मिनट का समय लगेगा। इसके विपरीत, पहले चरण यानी मकान सूचीकरण अभियान (House Listing Operations-HLO) में अपेक्षाकृत कम समय लगता है।
प्रत्येक गणना ब्लॉक में लगभग 750-800 लोगों को शामिल किया जाएगा। दूसरे चरण की प्रश्नावली में कुल 40 प्रश्न निर्धारित किए गए हैं, जिनमें 13 नए डेटा फील्ड जोड़े गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित जानकारियां शामिल हैं:
माता और पिता का नाम, धर्म, जन्मस्थान और जन्मतिथि
उत्तरदाता की जाति और धर्म
बैंक खातों की संख्या और जीवनसाथी का नाम
राष्ट्रीयता और डिजिटल साक्षरता
स्थायी आवासीय पता
कोविड-19 टीकाकरण का स्थान
पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
मोबाइल नंबर, आधार नंबर और मतदाता पहचान पत्र का विवरण (यदि उपलब्ध हो)।
इन नए प्रश्नों के माध्यम से देश की जनसंख्या से संबंधित सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत आंकड़ों का व्यापक संकलन किया जाएगा।
डिजिटल जनगणना और प्रशिक्षण व्यवस्था
जनगणना 2027 में आंकड़ों का संकलन मोबाइल एप के जरिए किया जाएगा। इस कार्य के लिए लगभग 34 लाख गणनाकारों और पर्यवेक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी। इनमें अधिकांश सरकारी स्कूलों के शिक्षक शामिल होंगे। इसके अलावा, निजी स्कूलों के शिक्षकों तथा संस्थानों, सोसाइटियों और ट्रस्टों के सदस्यों को भी गणनाकार नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। प्रशिक्षण के लिए चार स्तरीय व्यवस्था अपनाई गई है:
राष्ट्रीय प्रशिक्षक (National Trainers):विषय विशेषज्ञों को राष्ट्रीय प्रशिक्षक नियुक्त किया जाएगा।
मास्टर ट्रेनर्स: राष्ट्रीय प्रशिक्षक, मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेंगे।
फील्ड ट्रेनर्स:मास्टर ट्रेनर्स द्वारा फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गणनाकार और पर्यवेक्षक: फील्ड ट्रेनर्स आगे गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।
प्रशिक्षण सामान्यतः35-50 लोगों के समूह में दिया जाएगा। सभी गणनाकारों और पर्यवेक्षकों के लिए जनसंख्या गणना से जुड़े मोबाइल एप का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त, परिवारों के साथ बेहतर संवाद के लिए PRAMAN रूपरेखा अपनाई गई है। इसमें छह प्रमुख तत्व शामिल हैं - पहचान (Pehchaan), संबंध (Rishta), अनुरोध (Anurodh), सहायता (Madad), आंकड़ों की शुद्धता (Aankada Shuddhata) और निष्ठा (Nishtha)।
संवेदनशील विषयों से संबंधित आंकड़े
जनगणना के दूसरे चरण में कई संवेदनशील विषयों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इनमें धर्म, मातृभाषा, जाति, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की स्थिति, दिव्यांगता, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और आर्थिक गतिविधियां शामिल हैं।
इन विषयों की संवेदनशीलता को देखते हुए गणनाकारों को जानकारी दर्ज करने की सही प्रक्रिया, कोडिंग और प्रश्न पूछने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, उत्तरदाताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत धारणा या पक्षपात से बचने पर जोर दिया गया है।
आधार और जाति से संबंधित प्रश्नों का महत्व
जनगणना 2027 की प्रश्नावली में प्रश्न संख्या 37 के तहत उत्तरदाता से आधार नंबर मांगा जाएगा। हालांकि, आधार संबंधी जानकारी देना वैकल्पिक है। यदि कोई व्यक्ति अपना आधार नंबर साझा नहीं करना चाहता है, तो गणनाकार इस प्रश्न को छोड़ सकते हैं।
दूसरी ओर, प्रश्न संख्या 10(C) जाति से संबंधित है। इसके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अतिरिक्त अन्य जातियों के उत्तरदाताओं को अपनी जाति का नाम दर्ज कराना होगा।
इस प्रश्न में जाति का नाम लिखने के लिए कोई पूर्वनिर्धारित ड्रॉप-डाउन सूची नहीं होगी। इसके बजाय, गणनाकारों को खुले कॉलम में जाति का नाम दर्ज करना होगा। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पहले से निर्धारित विकल्प उपलब्ध होंगे।
प्रश्न संख्या 10(C) में दो अन्य विकल्प भी शामिल किए गए हैं:
जाति घोषित नहीं करना चाहते।
कोई जाति नहीं।
इस प्रकार, स्वतंत्रता के बाद पहली बार जनगणना में व्यापक स्तर पर जाति संबंधी आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम निर्धारित नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर से जुड़े नए डेटा फील्ड
जनगणना 2027 के कुछ नए प्रश्न वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के पूर्वाभ्यास फॉर्म में शामिल प्रश्नों के समान हैं। इनमें माता-पिता का विवरण, आधार, मोबाइल नंबर, मतदाता पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारियां शामिल हैं।
एनपीआर को पहली बार वर्ष 2011 में तैयार किया गया था और वर्ष 2015 में अपडेट किया गया। इसमें परिवारवार लगभग 119 करोड़ निवासियों का डेटाबेस उपलब्ध है।
निष्कर्ष
जनगणना 2027 का दूसरा चरण देश की जनसंख्या से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के संकलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। डिजिटल माध्यम, विस्तृत प्रश्नावली और प्रशिक्षित कार्यबल के जरिए इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जाति, धर्म, प्रवासन, दिव्यांगता और अन्य नए डेटा फील्ड को शामिल करने से देश की बदलती सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय स्थिति का व्यापक आकलन करने में मदद मिलेगी।