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वोडू धर्म

सदियों से राजनेताओं एवं बुद्धिजीवियों द्वारा सार्वजनिक रूप से परित्यक्त ‘वोडू (Vodou)’ पूरे हैती में एक अधिक शक्तिशाली व स्वीकृत धर्म में परिवर्तित हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हैती में हाल के वर्षों में इस धर्म के अनुयायी धार्मिक अत्याचार से प्रताड़ित हुए हैं। 

वोडू धर्म के बारे में 

  • वोडू एक अफ्रीकी प्रवासी धर्म है जो 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच हैती में विकसित हुआ। 
  • यह पश्चिम अफ़्रीकी दाहोमियन, कोंगो, योरूबा व अन्य जातीय समूहों के वोडू धर्म एवं रोमन कैथोलिकवाद का समन्वय है। 
    • इन जातीय समूह के लोगों को दासों के रूप में औपनिवेशिक सेंट-डोमिंगु (हैती का पुराना नाम) में बसाया गया था और 16वीं-17वीं सदी में रोमन कैथोलिक मिशनरियों ने इन्हें आंशिक रूप से ईसाई बना दिया था।
  • अफ़्रीकी राज्य दाहोमी (बेनिन का पुराना नाम) की फ़ॉन भाषा में वोडू शब्द का अर्थ ‘आत्मा’ या ‘देवता’ होता है।

विशेषताएँ 

  • वोडू एक वैश्विक दृष्टिकोण है जिसमें दर्शन, चिकित्सा, न्याय एवं धर्म शामिल हैं। इसका मूल सिद्धांत यह है कि सब कुछ आत्मा है। मनुष्य आत्माएं हैं जो दृश्य जगत में निवास करती हैं।
    • वोडू का प्राथमिक लक्ष्य एवं गतिविधि इसी आत्मा की सेवा (मानवता की सेवा) करना है। 
    • इसमें लोग स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं अनुग्रह की प्राप्ति के लिए देवताओं व विशेष आत्माओं की प्रार्थना एवं विभिन्न भक्ति अनुष्ठान करते हैं।
  • वोडू धार्मिक परंपरा रोमन कैथोलिक धर्म के समान किसी पुस्तक पर आधारित न होकर एक मौखिक परंपरा है।
    • इसका प्रसार पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार के बुजुर्ग सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिसमें भक्ति प्रथाओं के साथ-साथ पारिवारिक भावनाएँ भी एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी को प्राप्त होती हैं।
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