चर्चा में क्यों ?
दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर अत्याधुनिक स्काईकास्ट सिस्टम स्थापित किया है। इस तकनीक के लागू होने के साथ ही भारत इसे अपनाने वाला दुनिया का 19वां देश बन गया है। यह प्रणाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन मौसम (Mission Mausam) पहल के अंतर्गत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य घने कोहरे, कम दृश्यता, तेज हवाओं और वायुमंडलीय अशांति जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के दौरान उड़ानों की सुरक्षा और संचालन क्षमता को बेहतर बनाना है।

क्या है स्काईकास्ट सिस्टम ?
- SkyCast एक उन्नत मौसम निगरानी एवं पूर्वानुमान प्रणाली है, जो वास्तविक समय (Real-Time) में वायुमंडलीय परिस्थितियों की जानकारी प्रदान करती है। यह विभिन्न आधुनिक सेंसरों और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से मौसम में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का विश्लेषण कर सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध कराती है।
- इस प्रणाली से पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और हवाई अड्डा प्रबंधन को मौसम संबंधी त्वरित एवं सटीक जानकारी प्राप्त होगी, जिससे उड़ानों का संचालन अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
स्काईकास्ट सिस्टम कैसे काम करता है ?
SkyCast कई आधुनिक तकनीकों को एकीकृत करके मौसम की निगरानी करता है।
इसके प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं-
1. रडार विंड प्रोफाइलर (Radar Wind Profiler)
- यह उपकरण लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और वायुमंडलीय गतिविधियों का विश्लेषण करता है। इससे मौसम में अचानक होने वाले बदलावों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
2. सोडार (SODAR)
- Sonic Detection and Ranging तकनीक ध्वनि तरंगों की सहायता से निचले वायुमंडल की संरचना और वायु प्रवाह का अध्ययन करती है।
3. माइक्रोवेव रेडियोमीटर
- यह वायुमंडल में तापमान और आर्द्रता के स्तर को मापता है, जिससे मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ती है।
4. ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS)
- यह कोहरे की बूंदों और एरोसोल कणों का अध्ययन करके कोहरे के निर्माण और उसके घनत्व का अनुमान लगाने में सहायता करता है।
5. CL61 लिडार-आधारित सीलोमीटर
- यह उपकरण कोहरे और बादलों की ऊर्ध्वाधर संरचना की निगरानी करता है तथा दृश्यता की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराता है।
WiFEX परियोजना से मिली तकनीकी आधारशिला
- स्काईकास्ट सिस्टम का विकास Winter Fog Experiment (WiFEX) परियोजना के अनुभवों और शोध निष्कर्षों पर आधारित है। वर्ष 2015 में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय हवाई अड्डों पर सर्दियों में पड़ने वाले घने कोहरे का वैज्ञानिक अध्ययन करना था।
- इस परियोजना का संचालन भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
स्काईकास्ट सिस्टम के प्रमुख लाभ
- उड़ानों की सुरक्षा में वृद्धि
- पायलटों को वास्तविक समय में मौसम की सटीक जानकारी मिलने से दुर्घटना और जोखिम की संभावना कम होगी।
- कोहरे के दौरान बेहतर संचालन
- दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हवाई अड्डे सर्दियों में घने कोहरे से प्रभावित होते हैं। स्काईकास्ट इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- उड़ानों में देरी और रद्दीकरण में कमी
- बेहतर मौसम पूर्वानुमान के कारण एयरलाइंस समय पर योजना बना सकेंगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी।
- एयर ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल को अधिक विश्वसनीय मौसम डेटा प्राप्त होगा, जिससे विमान संचालन अधिक सुरक्षित और कुशल बनेगा।
- मौसम पूर्वानुमान क्षमता में वृद्धि
- यह प्रणाली भारत की मौसम निगरानी और पूर्वानुमान क्षमताओं को वैश्विक स्तर तक मजबूत बनाने में सहायक होगी।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रणाली ?
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- भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। हर वर्ष करोड़ों यात्री हवाई यात्रा करते हैं। ऐसे में मौसम संबंधी व्यवधानों को कम करना और उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
- स्काईकास्ट सिस्टम न केवल विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाएगा, बल्कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमताओं को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
निष्कर्ष
स्काईकास्ट सिस्टम भारत के विमानन और मौसम विज्ञान क्षेत्र में तकनीकी नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अत्याधुनिक सेंसरों, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और सटीक मौसम पूर्वानुमान की सहायता से यह प्रणाली खराब मौसम के प्रभाव को कम करने, उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाने तथा यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मिशन मौसम के अंतर्गत उठाया गया यह कदम भारत को वैश्विक विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।