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एस्टेरॉयड 2024 YR4

हाल ही में, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने स्पष्ट किया है कि 22 दिसंबर, 2032 को क्षुद्रग्रह 2024 YR4 के चंद्रमा से टकराने की संभावना नहीं है। जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope) से प्राप्त नवीनतम एवं अधिक सटीक गणनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह क्षुद्रग्रह चंद्रमा से लगभग 21,200 किमी. की सुरक्षित दूरी से गुजर जाएगा। 

एस्टेरॉयड 2024 YR4 के बारे में 

  • 2024 YR4 एक नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (NEO) है जिसे अपोलो-प्रकार के क्षुद्रग्रह की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे क्षुद्रग्रह पृथ्वी की कक्षा को काटते हैं और इसलिए वैज्ञानिकों की विशेष निगरानी में रहते हैं।
  • इसकी खोज दिसंबर 2024 में चिली में संचालित एटलस सर्वे (ATLAS Survey) द्वारा की गई थी। खोज के तुरंत बाद यह वैश्विक स्तर पर चर्चा में आ गया क्योंकि इसे हाल के वर्षों में पहचाने गए अपेक्षाकृत खतरनाक क्षुद्रग्रहों में गिना गया। उस समय इसे टोरिनो स्केल (Torino Scale) पर 3 का स्तर दिया गया था जो वर्ष 2004 में खोजे गए क्षुद्रग्रह अपोफिस (Apophis) के बाद सर्वाधिक था। 

उत्पत्ति एवं निर्माण 

  • वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इस क्षुद्रग्रह की उत्पत्ति मंगल एवं बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी (Main Asteroid Belt) के मध्य भाग से मानी जाती है।
  • यार्कोव्स्की प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि यह पिंड समय के साथ यार्कोव्स्की प्रभाव (Yarkovsky Effect) के कारण अपनी मूल कक्षा से धीरे-धीरे पृथ्वी के निकट आ गया। इस प्रभाव में सूर्य से प्राप्त असमान ऊष्मा किसी सूक्ष्म प्रणोदक (Thruster) की तरह कार्य करती है और लाखों वर्षों में क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदल सकती है।
  • किसी बड़े क्षुद्रग्रह का टुकड़ा: इसके आकार और संरचना से संकेत मिलता है कि यह संभवतः पहले किसी बड़े रबल-पाइल क्षुद्रग्रह की सतह पर मौजूद एक चट्टानी टुकड़ा रहा होगा, जो बाद में किसी टक्कर के कारण अलग होकर स्वतंत्र पिंड बन गया।  

प्रमुख विशेषताएँ 

  • आकार: इसका व्यास लगभग 53 से 67 मीटर के बीच अनुमानित है जो लगभग 15 मंजिला इमारत के बराबर है।
  • आकृति: अवलोकनों के आधार पर इसकी आकृति चपटी और गोलाई लिए हुए बताई जाती है जिसे प्राय: हॉकी पक के समान माना जाता है।
  • संरचना: यह एक S-प्रकार (Stony-type) क्षुद्रग्रह है जिसमें मुख्यत: सिलिकेट खनिज और निकेल-लौह तत्व पाए जाते हैं।
  • तेज घूर्णन: इसकी घूर्णन अवधि बहुत कम (लगभग 19.5 से 20 मिनट) है जो इसे तीव्र गति से घूमने वाले क्षुद्रग्रहों में शामिल करती है। 

महत्व 

  • यह पहला क्षुद्रग्रह था जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह चेतावनी नेटवर्क (International Asteroid Warning Network) और अंतरिक्ष मिशन योजना सलाहकार समूह (Space Mission Planning Advisory Group) के बीच समन्वित प्रतिक्रिया शुरू की गई।
  • वर्ष 2026 की शुरुआत में जब यह क्षुद्रग्रह अत्यंत मंद दिखाई दे रहा था, तब इसकी सफल ट्रैकिंग ने यह भी साबित किया कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ग्रह रक्षा (Planetary Defence) से जुड़े कार्यों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है जबकि इसे मूल रूप से इस उद्देश्य से विकसित नहीं किया गया था। 
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