चर्चा में क्यों?
हाल ही में निदेशालय, सेटलमेंट एवं भूमि अभिलेख द्वारा मडगांव, कुंकोलिम और पणजी शहरों में राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित शहरी आवासीय भूमि सर्वेक्षण (NAKSHA) पायलट परियोजना के तहत एक महीने तक चलने वाली जांच प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस पहल को लेकर स्थानीय लोगों में जहां उत्सुकता बढ़ी है, वहीं कुछ लोगों के मन में इससे जुड़ी चिंताएं और सवाल भी सामने आ रहे हैं।
नक्शा पहल के बारे में
NAKSHA (NAtional geospatial Knowledge-based land Survey of urban HAbitations) यानी राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान आधारित शहरी बस्तियों का भूमि सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण एक वर्षीय पायलट कार्यक्रम है।
संचालन:
- इसे डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources - DoLR) द्वारा शुरू किया गया है।
उद्देश्य:
- इस पहल का उद्देश्य देश में शहरी भूमि अभिलेखों (Urban Land Records) को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाना है।
- इसके अंतर्गत 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 157 शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies - ULBs) में कार्य किया जाएगा। यह परियोजना 4,484 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करेगी और लगभग 1.5 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ पहुंचाएगी।
- नक्शा अत्याधुनिक हवाई सर्वेक्षण (Aerial Survey) और मैदानी सर्वेक्षण (Field Survey) तकनीकों का उपयोग करते हुए शहरी भूमि भूखंडों (Urban Land Parcels) का एक व्यापक GIS आधारित डेटाबेस तैयार कर रहा है।
परियोजना में तकनीकी सहयोग:
इस परियोजना को तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाली प्रमुख संस्थाओं में शामिल हैं -
- भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India)
- एनआईसीएसआई (NICSI) - नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज़ इन्कॉरपोरेटेड
- एमपीएसईडीसी (MPSeDC) - मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
- पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence)
NAKSHA की आवश्यकता क्यों है?
वर्ष 2031 तक भारत के शहरों में रहने वाली आबादी के 60 करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में सटीक, पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध शहरी भूमि रिकॉर्ड की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। नक्शा इस चुनौती को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से -
- संपत्ति स्वामित्व में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- शहरी नियोजन (Urban Planning) की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।
- बेहतर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में सहायता मिलेगी।
- नगर निकायों की राजस्व वसूली क्षमता मजबूत होगी।
- आपदा प्रबंधन और आपातकालीन तैयारियों में सुधार आएगा।
- कानूनी रूप से प्रमाणित और विश्वसनीय भूमि डेटा उपलब्ध होगा, जिससे आम जनता का भरोसा बढ़ेगा।
- निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।